विदेश में गूँजी भारतीय संस्कृति की आवाज

  • जनसेवक तरुण मिश्र ने बर्मिंघम में भारतीय उच्च आयुक्त अमन बंसल से की शिष्टाचार भेंट

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली/बर्मिंघम। हिंदू समाज के उत्थान और भारतीय संस्कृति को विदेशों तक फैलाने के उद्देश्य से इंग्लैंड की 12 दिवसीय यात्रा पर गए जनसेवक तरुण मिश्र ने अपनी यात्रा के अंतिम दिन मंगलवार को बर्मिंघम स्थित भारतीय दूतावास में भारतीय उच्च आयुक्त अमन बंसल से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात ने न केवल प्रवासी भारतीयों में नई ऊर्जा भरी, बल्कि भारतीय संस्कृति और समाज सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को भी मजबूती प्रदान की। मुलाकात के दौरान तरुण मिश्र ने प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ही हमारी असली पहचान है। उन्होंने कहा कि चाहे हम भारत में हों या विदेश में, भारतीयता को हर हाल में संजोकर रखना हमारी जिम्मेदारी है। हमारी संस्कृति इतनी समृद्ध और गहरी है कि इसे न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया अपनाना चाहती है। मिश्र ने आगे कहा कि इंग्लैंड में रह रहे भारतीय मूल के प्रवासी अपने कार्य और आचरण से इस संस्कृति को जिंदा रखे हुए हैं।

वे यहां रहते हुए भी भारतीय परंपराओं और मूल्यों को बच्चों तक पहुँचा रहे हैं, यही कारण है कि विदेशों में भी भारत की छवि एक मजबूत सांस्कृतिक शक्ति के रूप में उभर रही है। भारतीय उच्च आयुक्त अमन बंसल ने तरुण मिश्र से हुई मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास न केवल प्रवासियों की समस्याओं के समाधान में तत्पर है, बल्कि उनकी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में भी सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा, विदेशों में रहने वाले भारतीय हमारी ताकत हैं। भारतीय दूतावास हर प्रवासी को यह अनुभव कराने के लिए प्रतिबद्ध है कि वह चाहे कहीं भी हो, भारत से उसका रिश्ता कभी कम नहीं होगा।

अमन बंसल ने इंग्लैंड प्रवासियों के लिए भारतीय दूतावास द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और सहयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार लगातार प्रवासी भारतीयों के साथ संपर्क बनाए रखने और उनकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रयासरत है। भारतीय उच्च आयुक्त अमन बंसल ने कहा कि विदेशों में रह रहे भारतीय केवल प्रवासी नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और परंपरा के असली राजदूत हैं। भारतीय दूतावास का प्रयास है कि हर भारतीय मूल का व्यक्ति जहाँ भी रहे, उसे अपनी मातृभूमि का गर्व और अपनापन हमेशा महसूस हो।

हिंदू समाज के उत्थान में निरंतर सक्रिय
जनसेवक तरुण मिश्र लंबे समय से हिंदू समाज के उत्थान और जनकल्याण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। इससे पहले भी वे कई देशों की यात्राओं पर जाकर भारतीय संस्कृति और समाज सुधार की आवाज को बड़े स्तर पर उठा चुके हैं। उनका जीवन आमजन की समस्याओं को उठाने और उन्हें दूर करने के संकल्प को समर्पित है। यही वजह है कि लोग उन्हें जनता की आवाज मानते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की शिक्षा और विचारधारा आज भी सामाजिक सुधार की सबसे बड़ी धारा है। विदेशों में इसे फैलाना और लोगों को जोडऩा उनका जीवन का लक्ष्य है।

प्रवासियों के साथ जुड़ाव का संकल्प
बर्मिंघम में हुई मुलाकात के दौरान तरुण मिश्र ने यह भरोसा दिलाया कि वे आगे भी भारतीय प्रवासियों से जुड़े रहेंगे और उनकी समस्याओं को भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि विदेश में रहकर भी प्रवासी भारतीयों का दिल भारत के लिए ही धड़कता है। वे हमारी संस्कृति और परंपराओं के असली राजदूत हैं।

संस्कृति की गूँज, दुनिया तक
तरुण मिश्र की इस यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय संस्कृति सिर्फ भारत की सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ चुकी है। भारतीय उच्च आयुक्त अमन बंसल और तरुण मिश्र की मुलाकात ने यह संदेश दिया कि प्रवासी भारतीय और भारत सरकार मिलकर इस सांस्कृतिक धरोहर को और मजबूती देंगे। इस भेंट ने यह भी साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति और हिंदू समाज की विचारधारा आने वाले समय में विदेशों में और अधिक गहराई तक अपनी पहचान बनाएगी। तरुण मिश्र का यह संकल्प और अमन बंसल की प्रतिबद्धता मिलकर भारतीयता को वैश्विक मंच पर और भी ऊँचा उठाएगी।