-सीएंडडी वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, जोनल टीमों को दी चेतावनी, आमजन को जागरूक करने की भी रणनीति तैयार
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े औद्योगिक और रिहायशी शहरों में शामिल गाजियाबाद की बिगड़ती वायु गुणवत्ता के कारण लोगों के लिए खतरे की घंटी बनती जा रही है। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए अब नगर निगम ने मोर्चा खोल दिया है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने नगर निगम मुख्यालय सभागार में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर विभागवार समीक्षा करते हुए वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए पूरी ताकत झोंकने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य अभियंता (निर्माण) एनके चौधरी, स्वास्थ्य विभाग, उद्यान विभाग, और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने कहा कि निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सीएंडडी वेस्ट) के कारण धूल का स्तर बेहद खतरनाक स्थिति में है। इन अपशिष्टों का उचित निस्तारण अब समय की मांग ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
नगर आयुक्त ने कह कि गाजियाबाद की हवा को सांस लेने लायक बनाना हमारी प्राथमिकता है। अब योजनाएं कागजों तक नहीं रहेंगी। ज़मीन पर तेज़ी से असर दिखना चाहिए। 15 दिन में सभी जोनों में प्रभावी परिणाम आने चाहिएं। जो कोताही बरतेगा, उस पर कार्रवाई होगी। नगर आयुक्त ने मोहन नगर और विजयनगर जोन में कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए। वहीं कविनगर जोन द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने को कहा गया। अब प्रत्येक जोनल प्रभारी को क्षेत्र में न केवल सीएंडडी वेस्ट के निस्तारण की निगरानी करनी होगी, बल्कि जनजागरूकता अभियान भी चलाना होगा। नगर आयुक्त ने कहा कि लोग तब ही जागरूक होंगे जब उन्हें बताया जाएगा कि निर्माण से निकलने वाले मलबे को कहां और कैसे निस्तारित किया जाए।
नगर निगम ने यह साफ कर दिया है कि वायु गुणवत्ता सुधार के लिए अब सिर्फ घोषणाएं नहीं होंगी, ठोस और परिणाममूलक कार्यों पर ही ध्यान होगा। शहर को धूल मुक्त करने का यह अभियान आने वाले दिनों में एक व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसमें प्रशासनिक अमले के साथ आमजन की भूमिका भी बेहद अहम होगी। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि गाजियाबाद को स्वच्छ और धूल रहित बनाना अकेले नगर निगम का काम नहीं है। हर नागरिक की इसमें सहभागिता जरूरी है। अपने घर, दुकान, प्रतिष्ठानों से निकलने वाले सीएंडडी वेस्ट को नियमों के अनुसार निस्तारित करें। नगर निगम ने यह भी घोषणा की है कि जल्द ही शहर में सीएंडडी वेस्ट संग्रहण केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी, जहां पर लोग अपने निर्माण से निकले मलबे को निर्धारित शुल्क के साथ जमा कर सकेंगे।
सख्ती की शुरुआत: जुर्माना और कार्रवाई
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि निर्धारित स्थानों पर निस्तारण न करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और यदि लापरवाही दोहराई गई तो कानूनी कार्रवाई भी होगी। नगर आयुक्त ने मुख्य अभियंता को निर्देशित किया कि ऐसी गतिविधियों की 24&7 निगरानी के लिए एक विशेष टीम गठित की जाए, जो मलबा फेंकने वालों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई कर सके।
स्वास्थ्य और उद्यान विभाग की भी भूमिका तय
स्वास्थ्य विभाग को सड़कों की नियमित धुलाई और सैनिटाइजेशन कार्यों में तेजी लाने के लिए कहा गया, वहीं उद्यान विभाग को निर्देशित किया गया कि शहर के अधिकतम हिस्सों में हरियाली बढ़ाई जाए। यह हरियाली ना केवल शहर की सुंदरता बढ़ाएगी, बल्कि धूल और प्रदूषण के स्तर को भी कम करेगी।
गाजियाबाद को स्वच्छ और धूल मुक्त बनाना नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट (सीएंडडी वेस्ट) का वैज्ञानिक एवं नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। मोहन नगर और विजयनगर जोन में कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों बढ़ाई जाएंगी। जिन क्षेत्रों में लापरवाही दिखेगी, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हमने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जोन में प्रभारी नियुक्त कर नागरिकों को सीएंडडी वेस्ट निस्तारण प्रक्रिया के प्रति जागरूक किया जाए। आमजन से भी अपील है कि वे अपशिष्ट निस्तारण में सहयोग करें और स्वच्छ, प्रदूषण रहित गाजियाबाद के निर्माण में भागीदार बनें।
विक्रमादित्य सिंह मलिक
नगर आयुक्त
नगर निगम गाजियाबाद।

















