गाजियाबाद में RSS प्रमुख Mohan Bhagwat बोले भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए संगठित होना जरूरी

RSS के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने किया ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’ पुस्तक का विमोचन

गाजियाबाद। सरसंघचालक Mohan Bhagwat रविवार को गाजियाबाद आए। इस दरम्यान उन्होंने मेवाड़ इंस्टीट्यूट वसुंधरा में ख्वाजा इफ्तार अहमद द्वारा लिखित पुस्तक ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया।

Mohan Bhagwat ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए संगठित होने की आवश्यक्ता है। इसके लिए सभी को एक साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि संघ के प्रति जिन नागरिकों का नजरिया ठीक नहीं है, इसकी संघ को कोई फिक्र नहीं है। संघ को रूप बदल कर नागरिकों के मध्य जाने की जरूरत नहीं है। संघ के कार्यों से सभी का भला होगा। ना इमेज बदलने की कोई कोशिश है और ना आगामी चुनाव में मुस्लिमों के वोट पाने का प्रयास है।Mohan Bhagwat ने कहा कि वोट की राजनीति में संघ यकीन नहीं करता। उन्होंने कहा कि मनुष्यों को जोड़ने का काम राजनीति के बस का नहीं है। राजनीति इस कार्य का औजार नहीं है, बल्कि उसे बिगाड़ने का हथियार है।

RSS प्रमुख ने कहा कि देश की प्रगति के लिए एकजुटता बेहद जरूरी है। हिंदू-मुस्लिम एकता भ्रामक शब्द है। यह दोनों अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही हैं। जब दोनों मानते हैं कि अलग हैं तभी संकट होता है। Mohan Bhagwat ने कहा कि हम एक हैं और इसका आधार हमारी मातृभूमि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के सभी नागरिकों का डीएनए समान है। इस आधार पर हम विचार करते हैं तो मन में अपनापन आ जाता है। कार्यक्रम में पुस्तक ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’ के लेखक ख्वाजा अहमद ने हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के मन में यह बैठाया गया है कि हिंदू उन्हें खा जाएंगे। किसी अन्य देश में ऐसा होगा जहां बहुसंख्यक किसी अल्पसंख्यक समाज पर हावी है, मगर भारत में जो भी आया वो आज भी मौजूद है। डॉ. भागवत ने कहा कि सभी नागरिकों को समझदार बनाने के लिए वक्त लगेगा। देश की एकता को बाधा डालने वाली बातों के खिलाफ हिंदू ही खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता सर्वश्रेष्ठ है, जो भारत को अपनी मातृभूमि मानता है वह हिंदू है। गाय को हम अपनी मां मानते हैं। यदि कोई गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग करता है तो उसके खिलाफ कानून को अपना काम करना चाहिए। दोषी चाहे किसी भी समाज का हो उसे कठोर सजा मिलनी चाहिए।