लखनऊ में महुआ शराब माफियाओं की धड़कन थमी! आबकारी विभाग के अभियान ने गाँव-गाँव किया सफाया

लखनऊ में आबकारी विभाग की सख़्त कार्यवाही से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप

जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की रणनीति बनी माफियाओं की दुश्मन, जनता की उम्मीद

लखनऊ की धरती पर खत्म हो रहा महुआ शराब का नशा, आबकारी टीम का बड़ा अभियान

महुआ शराब के ज़हर से समाज की जंग, करुणेन्द्र सिंह बने नेतृत्व का चेहरा

गाँव-गाँव फैली महुआ शराब की फैक्ट्रियों पर आबकारी विभाग का डंडा

त्योहार से पहले महुआ शराब माफिया की साजिश नाकाम, आबकारी विभाग की बड़ी जीत

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। महुआ एक पारंपरिक वनस्पति फल सदियों से ग्रामीण जीवन का हिस्सा रहा है। परंतु जहाँ संस्कृति और परंपरा का स्थान है, वहीं कुछ काले दिमागों ने महुआ से बनने वाली कच्ची शराब को एक घातक अवैध उद्योग में तब्दील कर दिया है। महुआ अवैध शराब अब केवल छिपे-छिपे बनने वाली स्थानीय ‘हथकरघा’ नहीं रही; यह युवा पीढ़ी, ग्रामीण स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाला गंभीर समस्या बन चुकी है। मगर राजधानी लखनऊ एक बार फिर अवैध शराब के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का गवाह बन रही है। त्योहारों के मौसम से पहले जब तस्करों ने कच्ची महुआ शराब का जाल बुनना शुरू किया, तब जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने अपनी कड़क रणनीति और दूरदर्शी सोच से ऐसा शिकंजा कसा कि पूरे देहात क्षेत्र में माफियाओं की नींद उड़ गई है।

त्योहारों के करीब आते ही अवैध शराब का कारोबार हमेशा परवान चढ़ता है। देहात के इलाकों में तस्कर नदी किनारे, खेतों, बागों और यहां तक कि घरों तक में कच्ची शराब का उत्पादन कर स्टॉक तैयार करने में जुट जाते हैं। लेकिन इस बार आबकारी विभाग ने पहले से ही अपनी रणनीति तय कर ली थी। करुणेन्द्र सिंह की सूझबूझ और कड़े निर्देशों ने तस्करों के मंसूबों को जड़ से हिला दिया। जिला आबकारी अधिकारी ने अपनी टीम को केवल दिन में ही नहीं, बल्कि रात में भी सक्रिय गश्त के लिए तैयार किया है। यही नहीं, उनका सबसे बड़ा हथियार बना विभाग का मुखबिर तंत्र। हर छोटे-बड़े सुराग पर तुरंत कार्रवाई कर माफियाओं को यह संदेश दिया जा रहा है कि चाहे वे कहीं भी छिपें, विभाग की पकड़ से नहीं बच सकते।

गुरुवार को आबकारी निरीक्षक अभिषेक सिंह और अखिलेश कुमार की संयुक्त टीम ने थाना माल क्षेत्र के ग्राम रामनगर और नारू खेड़ा में दबिश दी। यहाँ खेतों, बगीचों और तालाब किनारे अवैध शराब के अड्डों की सूचना थी। छापेमारी में करीब 20 लीटर अवैध कच्ची शराब और 250 किलोग्राम लहन बरामद किया गया। मौके पर ही लहन को नष्ट कर दिया गया। यह कार्रवाई सिर्फ ज़ब्ती तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह तस्करों को कड़ा संदेश भी दे गई कि आबकारी विभाग अब ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे एक ओर कानून तोडऩे वालों के खिलाफ बेहद सख़्त रवैया अपनाते हैं, वहीं दूसरी ओर समाज को जागरूक करने में भी पीछे नहीं रहते। उनका मानना है कि किसी भी अवैध कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता का सहयोग भी अनिवार्य है। उन्होंने तस्करों को चेतावनी दी है कि यह उनका सुधरने का आखऱिी मौका है। अगर अब भी उन्होंने अवैध धंधा छोड़ा नहीं तो सीधे जेल भेजा जाएगा।

जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने कहा कि महुआ से बनने वाली अवैध कच्ची शराब न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि यह समाज और आने वाली पीढिय़ों के भविष्य के लिए भी बेहद खतरनाक है। त्योहारों से पहले तस्कर सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन हमारी टीम पहले से तैयार है और दिन-रात कार्रवाई कर रही है। अब किसी भी स्तर पर इस कारोबार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल दबिश देना नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है। हमने तस्करों को सुधरने का मौका दिया है, लेकिन अगर यह मौका गँवाया गया तो उन्हें सीधा जेल भेजा जाएगा। किसी को भी कानून से ऊपर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। अवैध शराब के कारोबारियों की पूरी कुंडली खंगाली जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी।

खंगाली जा रही तस्करों की कुंडली
आबकारी विभाग अब केवल मौके पर दबिश ही नहीं दे रहा, बल्कि तस्करों की पूरी पृष्ठभूमि भी खंगाली जा रही है। पिछले कई वर्षों से इस धंधे में सक्रिय लोगों की कुंडली बन रही है। इस सूची में शामिल नामों पर लगातार नज़र रखी जा रही है और जल्द ही इनके खिलाफ बड़ी कार्यवाही तय है। लखनऊ में आबकारी विभाग का यह अभियान केवल कार्रवाई भर नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतना अभियान भी है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की नेतृत्व क्षमता, उनकी सख़्ती और दूरदर्शी सोच ने माफियाओं में भय और जनता में विश्वास पैदा किया है। आज जब अवैध शराब के कारोबार से समाज का भविष्य खतरे में था, तब करुणेन्द्र सिंह और उनकी टीम ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादे और जनता के सहयोग से इस जहर को मिट्टी में मिलाना नामुमकिन नहीं। लखनऊ की धरती अब इस निर्णायक जंग की गवाह बन रही है। माफिया चाहे कितनी भी चालें चलें, आबकारी विभाग की चौकसी और जनता का साथ उन्हें हर बार मात देगा। करुणेन्द्र सिंह का यह अभियान आने वाली पीढिय़ों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज की नींव रख रहा है।

जनता से अपील- सहयोग ही असली ताकत
करुणेन्द्र सिंह ने कहा कि किसी भी क्षेत्र को अवैध शराब से मुक्त कराना केवल विभाग का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। जब तक जनता खुद आगे नहीं आएगी, तब तक इस जहर को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। हमें अपनी पीढ़ी को इस नशे से बचाकर उनका भविष्य संवारना है। उनकी इस अपील ने जनता को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में अब लोग खुद आगे बढ़कर विभाग को सूचना दे रहे हैं और इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं।

टीमवर्क का असर- निपुण निरीक्षक बने हथियार
करुणेन्द्र सिंह ने अपनी टीम को पूरी आज़ादी दी है। निरीक्षक अभिषेक सिंह और अखिलेश कुमार जैसे निपुण अधिकारी उनकी रणनीति को जमीनी स्तर पर उतार रहे हैं। यह टीमवर्क ही है कि लखनऊ में अवैध शराब के कारोबारियों की कमर टूटती जा रही है। आबकारी विभाग का लक्ष्य केवल वर्तमान अभियान तक सीमित नहीं है। आने वाले दिनों में और भी बड़े स्तर पर दबिश और अभियान की योजना है। गाँव-गाँव, खेत-खेत और नदी किनारों तक पहुँचकर हर उस जगह पर कार्यवाही की जाएगी जहाँ अवैध शराब की गंध तक मिले।