मदरसों एवं संस्कृत पाठशालाओं में बढ़ेगी खेल की धारा

-सर्वांगीण विकास के लिए खेल बेहद जरूरी: कनिष्क पांडे

गाजियाबाद। खेल हमारे जीवन का आवश्यक हिस्सा है। स्वस्थ शरीर और दिमाग को विकसित करने के लिए खेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगातार पढ़ाई के दौरान कई बार तनाव की स्थिति होती है। ऐसे में खेल इस तनाव को दूर करने का बेहतर माध्यम है। हमारे देश में खेलों को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती, जितनी शिक्षा को दी जाती है। जिस तरह दिमाग का सही विकास के लिए शिक्षा जरूरी है, उसी तरह शारीरिक विकास के लिए खेल महत्वपूर्ण हैं। हिन्दी भवन में ‘चलो खेल की धारा में’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कई मायनों में अनोखा रहा क्योंकि इसका आयोजन करने वाली संस्था ‘स्पोर्ट्स: ए वे ऑफ लाईफ ने अपने द्वारा किये गये अध्ययन को सार्वजनिक किया। बुधवार को लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम थी ‘चलो खेल की धारा अब मदरसों एवं संस्कृत पाठशालाओं की ओरÓ था। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व ओलंपियन खिलाड़ी व मेजर ध्यानचंद के सुपुत्र अशोक ध्यानचंद, पूर्व ओलपिंयन एमपी सिंह, पूर्व ओलंपियन जलालुद्दीन, जेएनयू के प्रोफेसर हरेराम मिश्र, पूर्व ओलंपियन मौ. इशरफ हुसैन संस्था के सचिव विजय शंकर पाण्डेय, सरंक्षक एमपी कुलश्रेष्ठ, स्पोर्ट्स रिसर्चर व संस्था अध्यक्ष डॉ. कनिष्क पांडे ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्जवलित कर किया। संस्था की ओर से भी विशेष अतिथियों का स्वागत फूल देकर व पटका पहना किया। खेलों से सम्बंधित एक पुस्तक का विमोचन भी कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने किया। यह पुस्तक हिन्दी, ऊर्दू और संस्कृत भाषा में तैयार की गई है, जिससे आसानी से बच्चे इसका अध्ययन कर सकें। भारत के मदरसों एवं संस्कृत विद्यालायों में पढऩे वाले बच्चों की खेल में क्या स्थिति है, की वस्तुस्थिति से सबको अवगत कराया। उत्तर प्रदेश के मदरसों में खेल की गतिविधियों के सम्बंध में किये गये एक अध्ययन के अनुसार कुल पंजीकृत मदरसों की संख्या लगभग 8106 है जिसमें पंजीकृत छात्रों की संख्या 2275455 हैं। यहाँ खेलों के आयोजन की स्थिति 3 प्रतिशत है। मदरसों में खेलकूद पर निर्धारित (पृथक हेड के रूप में) बजट शून्य है। इन मदरसों में बालक, बालिकाओं के इनहाउस खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन संख्या का प्रतिशत लगभग नगण्य है। मदरसों के कितने छात्र-छात्राओं द्वारा जनपद, राज्य, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया गया अथवा कितने छात्र-छात्राओं द्वारा विजय प्राप्त की गयी, इसकी भी संख्या लगभग शून्य ही है। मदरसों में खेलकूद से सम्बंधित किट उपलब्धता केवल 2 प्रतिशत है। इन मदरसों में टूर्नामेंट कराये जाते हैं अथवा नहीं, इसकी भी कोई प्रमाणिक सूचना उपलब्ध नहीं है। स्पोर्ट्स ए वे आफ लाईफ के अध्यक्ष डॉ कनिष्क पाण्डेय द्वारा अवगत कराया गया कि यदि देश में खेल संस्कृति को विकसित करना है और स्पोर्ट्स में सुपर पावर बनना है तो किसी भी पोटेंशियल टारगेट को इग्नोर नहीं किया जा सकता है। यह नहीं कहा जा सकता है कि इन विद्यालयों में पढऩे वाले बच्चों में स्पोर्ट्स आदि की क्षमता नहीं है। पूर्व ओलम्पियन मो जलालुद्दीन ने कहा कि यह एक सही समय पर सही दिशा में लिया गया कदम है। शिक्षाविद् हरे राम मिश्र ने कहा कि इन पुस्तकों के उपलब्ध होने पर बच्चों को भी खेल से अवश्य जोड़ा जायेगा और उम्मीद जताई की ये बच्चें भी कल के भारत के जाने माने खिलाड़ी बनकर उभरेंगे।