टैक्स बढ़ोत्तरी को लेकर फैलाई जा रही हैं अफवाहें, 300 प्रतिशत की बात पूरी तरह भ्रामक और निराधार

-प्रचारित भ्रम से दूर रहें करदाता, टैक्स में नहीं हुई अनावश्यक बढ़ोतरी
-नियमानुसार हुआ सम्पत्तिकर निर्धारण, जनता को राहत देना नगर निगम की प्राथमिकता

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद नगर निगम के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है। अब हाउस टैक्स बढोत्तरी को लेकर कई मनगंढ़त बातें फैलाई जा रही है। हाउस टैक्स को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए नगर निगम ने स्थिति को स्पष्ट किया है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने मंगलवार को बताया कि सम्पत्तिकर में किसी प्रकार की मनमानी या 300 प्रतिशत वृद्धि नहीं की गई है। दरअसल, नियमानुसार वर्ष 2022 में दरों का पुनर्निर्धारण किया गया था, जिसकी सार्वजनिक सूचना दो प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशन कर आपत्तियाँ आमंत्रित की गई थीं। उन्होंने कहा कि प्राप्त 318 आपत्तियों पर सुनवाई के बाद समिति द्वारा नियमानुसार निस्तारण कर संबंधित लोगों को सूचित किया गया।

उन्होंने बताया कि कुछ लोग भ्रामक तरीके से यह प्रचारित कर रहे हैं कि संपत्तिकर में भारी वृद्धि कर दी गई है, जबकि सच्चाई यह है कि टैक्स में वृद्धि संपत्ति के स्वरूप या उपयोग में बदलाव के कारण हुई है, जैसे कि आवासीय से व्यावसायिक उपयोग या क्षेत्रफल में वृद्धि। डॉ. सिन्हा ने बताया कि नगर आयुक्त के निर्देशानुसार मुख्यालय स्तर व सभी जोनल कार्यालयों पर टीम गठित की गई है, जो किसी भी आपत्ति को सुनकर गुणवत्तापूर्ण समाधान दे रही है। किसी भी संपत्ति करदाता को यदि कोई आपत्ति है, तो वे किसी भी कार्यदिवस में अपने जोनल कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वर्ष 2001 से लेकर अब तक हर दो साल में 10 प्रतिशत की स्वीकृत वृद्धि लागू की जाती, तो वर्तमान टैक्स दरें कहीं अधिक होतीं, लेकिन नगर निगम ने जनता को राहत देने के लिए दरें संतुलित रखी हैं। डॉ. सिन्हा ने अपील की कि जनता किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और किसी भी शंका या समस्या के लिए सीधे नगर निगम से संपर्क करें। नगर निगम का उद्देश्य सिर्फ राजस्व संग्रह नहीं बल्कि जनता पर टैक्स का अनावश्यक बोझ न पड़े, यह सुनिश्चित करना है।