दीपावली पर चाइनीज नही स्वदेशी सामान को अपनाएं : प्रिंस ठाकुर

गाजियाबाद। देश में दीपावली पर्व सिर पर है। ऐसे में चाइनीज सामान का अब बोल-बाला नजर नहीं आ रहा है। भारतीय नागरिकों ने चीनी सामान के बहिष्कार का अभियान चला रखा है। यह उचित भी है। इस अभियान का भरपूर समर्थन किया जाना चाहिए। भारत के सामने चीन निरंतर बाधाएं खड़ी कर रहा है। आतंकवाद पर भी चीन का व्यवहार ठीक नहीं है। चीन को सबक सिखाने के लिए भारतीय नागरिकों ने सोशल मीडिया पर चीनी सामान के बहिष्कार की मुहिम चलाई है। यह मुहिम अपना रंग दिखा रही है। यह बातें भाजपा नेता ठाकुर प्रिंस राठौर ने कहीं। उन्होंने कहा भारत में चीनी सामान की बिक्री कम हो गई है। जागरूक नागरिक अब विदेशी की जगह स्वदेशी सामान को अपनाने में रूचि दिखा रहे हैं। चीनी माल को दोयम दर्जे का समझा जाता है। उसकी गुणवत्ता को संदेह से देखा जाता है। चीनी सामान भारत में इसलिए बिकता है, क्योंकि वह सस्ता है। उसकी बिक्री गुणवत्ता के कारण नहीं है। विदेशी सामान के बहिष्कार का आग्रह देश की आजादी के पहले से रहा है। दूसरी बड़ी बात यह है कि चीनी सामान के बहिष्कार से बेशक अभी छोटे व्यापारियों को घाटा हो जाए, लेकिन अंत में इस मुहिम की सफलता उनके ही हित में है। छोटे व्यापारियों, कामगारों और कुटीर उद्योगों को सबसे अधिक नुकसान चीनी सामान ने ही पहुंचाया है। इसलिए जो चीनी सामान के बहिष्कार की मुहिम का विरोध कर रहे हैं, असल में वह लोग भारत के कामगारों और कुटीर उद्योगों पर चोट कर रहे हैं। ठाकुर प्रिंस राठौर ने बताया भारतीय बाजार जब से चीनी सामान से पट गए, तब से भारत में कुम्हार के चाक की गति मंद ही नहीं हुई, बल्कि बहुत हद तक उनका चाक बंद हो गया है। लकड़ी, मिट्टी और चीनी के खिलौने बनाने वाले लोगों का धंधा बंद हो गया। चीनी पटाखों ने कई भारतीय पटाखा कारखानों के शटर गिरा दिए। दीपावली पर सस्ती चीनी लाइट आने से भारतीय इलेक्ट्रीशियनों का काम ठप हो गया। रक्षाबंधन पर भारतीय राखी कारोबार पर गहरी चोट पहुंची है। हालात यहां तक हैं कि पूजन सामग्री तक चीन से बनकर आ रही है। इसलिए चीनी सामान का बहिष्कार उचित है। भारत विरोधी मानसिकता वाले लोगों की भावनात्मक अपीलों में न फंसकर हमें यथासंभव चीनी सामान का बहिष्कार करना चाहिए, ताकि हमारे कामगारों, बुनकरों, शिल्पकारों और कुटीर उद्योगों को नई ताकत मिल सके। स्वाभाविक तौर पर चीनी सामान का बहिष्कार करने वाले लोग आज बाजार में भारतीय सामान की मांग कर रहे हैं यानी जब भारतीय सामान की मांग बढ़ेगी, तब हमारे कुटीर उद्योग मजबूत होंगे।