-राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे मजबूत नाम, तरुण मिश्र ने बताया ‘संघ का सच्चा सिपाही’
-तरुण मिश्र ने की दिल्ली में संजय विनायक जोशी से मुलाकात, बताया भाजपा की रीढ़
-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कार्यकर्ताओं में संजय जोशी के लिए जबरदस्त समर्थन
-गुजरात से उत्तर प्रदेश तक, जोशी का संगठनात्मक कौशल रहा बेमिसाल
उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। देश की राजधानी में इन दिनों भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को लेकर जबरदस्त मंथन चल रहा है। उपराष्ट्रपति पद के अचानक रिक्त होने और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर लंबी अनिश्चितता के बीच, अब पार्टी एक साथ दोनों पदों के लिए फैसला ले सकती है। इस दौड़ में संघ के तपे तपाए प्रचारक और भाजपा के पूर्व संगठन महामंत्री संजय विनायक जोशी सबसे सक्षम व्यक्ति के रुप में उभर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी जोशी को भाजपा की कमान सौंपना चाहता है। इसी राजनीतिक हलचल के बीच सोमवार को जनसेवक तरुण मिश्र ने दिल्ली में संजय जोशी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान तरुण मिश्र ने जोशी के संगठनात्मक अनुभव, उनकी कार्यशैली और जमीनी पकड़ की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि संजय जोशी भाजपा को फिर से मूल विचारधारा और अनुशासन के रास्ते पर ले जाने में सक्षम हैं। वे पार्टी के असली आंतरिक स्तंभ हैं। तरुण मिश्र ने कहा कि संजय जोशी का संघ और भाजपा में योगदान अद्वितीय रहा है। उन्होंने भाजपा को गुजरात जैसे राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में मजबूत नींव दी और संगठन को खड़ा किया। वर्ष 1988 से 1995 तक वे गुजरात भाजपा के सचिव रहे और उस दौरान नरेंद्र मोदी के साथ भी मिलकर काम किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच ऐसा विश्वास और समर्पण खड़ा किया जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है।
नागपुर निवासी संजय जोशी ने संघ के प्रचारक के रूप में सेवा की शुरुआत की और जल्दी ही संगठन में अपनी मेहनत व ईमानदारी के चलते गुजरात भेजे गए। वहाँ पार्टी की कमजोर स्थिति में भी उन्होंने संगठन को जिस कुशलता से मजबूत किया, वह उनके नेतृत्व की मिसाल है। गुजरात भाजपा को संजीवनी देने वाले जोशी को आज भी ‘संगठन का मास्टरमाइंड’ कहा जाता है। तरुण मिश्र ने कहा कि संजय जोशी ने राजनीति में आने से पहले मैकेनिकल इंजीनियरिंग पढ़ाई और पढ़ाई भी थी, लेकिन राष्ट्रसेवा की भावना उन्हें संघ में खींच लाई। वे एक संयमी, कर्मठ और दूरदृष्टा नेता हैं, जो कभी प्रचार की दौड़ में नहीं पड़े, लेकिन कार्यकर्ताओं में आज भी उनके प्रति गहरा सम्मान है। तरुण मिश्र ने दो टूक कहा कि अगर भाजपा को फिर से आंतरिक रूप से मजबूत करना है, तो संजय जोशी से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। वह न केवल भाजपा के पुराने मूल्यों के प्रतीक हैं, बल्कि संघ के एकमात्र ऐसे चेहरे हैं जिनमें सादगी, अनुशासन और कार्यकर्ता सम्मान तीनों समाहित हैं। भाजपा के आगामी भविष्य की रणनीति में अगर संजय जोशी को केंद्रीय नेतृत्व में लाया गया, तो यह न केवल पार्टी को एक मजबूत दिशा देगा, बल्कि संघ और भाजपा के रिश्तों को भी एक नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में भी दिखाई संगठन की ताकत
वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जब जोशी को भाजपा की जिम्मेदारी दी गई, तब भी उन्होंने अपने पुराने तेवरों के साथ संगठन को सक्रिय किया। जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद, बूथ स्तर तक की पकड़ और संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता देकर उन्होंने भाजपा को मजबूत विकल्प के रूप में खड़ा किया।
भाजपा अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा
भाजपा के अंदरखाने में इस समय यह चर्चा जोरों पर है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर किसी ऐसे अनुभवी, बेदाग और संघ से जुड़े चेहरे की जरूरत है जो पार्टी को अनुशासन और विचारधारा की पटरी पर दोबारा ला सके। संजय जोशी इस पद के लिए न सिर्फ वरिष्ठता, बल्कि संगठनात्मक क्षमता, संघ के विश्वास और कार्यकर्ताओं के सम्मान इन सभी कसौटियों पर खरे उतरते हैं।

















