यशोदा मेडिसिटी की ‘संगिनी’ पहल बनी हौसले की मिसाल, स्त्री रोग कैंसर मरीजों को मिला सहयोग और आत्मविश्वास का मंच

-उपचार के साथ मानसिक और सामाजिक सहयोग भी है उतना ही आवश्यक: डॉ. पीएन अरोड़ा
-कैंसर मरीजों, सर्वाइवर्स और परिजनों ने साझा किए अनुभव, भावनात्मक सहयोग पर दिया गया विशेष जोर
-रैंप वॉक, संगीत और हास्य चिकित्सा सत्रों ने बढ़ाया आत्मविश्वास, बीमारी से आगे बढऩे का संदेश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख अस्पतालों में शामिल यशोदा मेडिसिटी द्वारा स्त्री रोग कैंसर से जूझ रही महिलाओं के समर्थन और मानसिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से शनिवार को ‘संगिनी – लेट्स फिक्स ईच अदर्स क्राउन’ नामक विशेष सहयोग समूह बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कैंसर मरीजों और उनके परिजनों को एक ऐसा सुरक्षित एवं संवेदनशील मंच प्रदान करना था, जहां वे खुलकर अपने अनुभव साझा कर सकें और आपसी सहयोग के माध्यम से आत्मबल प्राप्त कर सकें। यह पहल यशोदा इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर के अंतर्गत वुमन कैंसर सेंटर तथा स्त्री रोग कैंसर एवं रोबोटिक शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा आयोजित की गई। कार्यक्रम में एनटीपीसी लिमिटेड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बसंत कुमार बेहेरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्त्री रोग कैंसर मरीजों, कैंसर से स्वस्थ हो चुकी महिलाओं और उनके परिजनों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने बताया कि स्त्री रोग कैंसर का प्रभाव केवल शारीरिक उपचार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मरीजों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित करता है। इसी सोच के साथ ‘संगिनी’ को एक सहयोगात्मक मंच के रूप में विकसित किया गया, जहां महिलाएं एक-दूसरे से जुड़कर अपनी भावनाओं, संघर्षों और जीत की कहानियों को साझा कर सकें। कार्यक्रम के दौरान संवादात्मक सत्र और कहानी साझा करने की गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों को खुलकर व्यक्त किया। कई महिलाओं ने उपचार के दौरान आए मानसिक संघर्ष, परिवार के सहयोग और स्वयं के आत्मविश्वास से जुड़ी प्रेरणादायक बातें साझा कीं। इन अनुभवों ने अन्य मरीजों को भी सकारात्मक सोच अपनाने और बीमारी का सामना साहस के साथ करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावनात्मक क्षण रैंप वॉक रहा, जिसमें कैंसर मरीजों और सर्वाइवर्स ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक गतिविधि नहीं बल्कि जीवन के प्रति नई ऊर्जा, आत्मसम्मान और साहस का प्रतीक बनकर सामने आई। प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि बीमारी उनकी पहचान नहीं है, बल्कि उनका आत्मविश्वास ही उनकी वास्तविक शक्ति है।
इसके अतिरिक्त संगीत चिकित्सा और हास्य चिकित्सा जैसे विशेष सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिनका उद्देश्य प्रतिभागियों के तनाव को कम करना और सकारात्मक वातावरण तैयार करना था। इन सत्रों ने कार्यक्रम को अधिक सहभागी और उत्साहपूर्ण बना दिया तथा उपस्थित महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. पी. एन. अरोड़ा ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक अस्पताल की जिम्मेदारी केवल चिकित्सा उपचार तक सीमित नहीं होती, बल्कि मरीजों को समग्र और निरंतर देखभाल प्रदान करना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि ‘संगिनी’ जैसी पहलें मरीजों को भावनात्मक रूप से जोड़ने, सीखने और एक-दूसरे का सहयोग बनने का अवसर प्रदान करती हैं। स्त्री रोग कैंसर एवं रोबोटिक शल्य चिकित्सा विभाग की वरिष्ठ निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सतिंदर कौर ने कहा कि कैंसर उपचार के दौरान महिलाओं के मन में अनेक प्रश्न और आशंकाएं होती हैं। ऐसे सहयोग समूह मरीजों को सही जानकारी देने, मानसिक संबल प्रदान करने और उपचार की यात्रा को अधिक सहज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जब मरीज एक-दूसरे के अनुभव सुनते हैं तो उनमें आत्मविश्वास और उम्मीद दोनों बढ़ते हैं।

कैंसर से लड़ाई केवल चिकित्सकीय नहीं बल्कि भावनात्मक और सामाजिक सहयोग की भी मांग करती है। यशोदा मेडिसिटी इस प्रकार की पहलों के माध्यम से एकीकृत कैंसर देखभाल प्रणाली को मजबूत करने और मरीजों को सम्मानजनक, सहयोगात्मक तथा सकारात्मक उपचार अनुभव प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। ‘संगिनी’ कार्यक्रम न केवल एक चिकित्सा पहल साबित हुआ बल्कि यह हौसले, संवेदना और सामूहिक शक्ति का उत्सव बन गया, जिसने यह सिद्ध किया कि सहयोग, संवाद और सकारात्मक सोच के साथ किसी भी चुनौती का सामना मजबूती से किया जा सकता है।

डॉ. पी. एन. अरोड़ा
चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक
यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स

एक स्वास्थ्य संस्थान की भूमिका केवल रोग का उपचार करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मरीज को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर समग्र देखभाल प्रदान करना भी उतना ही आवश्यक है। स्त्री रोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही महिलाओं को चिकित्सा के साथ-साथ संवेदनात्मक सहयोग और आत्मविश्वास की भी आवश्यकता होती है। ‘संगिनी’ जैसी पहलें मरीजों को एक सुरक्षित और सकारात्मक मंच प्रदान करती हैं, जहां वे अपने अनुभव साझा कर सकती हैं, एक-दूसरे से सीख सकती हैं और भावनात्मक रूप से सशक्त बन सकती हैं।
डॉ. पी. एन. अरोड़ा
चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक
यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स