मुआवजे पर मंथन, जीडीए-किसानों की वार्ता विफल

दोबारा बातचीत करने के मूड में आंदोलनरत कृषक

गाजियाबाद। जीडीए की मधुबन-बापूधाम योजना से प्रभावित किसानों को अभी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। जीडीए ने आधा दर्जन गांवों की भूमि अधिग्रहित की थी। इस भूमि का एकसमान मुआवजे की मांग के समर्थन किसान काफी समय से आंदोलनरत हैं। कुछ किसानों ने सोमवार को इस मुद्दे पर जीडीए उपाध्यक्ष से मुलाकात कर वार्ता की। यह वार्ता सफल नहीं हो पाई। किसानों ने निकट भविष्य में पुन: बातचीत करने की मंशा जाहिर की है। करीब 800 एकड़ भूमि को लेकर यह विवाद चल रहा है।

बैठक में जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश के अलावा सचिव बृजेश कुमार, एडीएम (एलए) श्याम अवध चौहान, विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) सुशील कुमार चौबे, तहसीलदार दुर्गेश सिंह, अधिशासी अभियंता आलोक रंजन आदि मौजूद रहे। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरदीप शर्मा के नेतृत्व में बॉस चौधरी, गौरीशंकर, धर्मवीर डायरेक्टर, यशपाल चौधरी, रामनाथ, इलम सिंह आदि किसानों ने वार्ता की। किसानों ने मधुबन-बापूधाम की भूमि का एक समान मुआवजा देने की अपील की। जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2016 में नए भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत याचिका दायर करने वाले किसानों को बढ़ाकर मुआवजा देने के आदेश दिए थे। अन्य किसान इसमें सम्मिलित नहीं है। उन्होंने कहा कि 1100 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से प्रभावित किसानों को भूमि का मुआवजा दिया गया। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन न हो। किसान ही इसके बारे में बताएं।

बैठक में अंतत: कोई निर्णय नहीं हो सका। वार्ता का कोई निष्कर्ष नहीं निकलने पर किसान दोबारा से बैठक करने की तैयारी में हैं। किसानों ने कहा है कि मधुबन-बापूधाम योजना में कोई भी निर्माण कार्य शुरू नहीं होने देंगे। सनद रहे कि 30 सितंबर को मधुबन-बापूधाम योजना से प्रभावित 6 गांवों के किसानों और ग्रामीण महिलाओं ने जीडीए के बाहर प्रदर्शन किया था। जीडीए 281 एकड़ भूमि से प्रभावित किसानों को नए भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत मुआवजा दे चुका है। ऐसे में जीडीए 800 एकड़ भूमि से प्रभावित किसानों को बढ़ा मुआवजा नहीं देना चाहता है। इसलिए वार्ता विफल हो गई।