तुलसी निकेतन में होगा पुनर्विकास, जर्जर भवनों की जगह बनेंगी आधुनिक बहुमंजिला इमारतें

• जीडीए उपाध्यक्ष ने किया स्थलीय निरीक्षण, जल्द शुरू होगी पुनर्निर्माण की योजना
• 16 एकड़ में बहुमंजिला इमारतों का निर्माण, निवासियों को मिलेगा सुरक्षित आवास
• पीपीपी मॉडल पर होगा पुनर्विकास, अन्य राज्यों की तर्ज पर तैयार होगा नया प्लान
• जीडीए की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव को मिली मंजूरी, जल्द शुरू होगी प्रक्रिया
• अब जर्जर भवनों की जगह होगी स्मार्ट टाउनशिप, गाजियाबाद में एक नई पहचान बनाएगा तुलसी निकेतन

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा विकसित तुलसी निकेतन योजना के जर्जर भवनों को तोड़कर नए सिरे से बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जाएगा। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने सोमवार को तुलसी निकेतन का दौरा कर वहां के हालात का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि भवनों का प्लास्टर गिर रहा है, संरचनाएं कमजोर हो चुकी हैं और लोग खतरनाक स्थिति में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने स्थानीय निवासियों की समस्याएं भी सुनीं और आश्वासन दिया कि अब जल्द ही इन भवनों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। करीब 35 साल पहले बने ये भवन अब रहने लायक नहीं बचे हैं। बारिश के दौरान कॉलोनी में कई फुट पानी भर जाता है, पीने का पानी दूषित आता है और पानी की टंकी की स्थिति भी बेहद खराब है। इसके अलावा, मकानों के गिरने का खतरा भी बना रहता है, जिससे यहां रहने वाले 20,000 से अधिक लोग भयभीत रहते हैं।

जर्जर भवनों को तोड़कर 16 एकड़ में बनेगी आधुनिक टाउनशिप
जीडीए ने इस योजना के पुनर्विकास के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत 16 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जाएगा। जीडीए बोर्ड बैठक में इस योजना के पुनर्विकास प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

इस योजना में शामिल होंगे:
• 2004 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैट
• 288 एलआईजी (निम्न आय वर्ग) फ्लैट
• 60 दुकानों के लिए आधुनिक व्यापारिक परिसर
अब अन्य राज्यों की तर्ज पर इस पुनर्विकास प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए जीडीए कंसल्टेंट नियुक्त करेगा। एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) और रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (एफएफपी) दस्तावेज तैयार किए जाएंगे, ताकि निजी विकासकर्ताओं को इस योजना में शामिल किया जा सके।

पहले भी हुए थे सर्वे, अब धरातल पर होगा बड़ा बदलाव
• वर्ष 2018 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली की टीम से इन भवनों का सर्वे कराया गया था, जिसमें इन्हें असुरक्षित घोषित किया गया था।
• जीडीए नगर निगम और डीडीए के सहयोग से अब डोर-टू-डोर सर्वे कर मूल निवासियों की सूची तैयार करेगा।
• निवासियों को नए मकान बनने के बाद पुन: आवंटन मिलेगा ताकि वे सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं वाले आवास में रह सकें।

तुलसी निकेतन का नया स्वरूप:
• सुरक्षित और मजबूत बहुमंजिला इमारतें
• बेहतर जल निकासी और पेयजल आपूर्ति
• आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय परिसर
• बाजार और व्यावसायिक केंद्रों का विकास
• हरित क्षेत्र और पार्कों का निर्माण

तुलसी निकेतन को नया स्वरूप देंगे, निवासियों को मिलेगा सुरक्षित और बेहतर आवास

अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष

तुलसी निकेतन के जर्जर भवनों की स्थिति बेहद खराब है, जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। इसलिए जीडीए ने फैसला किया है कि इन भवनों को तोड़कर आधुनिक बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जाएगा। इस पुनर्विकास योजना के तहत लोगों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिलेंगी। जलभराव, दूषित पानी और अन्य समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। जीडीए इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष