इंद्रप्रस्थ योजना में सीवर की समस्या का स्थायी समाधान अब एक कदम और करीब

-जीडीए की 8 करोड़ की परियोजना को मिली रफ्तार, 1.50 लाख निवासियों को राहत

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबादवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की बहुप्रतीक्षित इंद्रप्रस्थ योजना, जो लंबे समय से सीवर जाम और जल निकासी की समस्या से जूझ रही थी, अब इस परेशानी से स्थायी रूप से निजात पाने की ओर अग्रसर हो गई है। इस योजना में तीन चरणों में सीवर लाइन डाले जाने का काम चल रहा है, जिसका तीसरा और अंतिम चरण अब 8 करोड़ रुपये की लागत से शुरू होने जा रहा है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के नेतृत्व में इंद्रप्रस्थ योजना को प्राथमिकता सूची में रखा गया है। उन्होंने प्रभारी चीफ इंजीनियर मानवेंद्र कुमार सिंह को स्पष्ट निर्देश दिए कि सीवर कार्य की प्रगति में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान कार्य की गति धीमी मिलने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई, जिसके बाद कार्य की रफ्तार में तेजी आई है।

इंद्रप्रस्थ योजना कुल 66 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली हुई है और इसमें विभिन्न पॉकेट्स – बी, डी, ई, एच, एफ सहित आसपास की भारत सिटी ग्रुप हाउसिंग सोसायटी भी शामिल है। इस चरण में इन सभी पॉकेट्स को एक साथ सीवर लाइन नेटवर्क से जोडऩे का कार्य प्रस्तावित है। जीडीए अगले सप्ताह इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है, जिसके बाद कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। तीन चरणों में हो रहे इस विकास कार्य के पहले चरण में 4.50 करोड़ रुपये की लागत से डीपीएस स्कूल के पास सीवरेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) का निर्माण किया गया, जिसे सफलता पूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। दूसरे चरण में 1800 मीटर लंबी सीवर लाइन बिछाने का कार्य जल निगम द्वारा किया जा रहा है, जिसमें से 1000 मीटर लाइन पहले ही डाली जा चुकी है। इस कार्य पर 3.50 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और इसे अगले महीने तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है।

जैसे ही तीसरे चरण का कार्य पूरा होगा, इंद्रप्रस्थ योजना और इससे सटे हजारों परिवारों को जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और गंदगी जैसी समस्याओं से स्थायी राहत मिलेगी। अनुमान है कि इस विकास कार्य का सीधा लाभ 30 हजार परिवारों और लगभग 1.50 लाख लोगों को मिलेगा। यह योजना न केवल रहवासियों के जीवनस्तर को बेहतर बनाएगी, बल्कि गाजियाबाद शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर में भी महत्वपूर्ण सुधार लेकर आएगी। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने कहा कि यह विकास कार्य केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि नागरिकों को बेहतर और सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्राधिकरण का उद्देश्य केवल सीवर की समस्या का समाधान करना नहीं है, बल्कि क्षेत्र को स्मार्ट, स्वच्छ और सुगठित नगरीय मॉडल के रूप में विकसित करना है। इंद्रप्रस्थ योजना के तेजी से बढ़ते इस कार्य को देखकर यह साफ हो जाता है कि जीडीए अब सिर्फ योजनाएं नहीं बना रहा, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर नागरिकों की जिंदगी में वास्तविक बदलाव लाने के मिशन पर जुटा है। यह पहल आने वाले समय में गाजियाबाद के विकास की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।

अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष

इंद्रप्रस्थ योजना में सीवर की समस्या को हम पूरी गंभीरता से ले रहे हैं। यह केवल एक तकनीकी कार्य नहीं, बल्कि जनता को सम्मानजनक और स्वच्छ जीवन देने की दिशा में हमारा दायित्व है। हमने साफ निर्देश दिए हैं कि काम में कोई भी देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तीन चरणों में हो रहे कार्यों में अंतिम चरण का टेंडर अगले सप्ताह जारी किया जाएगा, और हमारा लक्ष्य है कि जल्द से जल्द 1.50 लाख लोगों को इस समस्या से स्थायी राहत दी जा सके। यह परियोजना गाजियाबाद के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार लाएगी।
अतुल वत्स, उपाध्यक्ष,
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण