नगर पालिका में भगवान भरोसे फाइनल हो जाते हैं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट

प्रोजेक्ट्स के डिजाइन के लिए पीडब्लूडी पर निर्भरता

गाजियाबाद। मुरादनगर श्मशान घाट हादसे के बाद नगर पालिकाओं की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। पालिका परिषदों में करोड़ों रुपए के कार्यों की फाइलें तैयार हो जाती हैं और काम भी करा लिए जाते हैं, मगर कार्योंं का डिजाइन देखने एवं उन्हें फाइनल करने के लिए सहायक अभियंता तक नहीं होता है। करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट के डिजाइन को फाइनल कराने के लिए पीडब्ल्यूडी को फाइलें भेजी जाती हंै। पीडब्ल्यूडी के अफसर नगर पालिका के काम को कितना तवज्जो देते हैं, इसका उदाहरण मुरादनगर की घटना है। नगर पालिका में निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी सिर्फ एक अवर अभियंता पर है। मुरादनगर पालिका परिषद में जिस अवर अभियंता की सेवाएं ली जा रही थीं, वह 30 सितंबर 2020 को रिटायर हो गए थे। देखा जाए तो शासन द्वारा टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने को समय-समय पर कई शासनादेश जारी किए गए। इन शासनादेश के अंतर्गत स्पष्ट किया गया कि अधिकांश टेंडर ई-टेडरिंग के माध्यम से आमंत्रित किए जाएं। लेकिन अधिकांश नगर पालिका एवं नगर निगमों में क्या कुछ चल रहा है, ये किसी से भी छिपा नहीं है। सगे संबंधियों को गुपचुप तरीके से टेंडर दिला दिए जाते हैं। इसमें भी कुछ बड़े कार्यों के टेंडर से जुड़े काम चोर दरवाजे से किसी अन्य फर्म से कराए जाते हैं।  सच्चाई किसी से भी छिपी नहीं है। बताते हैं कि नगर पालिका परिषदों मे सहायक अभियंता का पद ही नहीं है। अवर अभियंता जो डिजाइन तैयार करता है, उसे पीडब्ल्यूडी को भेज दिया जाता है। बताते हैं कि इस तरह का हॉल तैयार करने से पहले सर्वप्रथम मिट्टी की पड़ताल करनी होती है। इसके बाद डिजाइन को तैयार किया जाता है।