पीओएस मशीन पर स्कैनिंग के बाद ही बेचे शराब नहीं तो होगी जेल: संजय कुमार प्रथम

-लाइसेंसी दुकानों पर पीओएस मशीन के प्रयोग में गाजियाबाद प्रदेश में नंबर वन

उदय भूमि
गाजियाबाद। जिले में अवैध शराब के कारोबार पर अपना शिकंजा कसने के बाद आबकारी अधिकारी ने शराब विक्रेताओं पर भी अपना शिकंजा कसना शुरु कर दिया है। शराब की दुकानों पर ओवर रेटिंग का खेल अब नहीं चलेगा। इतना ही नहीं अंग्रेजी हो या फिर देशी शराब। नकली शराब की बिक्री पर भी नकेल लग जाएगी। आबकारी की दुकानों पर पीओएस (प्वाइंट आफ सेल) मशीन के जरिए शराब की बिक्री की जाएगी। उपभोक्ताओं के एक बोतल शराब की खरीद पर उस बोतल पर बार कोड स्कैनर होगा, जिसे दुकानदार पीओएस मशीन से स्कैन करेगा। स्कैन के बाद प्रिंटर से एक बिल निकलेगा। इस बिल में शराब के निर्माण स्थल, सरकारी गोदाम से आवंटन का विवरण, फुटकर विक्रेता आदि की जानकारी होगी। जिले में जीरो टॉलरेंस नीति पर आबकारी विभाग काम कर रहा है। गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में गाजियाबाद एक ऐसा जनपद है, जहां सबसे अधिक पीओएस मशीन का इस्तेमाल हो रहा है। देखा जाए तो उत्तर प्रदेश जिले में गाजियाबाद नंबर एक अपना स्थान बनाए हुए है। देखा जाए तो यह सब गाजियाबाद जिले में आबकारी अधिकारी की सख्ती का असर है।

अवैध और नकली शराब पर रोक लगाने के लिए जिस उद्देश्य से शासन की ओर से प्रदेश की सभी लाइसेंसी दुकानों पर पीओएस मशीन की व्यवस्था की गई थी, इसका पालन कराने के लिए आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम पूरी तरह से कटिबंध दिखाई दे रहे है। त्योहारी सीजन में बढ़ती शराब की खपत को देखते हुए एक तरफ बाहरी राज्यों से होने वाली शराब तस्करी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए आबकारी अधिकारी की टीम बिना रुके और बिना थके दिन रात अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है। साथ ही शराब की दुकानों का भी लगातार निरीक्षण कर स्टॉक रजिस्टर चेक किया जा रहा है। शराब विक्रेताओं की मनमानी पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग गुप्त टेस्ट परचेजिंग तो करा ही रहा है, साथ ही दुकानों से शराब खरीदने वालों से भी विक्रेता के व्यवहार और शराब पर अंकित मूल्यों से अधिक वसूली तो नहीं हो रही है, इसकी भी जांच की जा रही है। आबकारी अधिकारी के सख्त निर्देश है कि आबकारी विभाग की छवि धूमिल करने वालों को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा। इसमें भले ही लाइसेंसी हो या फिर कोई कर्मचारी ही क्यों न हो। शराब विक्रेताओं को एक बोतल हो या फिर हजार बोतल बिना पीओएस मशीन से स्कैन के नहीं बेचा जाएगा।

नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं को की जगह जेल होगी। जिले में इन दिनों शराब विक्रेता और अवैध शराब के कारोबार में लिप्त तस्करों में जिला आबकारी अधिकारी का खौफ साफ दिखाई दे रहा है। क्योंकि जिले में प्रतिदिन आबकारी अधिकारी की गाड़ी भ्रमणशील है। कब किस दुकानों का औचक निरीक्षण करने पहुंच जाए, इस बात का पता क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक को भी पता नहीं होता है। दिवाली के त्योहार में बढ़ती शराब की खपत के बीच में जरुरी नहीं है कि शराब माफिया बाहरी राज्यों में ही शराब बेचें, कभी-कभी अनुज्ञापियों को भी लालच देकर अपने धंधे में शामिल करने का प्रयास करते है। लेकिन गाजियाबाद में अभी तक इस तरह की कोई घटना घटित नहीं हुई है।

जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम का कहना है कि दिवाली त्योहार को लेकर जिलें में अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग की टीमें लगातार चेकिंग एवं दबिश दे रही है। साथ ही लाईसेंसी शराब की दुकानों का भी लगातार औचक निरीक्षण किया जा रहा है। दुकानों के बाहर मौजूद ग्राहकों से भी शराब विक्रेताओं के उनके प्रति व्यवहार और ओवर रेटिंग की जानकारी ली जा रही है। जिले में सभी दुकानों पर पीओएस मशीन स्कैन के बाद ही शराब बिक्री की जा रही है। पीओएस मशीन की व्यवस्था शासन की ओर से जिले में पहले ही कर दी गई थी, मगर इसका अभी तक शत-प्रतिशत पालन नहीं किया जा रहा था। मगर अब सभी दुकानों पर पीओएस मशीन से स्कैन के बाद भी शराब की बिक्री की जा रही है। इसके लिए आबकारी निरीक्षकों की टीम भी खुद लगातार निरीक्षण कर रही है। आधुनिक जमाने में पीओएस मशीन का इस्तेमाल करने से शराब विक्रेता ओवर रेटिंग के मामले पर रोक लगी है और साथ मिलवाटी और नकली शराब के कारोबार पर भी पूरी तरह से रोक लग गई है।

लाइसेंसी दुकानों पर आने वाला स्टॉक अब वहीं लाईसेंसी बेच सकेगा। पहले की तरह नहीं कि अपने माल को आप दुसरी दुकान से बेच कर उसे खपा सकें। पीओएस मशीन के इस्तेमाल से अनुज्ञापी स्टॉक के साथ छेड़छाड़ भी नहीं कर पा रहे है। सभी अनुज्ञापियों को सख्त निर्देश गए है कि बिना पीओएस मशीन स्कैन के बाद शराब की एक भी बोतल को न बेचा जाए, अगर किसी भी दुकानों पर पीओएस मशीन का इस्तेमाल होते हुए नहीं पाया गया तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश जिले में गाजियाबाद जिला पीओएस मशीन से शराब बिक्री के मामले में नंबर वन के स्थान पर है। गाजियाबाद दिल्ली की सीमा से सटा होने के कारण सबसे संवेदनशील क्षेत्र है। जहां चुनाव हो या फिर त्योहार सबसे अधिक शराब तस्करी की आशंका रहती है। मगर अब गाजियाबाद की स्थिति सुधर रही है। गाजियाबाद में शराब तस्करों का धंधा समाप्त करने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम किया जा रहा है। जिसका पालन कराने के लिए सभी टीमें प्रयासरत है।

हिंडन खादर में अवैध शराब धंधे हुआ मंदा
कच्ची शराब के नाम से बदनाम हिंडन खादर क्षेत्र की हालत अब सुधर रही है। नहीं तो कच्ची शराब के निर्माण से अवैध शराब के धंधे मेंं लिप्त तस्कर लाखों रुपये कमाते थे। वहीं आज शराब तस्करों की स्थिति यह है कि कमाई तो दूर सिर्फ उन्हें इस धंधे में नुकसान उठाना पड़ रहा है। चुनाव और त्योहार आने से एक महीने पहले ही हिंडन खादर क्षेत्र में कच्ची शराब के निर्माण का धंधा जोरों पर शुरु हो जाता है। मगर आज वहीं धंधा शराब तस्करों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। कच्ची शराब के धंधे को जड़ से उखाड़ कर फेंकने के लिए आबकारी अधिकारी की टीम ने जिस तरह से शराब तस्करों की जड़ों पर प्रहार किया है।

जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम ने बताया बुधवार को मुखबिर की सूचना पर आबकारी निरीक्षक अनुज वर्मा की टीम द्वारा हिंडन खादर क्षेत्र थाना टीला मोड़ के अंतर्गत जावली एवं थाना मुरादनगर के अंतर्गत स्थित ग्राम मथुरापुर, शमशेरपुर, रेवडा रेवड़ी स्थित संदिग्ध स्थानों पर दबिश दी गई। मगर दबिश के दौरान काफी खोजबीन के बाद कोई भी अवैध शराब बरामद नहीं हुई। आसपास के लोगों से भी अवैध शराब के बारे में पूछताछ करते हुए उनसे आबकारी विभाग की कार्रवाई में सहयोग की अपील की गई। उन्होंने बताया अवैध शराब के धंधे को रोकने के लिए आबकारी विभाग की टीमें लगातार कार्रवाई और दबिश दे रही है। साथ ही आसपास के लोगों को अवैध शराब के खिलाफ जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है। जिसके लिए टीमें पम्पलेट, पोस्टर और सांउड आदि माध्यमों से जागरूकता अभियान चला रही है।