उर्वरकों की बिक्री में सख्ती: टैगिंग, कालाबाजारी और ओवर रेटिंग पर जिला कृषि अधिकारी की दो-टूक चेतावनी

-जिला कृषि अधिकारी अमित कुमार ने उर्वरक विक्रेताओं के साथ की समीक्षा बैठक, सख्त दिशा-निर्देश जारी
-निर्धारित दरों पर, बिना टैगिंग, गुणवत्ता के साथ मिले उर्वरक-कृषकों के हित में सख्त निगरानी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में उर्वरकों की बिक्री, भंडारण और वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और कृषकों के हित में बनाए रखने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला कृषि अधिकारी अमित कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जिले के उर्वरक थोक विक्रेताओं और प्रदायकर्ता कंपनियों को शामिल करते हुए कई निर्देश जारी किए गए, जिनमें टैगिंग, कालाबाजारी, ओवर रेटिंग और स्टॉक भिन्नता पर रोक के लिए विशेष बल दिया गया। बैठक के दौरान जिला कृषि अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि कोई भी उर्वरक विक्रेता किसी भी उर्वरक के साथ जिंक, सल्फर, माइक्रोन्यूट्रिएंट, नैनो जैसे अन्य उत्पादों की टैगिंग नहीं करेगा। यह प्रतिबंध कृषकों को अनावश्यक बोझ और ठगी से बचाने के लिए अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि उर्वरकों की बिक्री केवल निर्धारित दर पर, और उसमें फुटकर डीलर मार्जिन एवं परिवहन पल्लेदारी समाहित कर ही की जाए, जिससे कृषकों को कोई आर्थिक नुकसान न हो। बैठक में निर्देश दिया गया कि प्रत्येक कृषक को उसकी जोत / कृषिभूमि के आधार पर ही संस्तुत मात्रा में गुणवत्तायुक्त उर्वरक दिया जाए। किसी भी स्तर पर उर्वरकों की जमाखोरी या कालाबाजारी न होने पाए, इसके लिए लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही, यह भी अनिवार्य किया गया कि सभी फुटकर विक्रेता पीओएस मशीन के माध्यम से ही बिक्री करें, और उसका रिकॉर्ड अपने बिक्री रजिस्टर में अद्यतन रखें। दुकानों पर प्रतिदिन उर्वरक की उपलब्धता और मूल्य का स्पष्ट उल्लेख रेट/स्टॉक बोर्ड पर किया जाना अनिवार्य किया गया है। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक भौतिक स्टॉक में कोई अंतर न हो। इसके अतिरिक्त, सभी विक्रेताओं को निर्देशित किया गया कि स्टॉक पंजिका, बिक्री पंजिका और बिल बुक को अनिवार्य रूप से अद्यतन रखें।

क्षमता से अधिक आपूर्ति पर रोक, पोर्टल पर हो समय से प्रमाणन
बैठक में विशेष जोर दिया गया कि किसी भी फुटकर विक्रेता को उनकी निर्धारित क्षमता से अधिक उर्वरक आपूर्ति न की जाए। साथ ही, पोर्टल पर समय से आपूर्ति का प्रमाण (एक्नॉलेजमेंट) दर्ज किया जाए, ताकि किसी भी जांच के समय पारदर्शिता बनी रहे।

केवल अधिसूचित उत्पादों की ही हो बिक्री, उल्लंघन पर होगी कठोर कार्रवाई
जिला कृषि अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि विक्रेता केवल उन्हीं उत्पादों का भंडारण और विक्रय करें जो उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियंत्रण आदेश 1985 के अंतर्गत वर्णित हों या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित हों। उन्होंने चेतावनी दी कि उपरोक्त नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर कठोर कार्यवाही की जाएगी, जो उक्त नियंत्रण आदेश के तहत दंडनीय होगी।

कृषकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है कृषि विभाग: अमित कुमार
बैठक के समापन पर अमित कुमार ने कहा कि कृषि विभाग का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं, बल्कि कृषकों को उनका अधिकार दिलाना और ठगी से बचाना है। उन्होंने विक्रेताओं से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि यदि सभी मिलकर काम करें तो गाजियाबाद को एक आदर्श कृषि जनपद बनाया जा सकता है।