गाजियाबाद के ठेकेदारों को मिला भाजपा सांसद का साथ

राज्यसभा सांसद ने नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन को लिखा पत्र, ठेकेदारों को कोविड-19 को लेकर सरकार द्वारा दी गई राहत का लाभ देने की मांग

गाजियाबाद। कोविड-19 (कोरोना संक्रमण) के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त राहत से नगर निगम के ठेकेदार अब तक महरूम हैं। इसके चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदारों की इस मांग को अब भाजपा के राज्य सभा सांसद डॉ. अनिल अग्रवाल ने भी जायज माना है। सांसद डॉ. अग्रवाल ने इस संबंध में सूबे के नगर विकास मंत्री को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई करने की अपील की है। पत्र में उन्होंने शासनादेश को लागू न किए जाने पर खेद प्रकट किया है। साथ ही ठेकेदारों की सुविधा को ध्यान में रखकर शासनादेश लागू करने की अपील की है। दरअसल गाजियाबाद नगर निगम में काम करना ठेकेदारों के लिए काफी कष्टकारी है।

ठेकेदारों की पीड़ा है कि उन्हें शासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सभी आदेश एवं निर्देशों का अनुपालन करना पड़ता है, मगर जो आदेश ठेकेदारों के हित से जुड़े होते हैं, उनमें नगर निगम सक्रियता नहीं दिखाता। वरिष्ठ ठेकेदार इकबाल वहीद ने कुछ दिन पहले ठेकेदारों की आवाज को पुरजोर ढंग से उठाया था। उन्होंने कोविड-19 को लेकर जारी आदेश को अमल में लाने की मांग की थी। दरअसल सरकार द्वारा जारी आदेश जारी पीडब्ल्यूडी में लागू भी हो चुका है।

इस मांग को अब भाजपा सांसद डॉ. अनिल अग्रवाल ने भी जायज माना है। उन्होंने भी इसका समर्थन किया है। वहीं, नगर निगम में कागजी कार्रवाई से भी ठेकेदार परेशान हैं। ठेकेदारों का कहना है कि अन्य विभागों के मुकाबले नगर निगम में अधिक कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है। कागजों को डिजीटल प्लेटफार्म पर अपलोड करने की प्रक्रिया भी बेहद जटिल है। वहीं, नगर निगम में टेंडर डालते समय 10 फीसद धरोहर राशि ली जाती है। जबकि पीडब्ल्यूडी में टेंडर डालते समय सिर्फ 2 फीसद और भुगतान के समय 3 फीसद यानि महज 5 फीसद ही धरोहर राशि जमा होती है। परफारमेंस गारंटी के मामले में भी पीडब्ल्यूडी के नियम गाजियाबाद नगर निगम में लागू नहीं है।

वरिष्ठ ठेकेदार संजीव त्यागी बताते हैं नगर निगम में टेंडर की प्रक्रिया बेहद जटिल है। छोटे-छोटे टेंडरों में भी इतने कागजात लगाने पड़ते हैं कि कई ठेकेदार टेंडर डाल ही नहीं पाते। टेंडर प्रणाली कागजों में इस तरह उलझ गई है कि 60 से 70 प्रतिशत ठेकेदार कंडीशन पूरा ही नहीं कर पाते हैं। नतीजन अक्सर हम देखते हैं कि नगर निगम के टेंडर या तो खाली रह जाते हैं या फिर सिंगल टेंडर के कारण पुन: टेंडर कराना पड़ता है। इसका असर काम की स्पीड पर पड़ता है।Iqbal Vaheed Contractor

ठेकेदार इकबाल वहीद का कहना है कि कोरोना संकट से सभी परेशान हैं। सिविल कॉन्टैक्टर भुगतान सहित विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। ठेकेदारों को समय से भुगतान नहीं होता है। इसके मद्देनजर सरकार न ठेकेदारों को कुछ राहत प्रदान की। धरोहर राशि और परफारमेंस गारंटी को लेकर ठेकेदारों को राहत दी गई है। मार्केट में तरलता बढ़ाने, विकास कार्यों को गति देने और ठेकेदारों की परेशानी को कुछ कम करने के मकसद से सरकार ने यह निर्देश लागू किया था। केंद्र सरकार द्वारा जारी यह निर्देश उत्तर प्रदेश सरकार ने माना, मगर गाजियाबाद नगर निगम में अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है।