सरकारी दफ्तरों में दलालों की जगह नहीं, नियम तोड़ने वालों को होगी जेल: रविन्द्र कुमार मॉंदड़

  • अनधिकृत व्यक्तियों और दलालों पर प्रशासन का सख्त रुख, सभी विभागों में निगरानी बढ़ाई
  • जनता से अपील: किसी भी सरकारी कार्य के लिए अवैध धन न दें, संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्ट करें
  • एफआईआर और जेल तक का रास्ता तय, भ्रष्टाचार रोकने और सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी, स्वच्छ और जनहितैषी बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने अनाधिकृत व्यक्तियों और दलालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी कार्यालयों में सक्रिय दलाल न केवल आम जनता को भ्रमित कर रहे हैं, बल्कि अवैध धन की मांग कर सरकारी व्यवस्था और उसकी साख को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ऐसी गतिविधियों पर तत्काल और निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद के कई प्रमुख कार्यालयों जैसे सम्भागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय, विकास भवन, तहसीलें, कलेक्ट्रेट, नगर निगम, चिकित्सा, शिक्षा, अग्निशमन सहित अन्य विभागों में ड्राइविंग लाइसेंस, पेंशन, छात्रवृत्ति, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, शस्त्र लाइसेंस, राशन कार्ड, आबकारी, फूड एंड ड्रग, मनोरंजन, खनन, अग्नि सुरक्षा, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र तथा पीसीपीएनडीटी से जुड़े लाइसेंस जैसे कार्यों के नाम पर अनाधिकृत व्यक्ति और दलाल सक्रिय पाए जा रहे हैं।

ये लोग आवेदकों को शीघ्र कार्य कराने का झूठा आश्वासन देकर अवैध धन की मांग करते हैं, जिससे आमजन में गलत संदेश जाता है और सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगता है। डीएम ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि अपने-अपने कार्यालयों में ऐसे तत्वों पर कड़ी निगरानी रखें और निरोधात्मक कार्रवाई करें। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी सरकारी कार्य के लिए किसी अनाधिकृत व्यक्ति को धन न दें। यदि कोई व्यक्ति या दलाल अवैध मांग करता है या कार्यालय परिसर में संदिग्ध रूप से घूमता पाया जाता है, तो उसकी तत्काल शिकायत संबंधित कार्यालयाध्यक्ष से करें।

जिलाधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति सरकारी कार्य कराने के नाम पर अवैध वसूली करता पाया जाएगा या बिना अधिकार सरकारी कार्यालयों में सक्रिय रहेगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर दर्ज कराते हुए जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का यह कदम सरकारी दफ्तरों की गरिमा बनाए रखने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।