इक्विटी निवेश में धैर्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी: रविंद्र तिवारी

मार्केट की गिरावट को अवसर समझें, लंबी अवधि में निवेश हमेशा लाभकारी

उदय भूमि संवाददाता

गाजियाबाद। शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव अक्सर निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनता है। मार्केट के अचानक गिरने या बढऩे पर निवेशक अक्सर घबराकर जल्दबाजी में फैसले ले लेते हैं, जो उनके पोर्टफोलियो को नुकसान पहुँचा सकते हैं। ऐसे समय में वरिष्ठ वित्तीय विशेषज्ञ रविंद्र तिवारी का मानना है कि धैर्य और अनुशासन ही इक्विटी निवेश में सफलता की असली कुंजी हैं। 17 सितंबर को शेयर बाज़ार में आई अचानक तेजी ने यह साबित कर दिया कि अस्थायी गिरावट के बाद बाज़ार हमेशा ऊपर की ओर लौटता है। रविंद्र तिवारी ने कहा कि निवेशकों को छोटे उतार-चढ़ाव से घबराने की बजाय लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि कोई निवेशक 5 से 7 वर्षों तक नियमित निवेश करता है, तो बाज़ार की गिरावट और उछाल दोनों ही समय के साथ उसके पोर्टफोलियो को मजबूत बनाते हैं।
रविंद्र तिवारी ने भविष्यवाणी की कि आने वाले वर्षों में सेंसेक्स 95,000 से 1,00,000 के स्तर तक पहुँच सकता है, और इससे औसतन 14 से 15 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न मिलने की उम्मीद है। उन्होंने निवेशकों को चेतावनी दी कि यह केवल धैर्यपूर्वक और अनुशासित निवेश करने वाले लोगों के लिए संभव होगा।

रविंद्र तिवारी ने कहा कि आज की गिरावट कल की प्रगति की नींव है। धैर्य रखिए, भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कॉर्पोरेट ग्रोथ इक्विटी निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आएगी। रविंद्र तिवारी का संदेश स्पष्ट है कि शॉर्ट-टर्म मार्केट उतार-चढ़ाव से घबराने की बजाय, दीर्घकालिक निवेश और अनुशासन ही सफलता की गारंटी है। निवेशकों को चाहिए कि वे बाजार की ऊंच-नीच को अवसर में बदलें और नियमित रूप से निवेश जारी रखें। निवेश के इस दृष्टिकोण को अपनाकर न केवल धन वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में भी स्थिरता और विकास को बल मिलेगा।

निवेश के लिए रविंद्र तिवारी के मूल मंत्र

  • गिरावट को अवसर समझें: मार्केट गिरने पर घबराएँ नहीं, बल्कि इसे सही निवेश का अवसर मानें।
  • नियमित निवेश: हर स्तर पर निवेश करने से औसत बाइंग होती है और निवेश चक्र मजबूत बनता है।
  • धैर्य और अनुशासन: लंबी अवधि में लाभ प्राप्त करने के लिए धैर्यपूर्वक और अनुशासित रहना आवश्यक है।
  • वित्तीय सलाहकार से परामर्श: समय-समय पर अपने वित्तीय सलाहकार से मार्गदर्शन लेते रहें।