शिव शक्ति की याचिका सर्वोच्च न्यायालय से भी हुई खारिज, निगम को मिली जीत

-निगम की जीत से, शहर को योजनाओं का लाभ दिलाना सरल: नगर आयुक्त

गाजियाबाद। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में जहां सभी विभाग बेहतर कार्य कर रहे हैं। वहीं गाजियाबाद नगर निगम का लीगल डिपार्टमेंट भी पेंडिंग मामलों को रफ्तार दे रहा है। इसी क्रम में शिव शक्ति ड्रीम होम को भी हार का मुंह देखना पड़ा। सर्वोच्च न्यायालय मे इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम टेंडर के विरुद्ध दायर की गई। याचिका को खारिज कर दिया गया है, जो कि निगम की एक बड़ी जीत है। शिव शक्ति का टेंडर 6 वर्षों के बाद पूर्ण हो चुका था, इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ होने पर शिव शक्ति द्वारा टेंडर को चैलेंज करते हुए, 9508/2024 याचिका दायर की गई थी। जिसको पॉलिसी मैटर बताते हुए और आर्बिट्रेशन के पास जाने हेतु आदेशित करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 20 मार्च 2024 खारिज कर दिया गया था।

इसके बाद भी शिव शक्ति ड्रीम होम द्वारा आईटीएमएस टेंडर को दोबारा से चैलेंज करते हुए याचिका 27609/24 माननीय सर्वोच्च न्यायालय मे दायर की गई। नगर निगम लीगल डिपार्टमेंट द्वारा अपना पक्ष रखा गया। जिस पर गाजियाबाद नगर निगम को जीत मिली और सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिव शक्ति ड्रीम होम की याचिका को 2 जनवरी 2025 को खारिज किया गया। सर्वोच्च न्यायालय से आर्डर प्राप्त होने पर नगर आयुक्त द्वारा लीगल टीम के बेहतर कार्यवाही करने पर प्रशंसा की गई। अन्य पेंटिंग मामलों पर भी इसी प्रकार नगर निगम को जीत दिलाने के लिए मोटिवेट भी किया गया। महापौर और नगर आयुक्त के नेतृत्व में  नगर निगम के सभी विभाग शहर हित में लगातार कार्य कर रहे हैं। वहीं शासन की योजनाएं शहर हित में धरातल पर लाने के लिए नगर आयुक्त लगातार प्रयासरत है। लीगल डिपार्टमेंट के कार्यों में भी रफ्तार देखने को मिल रही है।