निजीकरण के खिलाफ बिजली विभाग के कर्मचारियों में आया उबाल

– पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
– गाजियाबाद में चीफ इंजीनियर कार्यालय पर किया प्रदर्शन, नारेबाजी करते हुए प्राइवेटाइजेशन का निर्णय वापस लेने की कर्मचारियों ने रखी मांग
– पूर्वांचल के सभी जिलों में 1 सितम्बर से विरोध सभाओं का क्रम चल रहा है जो 18 सितम्बर को भी जारी रहा, शाम में एक घंटे तक नारेबाजी हुई

उदय भूमि ब्यूरो
लखनऊ/गाजियाबाद। बिजली वितरण व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के सरकार के निर्णय के खिलाफ कर्मचारियों में आक्रोश पनप रहा है। लखनऊ से लेकर सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। सरकार द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय के विरोध में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण के निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज होगा। शनिवार को गाजियाबाद में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के चीफ इंजीनियर आॅफिस पर कर्मचारियों ने हाथों में बैनर लेकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण एवं विघटन के विरोध में राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के सभी जनपदों में परियोजना मुख्यालय पर बिजली विभाग के कर्मचारियों एवं इंजीनियरों ने प्रदर्शन किया। पूर्वांचल के सभी जिलों में 1 सितम्बर से विरोध सभाओं का क्रम चल रहा है जो 18 सितम्बर को भी जारी रहा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी अवधेश कुमार, अनिल चौरसिया, हिर्देश गोस्वामी, आलोक त्रिपाठी, उमाकांत शर्मा, भुवनेश, के के सोलंकी, रामनारायण, योगेंद्र लाखा, दिलनवाज, पंकज भारद्वाज, धीरज सिंह, जय भगवान, संविदा कर्मचारी पम्मी सहित काफी संख्या में कर्मचारी और इंजीनियर शनिवार दोपहर में चीफ इंजीनियर आॅफिस पर जमा हुए और सरकार के निर्णय के विरोध में नारेबाजी की। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के विघटन व निजीकरण का फैसला वापस न लिया गया और इस दिशा में सरकार की ओर से कोई भी कदम उठाया गया तो ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर व अभियंता बिना कोई नोटिस दिए अनिश्चित कालीन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वह प्रभावी हस्तक्षेप करने की कृपा करें जिससे निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त हो सके और उनके कुशल नेतृत्व में बिजली कर्मी पूर्ववत पूर्ण निष्ठा से बिजली आपूर्ति और सुधार के कार्य में जुटे रह सकें।
संघर्ष समिति का कहना है कि प्राइवेटाइजेशन से उपभोक्ताओं को बेतहाशा महंगी बिजली मिलेगी और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन आंदोलन चलाया जाएगा जिसमें पूर्ण हड़ताल भी सम्मिलित होगी।

सरकार बिजली विभाग का प्राइवेटाइजेशन करके जन विरोधी कदम उठा रही है। यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता है तो कर्मचारियों का आंदोलन और तेज होगा। अभी प्रतिदिन कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करेंगे। निजीकरण के खिलाफ जनआंदोलन चलाया जाएगा।
अवधेश कुमार
संयोजक
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति