सड़क सिर्फ रास्ता नहीं, जीवन रेखा है, जनसेवक तरुण मिश्र की आवाज से जागी सरकार

• मधुबनी को मिलेगा बहुप्रतीक्षित सड़क दोहरीकरण का तोहफा
• बिहार के ग्रामीण विकास की रफ्तार अब नहीं होगी बाधित, पथ निर्माण मंत्री नितिन नबीन ने निर्देश
• ठेकेदारों की मनमानी पर लगेगा ब्रेक, होगी गुणवत्ता की सख्त निगरानी
• जनसेवक ने की पथ निर्माण मंत्री नितिन नबीन सिन्हा से मुलाकात

उदय भूमि संवाददाता
पटना। बात जनता के हक और देहात की दुर्दशा की हो, तब जनसेवक तरुण मिश्र सिर्फ सवाल नहीं उठाते वे समाधान की दिशा में सरकार को भी रास्ता दिखाते हैं। शुक्रवार को पटना स्थित बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग कार्यालय में मंत्री नितिन नबीन सिन्हा से हुई एक उच्चस्तरीय मुलाकात इसका ताजा उदाहरण है। बिहार के मधुबनी जिले के दूर-दराज देहात में रहने वाले लोगों की वर्षों पुरानी माँग अब पूरी होने जा रही है। यह संभव हुआ है जनसेवक तरुण मिश्र की निर्भीक पहल से, जिन्होंने शुक्रवार को राजधानी पटना स्थित पथ निर्माण मंत्री नितिन नबीन सिन्हा से मुलाकात कर घोघरडीहा-हटनी संपर्क मार्ग के दोहरीकरण का मुद्दा उठाया और मंत्री ने तुरंत सकारात्मक आश्वासन दिया। इस मुलाकात में तरुण मिश्र ने खुलकर कहा कि सरकार की नीयत में कोई कमी नहीं है, लेकिन ज़मीनी अमल में अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी पूरे विकास चक्र को पंगु बना देती है।

सड़कें बनती हैं, लेकिन टिकती नहीं। आम लोग हादसों का शिकार होते हैं और करोड़ों का बजट कुछ महीनों में मलबा बनकर बिखर जाता है। उन्होंने मंत्री के समक्ष न केवल समस्या रखी, बल्कि जवाबदेही आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि जो सड़क 10 साल तक टिकनी चाहिए, वो 6 महीने में टूट जाती है, इसका मतलब है कि न जांच हो रही है, न निर्माण में गुणवत्ता है। पथ निर्माण मंत्री नितिन नबीन सिन्हा ने तरुण मिश्र की चिंता को पूरी गंभीरता से लेते हुए आश्वस्त किया कि घोघरडीहा-हटनी मार्ग के दोहरीकरण के प्रस्ताव पर विभाग शीघ्र निर्णय लेगा और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास का पैसा जनता का है। अब हर टेंडर, हर ईंट और हर इंच पर जवाबदेही तय होगी। अधिकारी हों या ठेकेदार किसी को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे प्रयासों में तरुण मिश्र जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सराहनीय और प्रेरणादायक है।

देहात के लिए गूंज बनी तरुण मिश्र की आवाज
तरुण मिश्र, जो देश और विदेश में जनसेवा और सामाजिक जागरूकता के लिए जाने जाते हैं, लगातार सर्वसमाज के अधिकारों के लिए नीतिगत स्तर पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका मानना है कि अगर ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाना है, तो सड़कें सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की रेखा बननी चाहिए। उनकी यह पहल न सिर्फ एक संपर्क मार्ग के पुनर्निर्माण तक सीमित है, बल्कि यह उन करोड़ों ग्रामीणों की आवाज़ है, जो आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।