-इंटरचेंज की बढ़ी लागत पर कैबिनेट की मुहर, जल्द होगा निर्माण शुरू
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने का रास्ता साफ हो गया। इंटरचेंज की बढ़ी लागत पर प्रदेश सरकार ने मुहर लगा दी है। इस इंटरचेंज के बनने से कई शहरों की आवाजाही सुगम हो जाएगी। यह मामला 2023 से अटका था। अब काम तेजी से चल सकेगा।
यमुना एक्सप्रेसवे के 10 किमी प्वाइंट पर जगनपुर अफजलपुर गांव के नजदीक इंटरचेंज बनना है। यमुना प्राधिकरण ने दोनों एक्सप्रेसवे जोड़ने के लिए इंटरचेंज निर्माण की जिम्मेदारी 2019 में दिल्ली की देव एस कंपनी को सौंपी थी। किसानों से जमीन न मिलने पर इंटरचेंज का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। जमीन का रोड़ा दूर हुआ तो इंटरचेंज की लागत में 22 करोड़ रुपये की वृद्धि हो गई। इंटरचेंज निर्माण की जिम्मेदारी एनएचएआई को सौंपी गई थी, पर कैबिनेट स्वीकृति मिलने के इंतजार में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सकता था। बीते मंगलवार को प्रदेश कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। इंटरचेंज के निर्माण में आठ लूप बनाए जाएंगे। इनकी लंबाई 11 किलोमीटर होगी। चार लूप उतरने व चार लूप चढ़ने के लिए बनाए जाएंगे। यीडा की साठ मीटर सड़क भी इंटरचेंज से जुड़ेगी। इससे यीडा क्षेत्र के सेक्टरों की सीधे कनेक्टिविटी हो जाएगी। नोएडा एयरपोर्ट आने वालों को भी सहूलियत होगी।
जमीन अधिग्रहण पहले हो चुका
जगनपुर अफजलपुर गांव के नजदीक इंटरचेंज निर्माण के लिए साठ हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जा चुकी है। इंटरचेंज की लागत एनएचएआई वहन करेगा। इसकी वसूली के लिए वह टोल शुल्क वसूल करेगा। इंटरचेंज के निर्माण के हरियाणा व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के लोगों को फायदा होगा। इसमें गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, बागपत, मेरठ, मथुरा, आगरा, अलीगढ़ के अलावा हरियाणा के सोनीपत आदि जिले शामिल हैं। इंटरचेंज से एक एक्सप्रेसवे से दूसरे एक्सप्रेसवे के बीच आवाजाही आसान हो जाएगी।
20 किमी तक की दूरी होगी कम
ग्रेटर नोएडा होकर दोनों एक्सप्रेसवे के बीच आवाजाही के लिए 15 से 20 किमी दूरी कम हो जाएगी। सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने के साथ परीचौक, नोएडा, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा की कासना क्षेत्र की सड़क पर वाहनों का दबाव कम होगा। ईंधन और समय की बचत होगी।

सीईओ
यमुना प्राधिकरण।
यमुना एक्सप्रेसवे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए बनने वाले इंटरचेंज की लागत बढ़ गई थी। इसका अनुमोदन कैबिनेट से होना था। कैबिनेट से इस पर मुहर लगा दी है। जमीन पहले से है। जल्द ही इसका निर्माण शुरू होगा।
डॉ अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण
















