खेल और पढ़ाई दोनों में ‘गोल्डन बॉय’ बना श्रेयांश यादव, तीन खिताबों से सम्मानित

-गुरुकुल द स्कूल के छात्र ने जीते चार गोल्ड, बना जूनियर ओलंपिक में सबसे अधिक पदक जीतने वाला प्रतिभागी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। प्रतिभा, परिश्रम और निरंतरता इन तीन स्तंभों पर खड़ा है वह नाम जिसने न केवल अपने स्कूल, बल्कि पूरे शहर को गौरवान्वित किया है। हम बात कर रहे हैं गाजियाबाद स्थित गुरुकुल द स्कूल के कक्षा 6 के छात्र श्रेयांश यादव की, जिन्हें शनिवार को आयोजित ‘एप्रिसिएशन डे’ समारोह में एक साथ तीन प्रतिष्ठित खिताबों से नवाजा गया। श्रेयांश को उनके लगातार उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन, खेलों में असाधारण योगदान और निरंतर प्रदर्शनशीलता के लिए ‘स्कॉलर’, ‘कंसिस्टेंट परफॉर्मर’ और ‘स्पोर्ट्स स्टार बॉय’ जैसे खिताबों से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें लगातार तीन वर्षों से मिल रहा है, जो उनके अद्वितीय ट्रैक रिकॉर्ड का प्रमाण है। इस सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक पवन कुमार, सीडीओ अभिनव गोपाल, स्कूल के डायरेक्टर सचिन वत्स और प्रिंसिपल गौरव बेदी मौजूद रहे, जिन्होंने श्रेयांश को ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान कर उनकी सराहना की।

गौरतलब है कि इस वर्ष जनवरी में दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित जूनियर ओलंपिक प्रतियोगिता में श्रेयांश ने चार स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर स्कूल के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। प्रतियोगिता की मुख्य प्रतियोगिताएं 100 मीटर दौड़, रिले रेस, बाधा दौड़ और फुटबॉल में उन्हें स्वर्ण पदक मिला। जबकि रस्साकशी में रजत और बास्केटबॉल में कांस्य पदक हासिल किया। यह श्रेयांश की छठी लगातार जीत थी, जिसने उन्हें गोल्डन रनर की उपाधि दिलाई। स्कूल की मीडिया प्रभारी ओलंपिया ने बताया कि श्रेयांश की खेलों में यात्रा केजी कक्षा से ही स्वर्ण पदक जीतने के साथ शुरू हुई थी और तब से अब तक उन्होंने हर वर्ष अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। वह सिर्फ पढ़ाई में टॉपर नहीं हैं, खेलों में भी उनका दबदबा स्पष्ट है। उनका संतुलन अनुकरणीय है। श्रेयांश के कोच मैक्स वेल ने बताया कि फुटबॉल उनका सबसे पसंदीदा खेल है।

उन्होंने इंडो-नेपाल जूनियर फुटबॉल कप में स्वर्ण पदक, और थाईलैंड के पटाया में आयोजित पटाया-इंडिया फुटबॉल टूर्नामेंट में रजत पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत और स्कूल का नाम रोशन किया है। कोच के मुताबिक, 11 वर्ष की उम्र में ही अंडर-14 टीम के लिए लगातार खेलना, वह भी अटैकर की भूमिका में, श्रेयांश की प्रतिभा, दृढ़ता और समर्पण को दर्शाता है। वे ना सिर्फ खिलाड़ी हैं, बल्कि एक लीडर हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि श्रेयांश का चयन सितंबर में उत्तराखंड में आयोजित होने वाली सीबीएसई क्लस्टर फुटबॉल प्रतियोगिता के लिए अटैकर के रूप में हो चुका है, जो उनकी आगामी उपलब्धियों की एक झलक मात्र है। आज जब अक्सर बच्चों को खेल और पढ़ाई में संतुलन बनाना एक चुनौती लगता है, वहीं श्रेयांश यादव एक प्रेरणादायी उदाहरण हैं कि अगर लगन हो, तो कोई भी क्षेत्र अधूरा नहीं रह जाता। पढ़ाई में अव्वल, खेल में स्वर्णिम और व्यवहार में विनम्र यही श्रेयांश की असली पहचान है। गुरुकुल द स्कूल के डायरेक्टर सचिन वत्स और प्रिंसिपल गौरव बेदी ने कहा कि श्रेयांश जैसे छात्र हमारी शिक्षा प्रणाली की ताकत हैं। वे आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देते हैं कि लक्ष्य, अनुशासन और आत्मविश्वास से हर शिखर को छुआ जा सकता है।