- 503 फ्लैट फिलहाल बंद, आवंटियों को नोटिस जारी करने की तैयारी
- जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने अधिकारियों को निर्देशित किया, सर्वे एवं भूमि विवरण जल्द पूरा करने के लिए कहा
- 288 एलआईजी, 2004 ईडब्ल्यूएस और 64 दुकानों का जीर्णोद्धार, भविष्य में आवासीय एवं व्यवसायिक भवनों का निर्माण
- सभी आवंटियों के स्वामित्व अधिकार सुनिश्चित, पावर ऑफ अटॉर्नी धारकों का विवरण भी होगा स्पष्ट
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने तुलसी निकेतन योजना के पुराने और जर्जर भवनों का री-डेवलपमेंट कराने की तैयारी पूरी कर ली है। योजना के अंतर्गत कॉलोनी में 288 एलआईजी, 2004 ईडब्ल्यूएस फ्लैट और 64 दुकानों के जीर्णोद्धार का कार्य किया जाएगा। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने शनिवार को अधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिए कि रि-डेवलपमेंट से पहले सभी आवंटियों से सहमति पत्र लेना अनिवार्य होगा। तुलसी निकेतन कॉलोनी में फिलहाल 503 फ्लैटों पर ताले लगे हुए हैं, जिनमें अधिकांश भवन लंबे समय से खाली पड़े हैं। जीडीए ने इन फ्लैटों का सर्वे किया है और संपत्ति अनुभाग से सभी आवंटनों एवं स्वामित्व संबंधी जानकारी प्राप्त की जा रही है। योजना में यह सुनिश्चित किया गया है कि मूल आवंटी, पावर ऑफ अटॉर्नी धारक और किराए पर रहने वाले लोग अपने अधिकार सुरक्षित रखें।
जीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि स्थल पर मौजूद भवनों के बारे में विधिक और लेखाकार द्वारा जांच कराकर सभी आवंटियों के स्वामित्व का स्पष्ट विवरण तैयार किया जाएगा। इसके बाद ही रि-डेवलपमेंट कार्य शुरू होगा। उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी 503 भवनों की सूची तैयार कर समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाए। साथ ही, जीडीए की वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी योजना की पूरी जानकारी साझा की जाएगी। आवंटियों को स्वामित्व और रि-डेवलपमेंट प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जाएगी और उन्हें फोटोग्राफ सहित नोटिस के माध्यम से अवगत कराया जाएगा। जीडीए का लक्ष्य है कि रि-डेवलपमेंट के बाद तुलसी निकेतन कॉलोनी में सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक आवासीय वातावरण तैयार हो। सभी निवासियों के अधिकार संरक्षित रहेंगे और परियोजना के तहत नई जीवनशैली, बेहतर ढांचे और सुविधाओं की पेशकश की जाएगी।
रि-डेवलपमेंट का उद्देश्य
जीडीए का उद्देश्य केवल भवनों का जीर्णोद्धार करना नहीं है, बल्कि आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित कॉलोनी का निर्माण करना है। योजना के अंतर्गत अधिकतम आवासीय और व्यवसायिक भवन निर्माण कर आवंटियों की संख्या बढ़ाने और कोई भी व्यक्ति आवासहीन न रहे यह सुनिश्चित किया जाएगा। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सभी भवनों में निवासरत आवंटियों के मूल अधिकारों का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। इसके लिए सहमति पत्र का प्रारूप तैयार कर जीडीए के अधिवक्ता और लेखाकार से जाँच करवाई जाएगी।
विशेषज्ञों और फर्म का सहयोग
जीडीए ने योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए एनबीसीसी इंडिया फर्म के साथ एमओयू किया है। इस फर्म के माध्यम से अतिरिक्त बिल्ट-अप एरिया का निर्माण और संपत्तियों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। जीडीए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्थलीय कार्यालय स्थापित कर सर्वे स्टाफ तैनात किया जाए, ताकि आवंटियों से प्रत्यक्ष संवाद करके उनकी सहमति प्राप्त की जा सके।
बोर्ड की मंजूरी और समयरेखा
तुलसी निकेतन रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को जीडीए की 168वीं बोर्ड बैठक में अनुमोदित किया जा चुका है। योजना के अनुसार, सभी भवनों का जीर्णोद्धार और नया निर्माण सहमतिपत्र मिलने के बाद ही शुरू होगा। इसके लिए आवंटियों को समय पर जानकारी दी जाएगी और सभी आवश्यक प्रारूप, नोटिस और पम्पलेट प्रकाशित किए जाएंगे।















