उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। भारतीय अल्ट्रामैराथन धावक कनिष्क करण ने अंतरराष्ट्रीय ट्रेल रनिंग प्रतियोगिता 9 ड्रैगन्स अल्ट्रा में शानदार प्रदर्शन कर भारत का नाम रोशन किया है। यह प्रतिष्ठित रेस 27 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक हांगकांग में हुई, जिसे एशिया ट्रेल मास्टर सीरीज का फाइनल इवेंट माना जाता है।
9 ड्रैगन्स अल्ट्रा को एशिया की सबसे कठिन ट्रेल रनिंग प्रतियोगिताओं में गिना जाता है। इस मल्टी-स्टेज रेस में धावकों को ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों, तीखी चढ़ाइयों, तकनीकी ट्रेल और बदलते मौसम के बीच लंबी दूरी तय करनी होती है। प्रतियोगिता में दुनिया के कई देशों से अनुभवी ट्रेल रनर्स शामिल हुए। इस चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिता में कनिष्क करण ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 36वां स्थान हासिल किया। वहीं अपने एज ग्रुप और जेंडर श्रेणी में उन्होंने 27वां स्थान प्राप्त किया। इस प्रदर्शन के साथ वे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले भारतीय धावकों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले एथलीट बनकर उभरे हैं। रेस पूरी करने पर उन्हें मेडल भी प्रदान किया गया, जो किसी भी अल्ट्रा-ट्रेल धावक के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
अल्ट्रा-ट्रेल रनिंग में यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 9 ड्रैगन्स जैसी प्रतियोगिताएं केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, तकनीकी कौशल और लंबी दूरी तक लगातार दौड़ने की क्षमता की भी परीक्षा लेती हैं। कई चरणों में होने वाली इस रेस में प्रतिभागियों को कठिन पर्वतीय मार्गों से गुजरते हुए निर्धारित समय में दूरी पूरी करनी होती है। कनिष्क करण अंतरराष्ट्रीय ट्रेल रनिंग प्लेटफॉर्म इंटरनैशनल ट्रेल रनिंग एसोसिएशन पर भी पंजीकृत धावक हैं, जहां उनके विभिन्न अल्ट्रा-डिस्टेंस इवेंट्स और ट्रेल रेस का रिकॉर्ड दर्ज है। इससे स्पष्ट होता है कि वे लंबे समय से कठिन ट्रेल और अल्ट्रा-मैराथन प्रतियोगिताओं में सक्रिय हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में भारतीय धावक का ऐसा प्रदर्शन देश में तेजी से बढ़ रही अल्ट्रा-ट्रेल रनिंग संस्कृति का संकेत है। कनिष्क करण की उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो लंबी दूरी की ट्रेल रनिंग में अपना करियर बनाना चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में यदि भारतीय धावकों को बेहतर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अवसर मिलते हैं, तो वे विश्व स्तर की ट्रेल रनिंग प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कनिष्क करण की उपलब्धि इसी दिशा में एक प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।
कनिष्क की दिनरात की मेहनत का परिणा मिला : राम लाल
कनिष्क करण के पिता रेलवे के वरिष्ठ पद से सेवानिवृत्त हुए रामलाल ने बेटे की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कनिष्क की दिनरात की मेहनत का नतीजा है कि वह इस मुकाम पर पहुंचा है। हर पिता की ख्वाहिश होती है कि उसका बेटा नाम रोशन करे। वह हमारी उम्मीदों पर खरा उतरा है। कनिष्क ने अपनी इस सफलता का श्रेय माता-पिता, ट्रेनर, कोच और दोस्तों को दिया है। कनिष्क ने कहा कि उनके माता-पिता ने हर कदम पर सपोर्ट किया। उसका परिणाम आज सबके सामने है।

















