गाजियाबाद। देश में कोरोना भले नियत्रंण में आ चुका है। लेकिन अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पटरी से उतर चुकी अर्थव्यवस्था को दुबारा पटरी पर लौटाना है। व्यापारी एकता समिति संस्थान राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा कोरोना से बुरी तरह प्रभावित अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में ही कुल मिलाकर 6,28,993 करोड़ रुपए के नए पैकेज का ऐलान किया है। लेकिन इसमें से ज़्यादातर रकम कर्ज के नाम पर ही दी जानी है। अब वो कर्ज वापस आएगा या नहीं ये एक अलग सवाल है। लेकिन कोरोना राहत के पहले ऐलान के बाद से अब तक जितने राहत पैकेज का ऐलान हुआ है वो सब मोटे तौर पर उधार बाँटने की ही योजना लग रही है। जबकि कोरोना के दूसरी लहर के बाद इस वक्त सबसे ज़्यादा जरूरत इस बात की है कि लोग पहले लिए हुए कर्ज चुकाने की हालत में आएँ और नए कर्ज लेने की हिम्मत दिखा सकें। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में ही आठ नई योजनाओं का ऐलान किया। बच्चों के इलाज की सुविधाएँ बढ़ाने के लिए 23 हजार 220 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया गया। पिछड़े इलाकों में मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने यानी इलाज की बेहतर सुविधाएँ बनाने के लिए 50 हजार करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी स्कीम लाई जा रही है। दरअसल यह लोन गारंटी स्कीम एक लाख 10 हज़ार करोड़ रुपए की है, जिसमें से 50 हज़ार करोड़ हेल्थ सेक्टर के लिए और बाकी 60 हजार करोड़ के कर्ज दूसरे सेक्टरों के लिए होंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा इसके अलावा कोरोना की सबसे बुरी मार झेल रहे टूरिज्म सेक्टर को सहारा देने के लिए ट्रैवल एजेंटों को 10 लाख रुपए और टूरिस्ट गाइडों को एक लाख रुपए का कर्ज सरकार की गारंटी पर दिया जाएगा। यही नहीं इनका कारोबार बढ़ाने के लिए विदेशों से भारत आने वाले पहले पांच लाख टूरिस्टों की वीजा फीस माफ कर दी जाएगी। एमएसएमई उद्योगों को सहारा देने के लिए सरकार ने पहले से चल रही इमरजेंसी क्रेडिट लाइन स्कीम का आकार तीन लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर साढ़े चार लाख करोड़ रुपए कर दिया है। इस स्कीम में उद्यमियों को कुछ गिरवी रखे बिना कर्ज दिए जाते हैं। साथ ही वित्त मंत्री ने एक नई स्कीम का ऐलान भी किया, जिसमें 25 लाख छोटे कारोबारियों को सवा लाख रुपए तक का कज़ऱ् रियायती ब्याज दर पर दिया जाएगा। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत रोजग़ार योजना और नए रोजग़ार पैदा करने पर मिलने वाली इंसेंटिव स्कीम यानी पीएलआई की मियाद भी एक एक साल बढ़ाने का ऐलान किया है। लेकिन इस बात पर गंभीर सवाल हैं कि इन योजनाओं से कितना फ़ायदा होगा और किसे होगा? सरकार पहले ही जो क्रेडिट गारंटी स्कीम लाई थी, उसमें तीन लाख करोड़ के सामने सिफऱ् दो लाख 69 हजार करोड़ रुपए का ही कज़ऱ् उठा है। फिर डेढ़ लाख करोड़ बढ़ाकर सरकार क्या हासिल करेगी। इसके पहले भी मोदी सरकार कऱीब 24 लाख 35 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान कर चुकी है। उन्होंने बताया ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस वक्त कंज्यूमर की जेब में पैसे डालकर मांग बढ़ाने की जरूरत है, उस वक्त सरकार व्यापारियों और उद्यमियों को कर्ज देने पर क्यों इतना ज़ोर दे रही है? इसके लिए वो गारंटी भी देगी, ब्याज की दर भी कम करेगी और गिरवी रखने की शर्त भी हटा देगी। लेकिन कर्ज लेकर कोई उद्योगपति या दुकानदार करेगा क्या? उसके लिए कर्ज की जरूरत या अहमियत तभी होती है, जब उसके सामने ग्राहक खड़े हों और उसे माल खरीदने, भरने या बनाने के लिए पैसे की ज़रूरत हो। इस वक्त की सबसे बड़ी मुसीबत है बाजार में मांग की कमी, और उसकी वजह है लाखों की संख्या में बेरोजग़ार हुए लोग, बंद पड़े कारोबार और लोगों के मन में छाई हुई अनिश्चितता। सरकार को कुछ ऐसा करना होगा, जिससे इसका इलाज हो और तब शायद उसे इस तरह कज़ऱ् बाँटने की ज़रूरत नहीं रह जाएगी।
















