मांगे नहीं मानी तो दिल्ली में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बंद करने की चेतावनी, फोर्स मुस्तैद
गाजियाबाद। किसान आंदोलन किसी तरह भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस आंदोलन में लगातार तेजी आ रही है। जहां यूपी दिल्ली बॉर्डर इस आंदोलन का अखाड़ा बन चुका है। निश्चित रूप से किसानों की बढ़ती संख्या से जहां एक और शासन प्रशासन तनाव में आ रहा है। दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन में रातभर देशभक्ति का गाना चलता रहा। किसानों का नया नारा अब दिल्ली चलो नहीं बल्कि दिल्ली घेरो है।
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार को तीसरे दिन भी यूपी गेट पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का डेरा जारी रहा। 
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार को किसानों की मांग मानने के लिए झुकना होगा। अन्यथा मांगें नहीं मानी तो दिल्ली में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बंद कर देंगे। वहीं, यूपी गेट पर अब किसानों का डेरा जमा होने के चलते किसानों के भारी संख्या में जत्था आ रहे हैं। रामलीला मैदान में किसानों को जाने की जब तक इजाजत नहीं देगी तब तक किसान अब लंबी लड़ाई के लिए यहां पर डेरा डालकर बैठ गए हैं। केंद्रीय कृषि कानून के विरोध में दिल्ली सीमा यूपी गेट पर सैकड़ों की तादाद में किसान डटे हुए हैं। किसान फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करने और एमएसपी से नीचे खरीदारी करने वालों पर कार्रवाई करने के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार भले ही कृषि कानून पर किसानों से बात करने को तैयार है लेकिन किसान दिल्ली की सीमाओं को छोडऩे को तैयार नहीं हैं। किसानों का कहना है कि सरकार उन्हें बुराड़ी भेज कर दिल्ली बॉर्डर खाली करवाना चाहती है। यदि बुराड़ी गए तो उनकी मांगे और उन्हें दरकिनार कर दिया जाएगा। सरकार किसानों से वार्ता करने के लिए तैयार है,मगर किसानों ने ऐलान किया कि 3 दिसंबर तक यूपी गेट पर डेरा जारी रहेगा। पंजाब,हरियाणा ओर राजस्थान के किसानों का सिंघू बॉर्डर पर धरना जारी है। दिल्ली के 5 प्वाइंट पर किसान अब धरना देंगे। इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। जब सरकार की नीयत साफ होगी तब हल निकल जाएगा। बुराड़ी कोई व्हाइट हाउस नहीं है कि किसान वहां जाएं। इस बीच यूपी गेट पर बैठे शमली से आए एक किसान दिवेंद्र मलिक ताऊ ने कहा कि यहां रह के कोई फायदा नहीं है। हम काला कानून रद्द करने आए हैं। हम दिल्ली की सारे बॉर्डर बंद करेंगे। हमारे पास 6 महीने तक का राशन है। हमें आपके खाने की जरूरत नहीं है। वोट मांगने के लिए गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के पास समय है लेकिन हम लोगों से मिलने के लिए नहीं है। हम इनका हुक्का पानी बंद करेंगे। गौरतलब है कि किसान आंदोलन का असर आम लोगों पर पड़ा है और लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। दिल्ली के पास हाईवे पर जाम की स्थिति बन गई है और दफ्तर जाने वालों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही भीड़ की वजह से कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। जबकि किसानों ने ट्रैक्टर पर तिरपाल डालकर इसे ही अपना घर बना लिया है। ठंड से बचने के लिए रजाई-कंबल भी लाए गए हैं।सड़क पर अलाव जल रहा है लेकिन सर्द रातों में इस अलाव की गर्मी से कहीं ज्यादा तपिश किसानों के गुस्से की आग से बढ़ रही है।
सड़क पर अलाव जलाकर किसानों ने बिताई रात
जिस वक्त हम लोग गरम कंबल और गर्म रजाई ओढ़ कर चैन की नींद सो रहे थे, उस वक्त यूपी बॉर्डर पर किसान कड़ाके की सर्दी में अलाव जलाकर सड़क पर किसी तरह रात गुजारने की जद्दोजहद कर रहे थे। निश्चित रूप से 29 नवंबर की रात किसानों ने कड़ाके की ठंड में सड़क पर गुजारी, जहां न सोने का इंतजाम था ना ठंड से बचने का पूरा प्रबंध लेकिन किसानों के हित और आंदोलन को सफल बनाने के लिए हर तरह का कष्ट झेलते हुए उन्होंने रात बिता रहे है। ऐसे संबंध में मेरठ से आए अशोक सिंह नामक किसान ने बताया कि ना तो उन्हें सर्दी की फिक्र है और ना ही किसी कष्ट को झेलने में दिक्कत। यह वक्त आराम का नहीं यह वक्त संघर्ष का है और अंतिम सांस तक हर किसान संघर्ष करने के लिए घर से निकला है। जब तक यह काला कानून वापस नहीं होगा तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। यह आंदोलन और तेज होगा चाहे हमें अपनी जान देनी पड़े।
















