योग नहीं केवल अभ्यास, यह है जीवन जीने की संजीवनी, कैम्ब्रिज पब्लिक स्कूल में बच्चों को सिखाया जा रहा संतुलित जीवन का मंत्र

-रोजाना योग सत्रों के जरिए छात्रों में बढ़ाया जा रहा आत्मबल, एकाग्रता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना है। इसी सोच के साथ कैम्ब्रिज पब्लिक स्कूल, चिपियाना बुजुर्ग में प्रतिदिन छात्रों को योग का अभ्यास कराया जा रहा है। यहां योग को एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन शैली के रूप में अपनाया गया है। विद्यालय में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए योगासन, प्राणायाम और ध्यान की विधियों को नियमित रूप से अभ्यास कराया जाता है, जिससे उनके जीवन में अनुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास विकसित हो रहा है। गुरुवार को आयोजित विशेष योग सत्र में स्कूल निदेशक विवेक चौधरी, प्रिंसिपल रितु चौधरी और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से प्रमाणित योग प्रशिक्षिका सुश्री श्वेता शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को योग की वैज्ञानिकता, उसके प्रभाव और दैनिक जीवन में उपयोगिता के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

योग प्रशिक्षिका ने बच्चों को बताया कि कैसे योग से न केवल शरीर लचीला बनता है, बल्कि मन भी स्थिर और शांत रहता है। कैम्ब्रिज पब्लिक स्कूल चिपियाना बुजुर्ग यह सिद्ध कर रहा है कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में यदि योग जैसे भारतीय जीवन-दर्शन को समाहित किया जाए, तो विद्यार्थी न केवल अकादमिक रूप से बेहतर बनते हैं, बल्कि वे जीवन के हर मोर्चे पर विजयी बन सकते हैं। यह प्रयास न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि अनुकरणीय भी। विवेक चौधरी (निदेशक, कैम्ब्रिज पब्लिक स्कूल) ने कहा कि हमारा विश्वास है कि यदि बच्चों को आरंभ से ही सही दिशा, अनुशासन और संतुलन की शिक्षा मिले तो वे केवल अच्छे विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक बनते हैं। योग के ज़रिए हम उन्हें मानसिक मजबूती, आंतरिक स्थिरता और आत्मबल प्रदान कर रहे हैं।

रितु चौधरी (प्रिंसिपल) ने बताया कि हमने देखा है कि नियमित योगाभ्यास से छात्रों की सोच में सकारात्मकता, ध्यान में वृद्धि और तनाव में कमी आई है। हमारे विद्यालय का ध्येय है कि शिक्षा के साथ-साथ उनके चरित्र और जीवन मूल्यों का भी निर्माण हो। श्वेता शर्मा (योग प्रशिक्षिका, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान) ने कहा कि योग केवल कसरत नहीं, यह जीवन जीने की कला है। जब बच्चे इसे अपनाते हैं तो उनके व्यक्तित्व में आत्म-संयम, आत्म-विश्वास और गहराई आती है। योग से वे न केवल परीक्षा की चिंता से मुक्त होते हैं, बल्कि स्वयं से जुड़ते हैं।

खास बातें
• रोजाना योग सत्र में हिस्सा ले रहे हैं सभी कक्षाओं के विद्यार्थी
• श्वेता शर्मा द्वारा वैज्ञानिक विधियों से कराया जा रहा प्रशिक्षण
• योग से बढ़ रही है छात्रों की स्मरण शक्ति, अनुशासन और शारीरिक क्षमता
• स्कूल प्रबंधन कर रहा है ‘योग को जीवन में उतारो’ मुहिम का प्रचार