ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने को पौधरोपण जरूरी: डॉ. अनुज कुमार सिंह

-पर्यावरण दिवस पर शहर में आज रोपे जाएंगे पौधे

गाजियाबाद। कोरोना काल में एक तरफ ऑक्सीजन की लोगों को जरूरत पड़ रही है। वहीं इसको देखते हुए पेड़-पौधों की अहम भूमिका देखने को मिल रही है। आज ग्लोबल वार्मिग के युग में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने तथा भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने जरूरी हैं। पेड़-पौधों के बिना मानव जीवन का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाकर वातावरण को साफ रखने का संकल्प लेना चाहिए। शहर के पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में नगर निगम के उद्यान विभाग अहम भूमिका निभा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों माली अपने-अपने कार्यों को निभाते हुए पार्कों की सफाई, पौधों में पानी देने की प्रक्रिया व अन्य कार्य शहर को हरा-भरा बनाए रखने में करते हैं। ग्रीन बेल्ट, सेंट्रल वर्ज, पार्कों में प्रतिदिन शहर को खूबसूरत रखने की प्रक्रिया उद्यान विभाग के माली द्वारा की जाती है। जिस क्रम में इस बार फिर नगर निगम शासन से प्राप्त लक्ष्य का दो गुना पौधों को विश्व पर्यावरण दिवस यानि आज रोपित करेगा। मेयर आशा शर्मा, नगर आयुक्त महेंन्द्र सिंह तंवर के निर्देश पर शहर के पांचो जोन में उद्यान विभाग के मालियों द्वारा पौधा रोपित किया जाएगा।
उद्यान प्रभारी डॉ अनुज कुमार सिंह ने बताया कि मानसून में नगर निगम द्वारा ऑक्सीजन की मात्रा पर्यावरण में बढ़ाने के लिए मियावकी पद्धति से पौधारोपण की प्रक्रिया चल रही है। मगर विश्व पर्यावरण दिवस पर समस्त माली स्वतंत्र रूप से एक-एक पौधा स्वेच्छा से अपने क्षेत्र में लगाएंगे। इस प्रकार शहर में लगभग हजारों पौधों को एक साथ पर्यावरण में वृद्धि करते हुए लगाया जाएगा। पौधा रोपण कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद भी अपना सहयोग प्रदान करेंगे। जिसमें आंवला, चंपा गुड़हल, कुरेशिया, कदम अर्जुन व अन्य पौधे रोपित किए जाएगा। इसके साथ उद्यान विभाग के कर्मचारी और आरडब्लूए पदाधिकारी भी पौधारोपण में सहयोग करेंगे। डॉ अनुज कुमार सिंह ने बताया पौधा रोपण कार्यक्रम में सभी मालियों को उसकी देखरेख की भी जिम्मेदारी दी जाएगी। पौधा रोपण कार्यक्रम में नगर निगम के मालियों का विशेष योगदान रहता है। पर्यावरण की बेहतरी में मालियों के योगदान को कतई नजर अंदाज नही किया जा सकता है। भले ही उन्हें अपने काम का वाजिब मेहनताना न मिलता हो, मगर पर्यावरण को बढावा देने और बचाने में उनका अमूल्य योगदान होता है। कड़ी धूप के बावजूद माली पूरी मेहनत से पर्यावरण को बचाने की मुहिम में जुटे रहते है।