तबादले के बाद भी विभागाध्यक्ष कर्मचारियों को नहीं कर रहे रिलीव, पैंडूलम की तरह लटक रहे हैं कर्मचारी
गाजियाबाद। नगर निगम में विभागाध्यक्षों की हठधर्मिता देखने को मिल रही है। विभागाध्यक्षों की इस हठधर्मिता का खामियाजा कर्मचारियों और बाबुओं को भुगतना पड़ रहा है। कर्मचारियों की स्थिति यह है कि वह ना तो वर्तमान तैनाती के स्थान पर ठीक ढंग से काम कर पा रहे हैं, ना उन्हें नए पटल का काम मिल पा रहा है। जबकि बाबुओं के तबादले को लगभग एक माह होने को आ रहा है। विभागाध्यक्षों की इस कार्यशैली को लेकर कर्मचारियों में रोष पनप रहा है। कर्मचारियों की इच्छा है कि या तो उन्हें नए पटल की जिम्मेदारी सौंपी जाए या फिर उन्हें मूल स्थान पर ही काम करने दिया जाए।
तबादले के बाद जिस तरह से उन्हें पैंडूलम की तरह लटका कर रखा गया है, इसका असर उनके काम-काज पर भी पड़ रहा है। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने पिछले माह विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया था। सभी कर्मचारियों को तत्काल नई जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए थे। शासन के निर्देश के क्रम में यह कार्रवाई की गई थी। संबंधित विभागाध्यक्षों को इस संबंध में निर्देश दिए गए थे। स्वास्थ्य, निर्माण, जलकल, उद्यान, गृहकर इत्यादि विभाग के 82 कर्मचारियों को एक से दूसरे पटल पर भेजा गया था, मगर विभागाध्यक्षों की हठधर्मिता के चलते अधिकांश कर्मचारी अब तक नई सीट का चार्ज नहीं संभाल पाए हैं।
दरअसल पुराने विभाग से रिलीव हो जाने के बावजूद बाबुओं और कर निरीक्षकों को नई जिम्मेदारी सौंपने से रोका जा रहा है। इसकी वजह भी विभागाध्यक्ष हैं। विभागाध्यक्षों के इस रवैये से इन कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ी हुई है। वह नई जिम्मेदारी को संभालने के लिए उत्सुक हैं, मगर चाहकर भी वह ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। विभागाध्यक्ष से बैर पालना उनके लिए भविष्य में मुसीबतें खड़ी कर सकता है। कर्मचारियों को इस बात का भी डर सता रहा है कि नगरायुक्त के आदेश की नाफरमानी करने पर उन्हें दंडित किया जा सकता है। इसके चलते वह डर और बेचैनी के साए में काम करने को मजबूर हैं। नगर निगम मुख्यालय और जोनल कार्यालयों में भी यह मुद्दा चर्चाओं के केंद्र में है।
















