कार्यालय में नहीं, मैदान में दिखती है पुलिस की असली नब्ज: धवल जायसवाल

 • जनसेवा में सतर्क, व्यवस्थाओं में सशक्त: डीसीपी सिटी ने पेश की कानून-प्रबंधन की मिसाल

•  श्रावण मास की आस्था हो या जनता की शिकायतें, हर मोर्चे पर दिखी ज़मीनी सक्रियता और जिम्मेदार नेतृत्व

•  धार्मिक आस्था का सम्मान और सुरक्षा का वचन, दुधेश्वरनाथ मंदिर पर भारी पुलिस सतर्कता

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। श्रावण मास का पवित्र पर्व, कांवड़ यात्रा की धार्मिक ऊर्जा और दूधेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ती श्रद्धालु भीड़ इन सभी को समेटने के लिए गाजियाबाद पुलिस प्रशासन पूरी शिद्दत से दिन राज जुटा हुआ है। इसी क्रम में पुलिस उपायुक्त नगर धवल जायसवाल ने दुधेश्वरनाथ मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजामों की गहराई से समीक्षा की। डीसीपी सिटी ने मंदिर के चारों ओर की यातायात व्यवस्था, पार्किंग की सुविधा, महिला सुरक्षा, सीसीटीवी कवरेज, बैरिकेडिंग, तथा आपात निकासी मार्ग तक को स्वयं परखा। उनके साथ सम्बंधित थाना प्रभारियों एवं पुलिस टीमों ने भी निरीक्षण किया। डीसीपी सिटी ने कहा कि श्रद्धालुओं को न केवल सुरक्षा देनी है, बल्कि उन्हें एक सहज, भयमुक्त और व्यवस्थित अनुभव भी देना है। हमारी प्राथमिकता है कि धार्मिक उत्सव में कोई बाधा न आए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि भीड़ नियंत्रण, मेडिकल सहायता, एवं ट्रैफिक डायवर्जन प्लान को अपडेटेड और एक्टिव मोड में रखा जाए।

स्थानीय प्रशासन, नगर निगम एवं मंदिर समिति से भी सामंजस्य बनाए रखने को कहा गया। पुलिस आयुक्त द्वारा जनता से सीधा संवाद अभियान के तहत, डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने सोमवार को अपने कार्यालय में लोगों की समस्याएं सुनीं और उनकी शिकायतों को न केवल गंभीरता से लिया, बल्कि सम्बंधित अधिकारियों को स्पष्टीकरण के साथ समयबद्ध समाधान हेतु निर्देशित किया। एक दर्जन से अधिक नागरिकों ने जमीन विवाद, साइबर ठगी, थाना स्तर की अनदेखी, और ट्रैफिक संबंधी मुद्दों को लेकर आवेदन प्रस्तुत किए। सभी को पावती पत्र के साथ कार्रवाई की जानकारी दी गई। डीसीपी सिटी ने निर्देश दिए कि शिकायत सिर्फ कागज पर नहीं होनी चाहिए, समाधान जमीन पर दिखना चाहिए। यही हमारी कार्यसंस्कृति है उत्तरदायी, तत्पर और पारदर्शी है। श्री जायसवाल की कार्यशैली में सिर्फ ‘आदेश’ नहीं, बल्कि ‘उपस्थिति’ दिखती है। वो लगातार न केवल धार्मिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में पैदल गश्त कर रहे हैं, बल्कि थानों, चौकियों, ट्रैफिक मोर्चों और कंट्रोल रूम्स तक की भी बारीकी से मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

जनसंवाद शिविरों में नियमित भागीदारी, सप्ताह में दो बार शिकायत निस्तारण समीक्षा, कांवड़ रूट पर स्वयं ट्रैफिक निरीक्षण, साइबर अपराधों को लेकर विशेष निर्देश दिए। उनके नेतृत्व में गाजियाबाद पुलिस एक संवेदनशील और सख्त छवि गढ़ रही है जहां आमजन को सहूलियत मिले और असामाजिक तत्वों को डर। धवल जायसवाल न केवल एक प्रशासक, बल्कि एक संवेदनशील नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे हैं। वह अपने व्यवहार, निर्णय और निरीक्षण से यह संदेश दे रहे हैं कि पुलिस व्यवस्था जनता से अलग नहीं, बल्कि उनके साथ है। वहीं नगर क्षेत्रवासियों का कहना है कि डीसीपी साहब की बातों में भरोसा झलकता है और काम में प्रतिबद्धता। वह सिर्फ मीटिंग में नहीं, मैदान में मिलते हैं। धवल जायसवाल जैसे अधिकारियों की कार्यशैली से न केवल पुलिस की साख बढ़ती है, बल्कि आमजन में विश्वास भी मज़बूत होता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा हो या नागरिकों की शिकायत हर स्तर पर एक असरदार, मानवीय और पारदर्शी पुलिसिंग की मिसाल पेश की जा रही है।