गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के तीन साल: अपराधों में गिरावट, नागरिक सुरक्षा में मजबूती और अपराधियों की 3.33 अरब की संपत्ति जब्त

-तीन साल में गाजियाबाद सुरक्षित, अपराधियों पर अंकुश और पुलिस-जनता का विश्वास मजबूत: जे. रविंद्र गौड़
-जन-केंद्रित पुलिसिंग, बीट प्रणाली और आधुनिक तकनीक ने अपराध नियंत्रण और सुरक्षा में नया मापदंड स्थापित किया

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराध एवं अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की दिशा में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने पिछले तीन वर्षों में अभूतपूर्व कार्य किया है। 26 नवंबर 2022 को स्थापित इस कमिश्नरेट ने नागरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने बताया कि कमिश्नरेट के गठन के बाद गैंगस्टर अधिनियम के तहत कुख्यात और पेशेवर अपराधियों की 3 अरब 33 करोड़ 73 लाख 14,336 रुपये कीमत की संपत्ति जब्त की गई है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, 2023-25 की अवधि में अपराध दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। डकैती में 100 प्रतिशत, लूट में 139 प्रतिशत, चेन स्नैचिंग में 48 प्रतिशत, नकबजनी में 37 प्रतिशत, वाहन चोरी में 17 प्रतिशत और अन्य चोरी के अपराधों में 23 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी सफलता मिली है। बलात्कार में 94 प्रतिशत, शीलभंग में 51 प्रतिशत, अपहरण में 93 प्रतिशत और महिला उत्पीडऩ में 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। कमिश्नरेट ने 24 अप्रैल 2025 से जिले को 2,131 बीट्स में विभाजित किया।

हर बीट में बीट ऑफिसर और बीट एसआई नियुक्त किए गए हैं। इन अधिकारियों का कार्य नागरिकों से नियमित संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान करना है। बीट अधिकारियों के पास पासपोर्ट सत्यापन, किरायेदारी और चरित्र सत्यापन जैसी सेवाओं की जिम्मेदारी भी है। इसके अलावा, स्थानीय अपराधियों पर निगरानी रखने और अपराध नियंत्रण में सहयोग करने का दायित्व भी बीट अधिकारियों को सौंपा गया है। पुलिस ने सीईएमएस पोर्टल शुरू किया है, जिससे कर्मियों की अवकाश स्वीकृति और आवास आवंटन की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हुई है। डिजिटल पहलें अपराध नियंत्रण, विवेचना, और नागरिकों को त्वरित सेवाएं प्रदान करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने कहा कि तीन वर्षों में गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-उन्मुख पुलिसिंग लागू कर जिले को सुरक्षित बनाया है। अपराध दर में कमी, न्याय की तेजी और पुलिस-जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए हमारी पहल लगातार जारी रहेगी।

विवेचना में आधुनिक तकनीक और पारदर्शिता:
विवेचना कार्य को और अधिक वैज्ञानिक बनाने के लिए कमिश्नरेट ने साक्ष्य आधारित विवेचना प्रणाली लागू की। अभियोग में धारा संशोधन, नाम हटाने या जोड़ने के लिए उच्च अधिकारियों की अनुमोदन प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई। इसके परिणामस्वरूप अभियोजन पक्ष को मजबूत किया गया और दोष सिद्धि दर में वृद्धि हुई।

सीसीटीवी नेटवर्क और डिजिटल निगरानी:
कमिश्नरेट ने जिले के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए हैं। 24 घंटे इन कैमरों की निगरानी कमांड कंट्रोल रूम से की जा रही है। इसके चलते अपराध नियंत्रण और घटनाओं के त्वरित अनावरण में मदद मिल रही है।

महिला सुरक्षा और साइबर अपराध नियंत्रण:
महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नरेट में 20 पिंक बूथ बनाए गए हैं। यहां महिला पुलिसकर्मी पीडि़त महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान करती हैं। साइबर अपराध की बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर प्रत्येक थाने में साइबर सेल और साइबर अपराध के लिए विशेष टीम गठित की गई है। ये टीमें 24 घंटे पीडि़तों को सहायता प्रदान करने के लिए सक्रिय हैं।

उत्तर प्रदेश-112 और त्वरित प्रतिक्रिया:
गाजियाबाद पुलिस ने यू.पी.-112 सेवा में नंबर-1 स्थान बनाए रखा है। नवंबर 2025 में रेस्पॉन्स टाइम 4.04 मिनट रिकॉर्ड किया गया। 1 जनवरी से 25 नवंबर तक डायल-112 पर 2,95,285 ईवेंट्स प्राप्त हुए, जिनमें त्वरित प्रतिक्रिया दी गई।

अतिक्रमण नियंत्रण और यातायात प्रबंधन:
सार्वजनिक स्थानों को सुचारू रखने और अतिक्रमण रोकने के लिए बीएनएसएस की धारा 152 के तहत 12,000 से अधिक अतिक्रमणकर्ताओं को नोटिस जारी किए गए। यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए तीनों जोन में सहायक पुलिस आयुक्त और 3 उप-जोन बनाए गए। इन उप-जोन पर निरीक्षक, उपनिरीक्षक और आरक्षियों की नियुक्ति की गई। कुल 221 स्थानों पर ड्यूटी लगाई गई, साथ ही 24 ट्रेमो मोबाइल और पांच इंटरसेप्टर वाहन संचालित हैं।

मुठभेड़ और अपराधियों पर कड़ा नियंत्रण:
पुलिस मुठभेड़ों में 562 अपराधी गिरफ्तार, 399 घायल और 7 ढ़ेर हुए। गैंगस्टर अधिनियम के तहत जिले में पिछले 10 वर्षों के संपत्ति अपराधों में शामिल कुल 9,665 अपराधियों का गहन सत्यापन किया गया। इसमें से 5,235 अभियुक्तों पर कार्रवाई की गई।

सामाजिक जागरूकता और संवाद:
कमिश्नरेट ने जनता के साथ संवाद को मजबूती देने के लिए वादी संवाद दिवस की शुरुआत की। 3 सितंबर 2025 से सभी थानों में यह आयोजन किया गया, जिसमें अब तक 3,859 वादियों को उनके अभियोग के संबंध में प्रगति की जानकारी दी गई।

अभियोजन और न्याय सुनिश्चित करना:
कमिश्नरेट ने अभियोजन कार्य को पारदर्शी बनाने के लिए धारा-164 बीएनएसएस वादों और गैंगस्टर अधिनियम की कार्रवाई के विवरण पोर्टल पर अपलोड किए हैं। इस कदम से न्यायालय में मुकदमों की सटीक जानकारी और अभियोजन की प्रभावशीलता बढ़ी।

मिशन शक्ति और महिला सुरक्षा केंद्र:
मिशन शक्ति फेज-5 के तहत 25 केंद्र स्थापित किए गए। ये केंद्र महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए हैं। महिला अपराधों में तेजी से कार्रवाई करने के लिए कमिश्नरेट ने विशेष पिंक बूथ बनाए और महिला पुलिसकर्मी तैनात की।

जे. रविंदर गौड़
पुलिस आयुक्त

पुलिस कमिश्नरेट के गठन के तीन वर्षों में हमनें जनपद गाजियाबाद में अपराध और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है। हमारी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत गैंगस्टर अधिनियम के अंतर्गत कुख्यात और पेशेवर अपराधियों की 3.33 अरब रुपए मूल्य की संपत्ति जब्त की गई है। पिछले तीन वर्षों में डकैती, लूट, चोरी, महिला अपराध और अन्य गंभीर अपराधों में महत्वपूर्ण कमी आई है। हमने जनता-केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए बीट सिस्टम लागू किया है, जिसमें स्थानीय बीट ऑफिसर और बीट एसआई नियमित रूप से नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। इसके अलावा पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित कर निगरानी को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। साइबर अपराध और महिला सुरक्षा के लिए विशेष सेल्स गठित की गई हैं। हमारी प्राथमिकता जनसुरक्षा, अपराध नियंत्रण और नागरिकों के प्रति पारदर्शी और त्वरित सेवाएं सुनिश्चित करना है। जनपद में अपराध दर में कमी के साथ-साथ जनता के साथ विश्वास और सहयोग स्थापित करना हमारी प्रमुख उपलब्धि है। हम आगे भी कानून व्यवस्था को मजबूत बनाकर गाजियाबाद को सुरक्षित और मॉडल जिला बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जे. रविंद्र गौड़
पुलिस कमिश्नर
गाजियाबाद।