10 से 50 पीआर शॉप तक का सफर… ‘सुबोध मॉडल’ ने गौतमबुद्ध नगर को बना दिया आबकारी राजस्व का नया सरताज

  • चार्ज संभालते ही अवैध कारोबार पर कसा शिकंजा, राजस्व बढ़ाने का तैयार किया मास्टर प्लान
  • पीआर शॉप विस्तार की नीति बनी गेम चेंजर, सरकार को हर वर्ष मिल रहा लाखों का अतिरिक्त राजस्व
  • टीम वर्क, पारदर्शिता और सख्त मॉनिटरिंग से बदल गई आबकारी विभाग की कार्यशैली
  • हर वैध लाइसेंस सरकार की आय बढ़ाएगा, अवैध कारोबार के लिए जिले में कोई जगह नहीं: सुबोध श्रीवास्तव

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश का सबसे विकसित और औद्योगिक जनपद गौतमबुद्ध नगर आज केवल निवेश और विकास का ही नहीं, बल्कि आबकारी राजस्व के मामले में भी सरकार के लिए ‘सोने की चिडिय़ाÓ साबित हो रहा है। जिले को प्रदेश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले जनपदों में बनाए रखने के लिए जहां प्राधिकरण और जिला प्रशासन लगातार काम कर रहे हैं, वहीं आबकारी विभाग भी अपनी नई कार्यशैली और दूरदर्शी रणनीति के दम पर राजस्व वृद्धि का नया अध्याय लिख रहा है। 23 जून 2023 को जिला आबकारी अधिकारी के रूप में कार्यभार संभालने वाले सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने पदभार ग्रहण करते ही विभागीय व्यवस्था का गहन अध्ययन किया। उन्होंने केवल अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने को प्राथमिकता नहीं दी, बल्कि यह भी तलाशा कि वैध माध्यमों से सरकार की आय किस प्रकार बढ़ाई जा सकती है। इसी सोच ने जिले में प्रीमियम रिटेल वेन्ड (पीआरवी) शॉप के विस्तार की नई रणनीति को जन्म दिया, जिसका परिणाम आज साफ दिखाई दे रहा है।

कार्यभार संभालने के बाद जिला आबकारी अधिकारी ने अपनी पूरी टीम के साथ जिले का विस्तृत सर्वे कराया। किन क्षेत्रों में वैध लाइसेंस की संभावनाएं हैं, कहां नई प्रीमियम रिटेल वेन्ड (पीआरवी) शॉप संचालित हो सकती हैं और किन स्थानों पर अवैध गतिविधियों की आशंका अधिक है, इसका बारीकी से अध्ययन किया गया, क्योंकि यह पीआरवी शॉप सिर्फ आधुनिक मॉल्स में ही खुलती है। इसके बाद विभाग ने एक ओर अवैध शराब के निर्माण, तस्करी और बिक्री के खिलाफ सघन अभियान चलाया तो दूसरी ओर वैध लाइसेंसिंग व्यवस्था को प्रोत्साहित करते हुए नए आवेदन और अनुमतियों की प्रक्रिया को गति दी। परिणामस्वरूप जिले में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और राजस्व उन्मुख बन गई। कुल मिलाकर, जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शी सोच और टीम आधारित कार्यशैली ने गौतमबुद्ध नगर के आबकारी विभाग को नई पहचान दी है। अवैध कारोबार पर सख्ती और वैध लाइसेंसिंग को बढ़ावा देने की उनकी नीति न केवल सरकार के राजस्व को नई ऊंचाई दे रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि बेहतर प्रशासनिक रणनीति से विकास और राजस्व वृद्धि साथ-साथ संभव है।

10 से सीधे 50 प्रीमियम रिटेल वेन्ड (पीआरवी) शॉप तक पहुंचा जनपद, सरकार को मिलने लगी अतिरिक्त आय
कुछ वर्ष पहले तक गौतमबुद्ध नगर में केवल 12 प्रीमियम रिटेल वेन्ड (पीआरवी) शॉप संचालित थीं, जिनमें से दो बंद हो चुकी थीं। ऐसे में विभाग के सामने अतिरिक्त राजस्व बढ़ाने की बड़ी चुनौती थी। पहले विभाग को जहां जिले से करीब 2 करोड़ 50 लाख रुपये का ही राजस्व मिलता था। मगर जिला आबकारी अधिकारी की रणनीति और लगातार किए गए प्रयासों का ही परिणाम है कि आज जनपद में 50 प्रीमियम रिटेल वेन्ड (पीआरवी) शॉप संचालित हो रही हैं। इनमें 48 अल्कोहल प्रीमियम रिटेल वेन्ड (पीआरवी) शॉप और 2 लो-अल्कोहल प्रीमियम रिटेल वेन्ड शॉप शामिल हैं। इन पीआर शॉप के संचालन से सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 12 करोड़ 50 लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है। विभाग का मानना है कि तेजी से विकसित हो रहे गौतमबुद्ध नगर में आने वाले समय में पीआर शॉप की संख्या और बढ़ेगी, जिससे सरकारी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

टीम को बनाया ताकत, आधुनिक कार्यशैली से बढ़ी विभाग की साख
जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया। नियमित समीक्षा बैठकें, क्षेत्रवार जिम्मेदारी, प्रभावी मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने जैसी व्यवस्थाओं ने पूरी टीम को परिणाम देने के लिए प्रेरित किया। अवैध शराब के खिलाफ लगातार छापेमारी, सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और लाइसेंसधारकों के साथ नियमित संवाद ने विभाग की कार्यप्रणाली को नई दिशा दी है। यही कारण है कि जिले में आबकारी विभाग केवल कार्रवाई करने वाला विभाग नहीं, बल्कि राजस्व बढ़ाने वाला एक प्रभावी प्रशासनिक तंत्र बनकर उभरा है।

सात इंस्पेक्टरों की टीम, राजस्व और कार्रवाई दोनों में अव्वल
जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में जिले की सात सदस्यीय इंस्पेक्टर टीम लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है। टीम में आशीष पाण्डेय, सचिन त्रिपाठी, अखिलेश बिहारी वर्मा, अभिनव शाही, नामवर सिंह, दीनेन्द्र सिंह और संजय चन्द्र शामिल हैं। यह टीम अवैध शराब के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने की रणनीति को भी सफलतापूर्वक लागू कर रही है। बेहतर समन्वय, सतत निगरानी और परिणाम आधारित कार्यशैली के दम पर आबकारी विभाग गौतमबुद्ध नगर में राजस्व वृद्धि का नया रिकॉर्ड स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

भविष्य की तैयारी भी पूरी, बढ़ते शहर के साथ बढ़ेगा राजस्व
गौतमबुद्ध नगर का लगातार हो रहा औद्योगिक और व्यावसायिक विस्तार आबकारी विभाग के लिए भी नए अवसर लेकर आ रहा है। नए होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल और मनोरंजन केंद्रों के बढऩे से वैध लाइसेंसों की संभावनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। विभाग इन संभावनाओं का लाभ उठाते हुए आने वाले वर्षों में अतिरिक्त राजस्व के नए स्रोत विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। जिला आबकारी अधिकारी का मानना है कि यदि विकास के साथ-साथ वैध लाइसेंसिंग व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तो गौतमबुद्ध नगर प्रदेश के आबकारी राजस्व में और बड़ी हिस्सेदारी निभा सकता है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर प्रदेश का सबसे तेजी से विकसित होने वाला जनपद है।

हमारी प्राथमिकता दो बिंदुओं पर है-पहला, अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक और दूसरा, वैध लाइसेंसिंग व्यवस्था के माध्यम से सरकार के राजस्व में निरंतर वृद्धि। हर वैध लाइसेंस सरकार की आय बढ़ाता है और रोजगार के अवसर भी पैदा करता है। उन्होंने कहा ‘हमारी पूरी टीम ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम कर रही है। जिले में जहां भी राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं हैं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। भविष्य में भी पीआर शॉप और अन्य वैध लाइसेंसों के विस्तार की संभावनाओं पर काम जारी रहेगा, ताकि गौतमबुद्ध नगर आबकारी राजस्व के क्षेत्र में प्रदेश का अग्रणी जनपद बना रहे।