गीत और संस्कृति का सम्मान: तरुण मिश्र की मशहूर कलाकारों से शिष्टाचार मुलाकात

-गीतकार मनोज मुंतशिर और गायक उदित नारायण से हुई संवाद में तरुण मिश्र ने जताई संस्कृति और सनातन पर गर्व

उदय भूमि संवाददाता
मुंबई। जनसेवक तरुण मिश्र ने मुंबई यात्रा के दौरान बुधवार को देश के प्रसिद्ध गायक पद्म भूषण उदित नारायण झा और चर्चित गीतकार मनोज मुंतशिर (मनोज मुंतशिर शुक्ला) से शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर तरुण मिश्र ने दोनों कलाकारों के योगदान को सराहा और वर्तमान समय में संगीत और गीतों में संस्कृति और भावनात्मक गहराई की कमी पर चिंता व्यक्त की। तरुण मिश्र ने मनोज मुंतशिर से बातचीत में कहा कि आजकल फिल्मी गीतों में वह भावनात्मक गहराई नहीं रहती जो पहले हुआ करती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुराने गाने सीधे लोगों के जीवन और दिल से जुड़ जाते थे, जबकि वर्तमान में गानों के माध्यम से दर्शकों के जीवन और संवेदनाओं से जुड़ाव कम होता जा रहा है। उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुंरधर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इस फिल्म में गीतकार का महत्व कम होता जा रहा है और उसमें उनका कोई गीत शामिल नहीं है।

इस दौरान तरुण मिश्र ने मनोज मुंतशिर की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसे गीतकार, जो सनातन संस्कृति, भारतीय सभ्यता और पारंपरिक मूल्यों को अपने गीतों में जीवित रखते हैं, उन्हें बधाई का पात्र होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से ‘तेरी मिट्टी’ और ‘जय सिया राम’ जैसे गीतों का उदाहरण दिया, जिनके माध्यम से लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ते हैं और उन्हें समझने का प्रयास करते हैं।

इसके अलावा तरुण मिश्र ने पद्म भूषण उदित नारायण झा को उनके जन्मदिन की बधाई दी और उनके संगीत और योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे महान कलाकार न केवल भारतीय संगीत के गौरव हैं, बल्कि देशवासियों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का काम भी कर रहे हैं।

तरुण मिश्र ने इस अवसर पर यह भी कहा कि वर्तमान दौर में जहां फिल्म और संगीत उद्योग तेजी से बदल रहा है, ऐसे में कलाकारों और गीतकारों का योगदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जो भावनाओं, संस्कार और राष्ट्रीय संस्कृति को गानों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाते हैं। इस मुलाकात में कलाकारों और जनसेवक के बीच गहन चर्चा हुई और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया गया। तरुण मिश्र का मानना है कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और भावनाओं का जीवंत माध्यम भी है।