सत्तारूढ़ एनसीपी में संग्राम, पीएम की चिंता बढ़ी
काठमांडू। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। वहां फिर सियासी संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की मुश्किलें पुन: बढऩे लगी हैं। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में सत्ता के लिए घमासान की स्थिति है। सत्ता संघर्ष के बीच नेपाल में चीनी राजदूत हाओ यांकी ने प्रधानमंत्री ओली से मुलाकात की है। कुछ माह पहले भी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में आपसी टकराव उत्पन्न हो गया था। उस समय भी चीनी राजदूत के दखल से नेपाल सियासी संकट से बाहर आ पाया था। प्रधानमंत्री के कार्यालय और सचिवालय ने चीनी राजदूत यांकी और प्रधानमंत्री ओली के बीच वार्ता की पुष्टि की। मुलाकात के दरम्यान किन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, यह सामने नहीं आ सका है। चर्चा है कि एनसीपी की आज महत्वपूर्ण बैठक होनी है। इस बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से इस्तीफा मांगा जा सकता है। हालांकि चीन नहीं चाहता कि ओली सरकार पर कोई संकट आए। ओली चीन समर्थक नीतियों के कारण एनसीपी में निशाने पर रहे हैं। सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर सचिवालय की प्रस्तावित बैठक को लेकर मतभेद गहरा गया है। प्रधानमंत्री ओली ने बैठक को स्थगित करने को सह-अध्यक्ष पुष्प कमल दहल को प्रस्ताव भेजा है। जबकि दहल बैठक कराने पर अड़े हैं। एनसीपी के 9 सदस्यीय सचिवालय में से 5 सदस्य दहल, माधव नेपाल, झाल नाथ खनाल, बामदेव गौतम और नारायण काजी श्रेष्ठ बैठक के लिए दबाव डाल रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री ओली के साथ बिष्णु पोडेल, ईश्वर पोकेल और राम बहादुर थापा बैठक को स्थगित करना चाहते हैं। चर्चा है कि ओली और प्रचंड के बीच बढ़ते टकराव से एनसीपी बिखर सकती है। उधर, चीनी राजदूत की पूरी कोशिश है कि नेपाल में ओली के नेतृत्व में सत्ता चलती रहे। चीन का नेपाल की सत्ता में बढ़ता दखल भी विवाद का कारण है।
















