• शराब माफियाओं की शामत, आबकारी विभाग की दबंग टीम का अवैध पार्टी पर देर रात टूटी गाज
• बैंक्वेट हॉल में चल रही थी बगैर लाइसेंस शराब पार्टी, अवैध शराब समेत कर्मचारी गिरफ्तार
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद को अवैध शराब के कारोबार को मुक्त करने के लिए चल रही आबकारी विभाग की मुहिम रंग ला रही है। जिले में अवैध शराब के कारोबार का जड़ से सफाय करने के लिए ऑपरेशन नो इलीग्ल अल्कोहॉल अभियान के तहत शराब तस्करों के ठिकानों पर दबिश देने के साथ-साथ बिना लाइसेंस के शराब पार्टी करने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम और उनकी टीम जिले में कहर बनकर टूट रही है। जनपद में आबकारी विभाग ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम के नेतृत्व में चल रहा अभियान ‘ऑपरेशन नो इलीगल अल्कोहॉल’ अब माफियाओं की नींदें उड़ाने लगा है। जिले में लगातार हो रही कार्रवाईयों ने न केवल प्रशासनिक सख्ती को दर्शाया है, बल्कि जनता के बीच सुरक्षा और भरोसे की भावना भी प्रबल की है। गुरुवार देर रात आबकारी विभाग की टीम को सूचना मिली कि वेवसिटी क्षेत्र के यू.के. औरा बैंक्वेट हॉल में अवैध रूप से शराब पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। सूचना की पुष्टि होते ही जिला आबकारी अधिकारी ने तत्काल कार्रवाई का निर्देश जारी किया।
आबकारी निरीक्षक अखिलेश बिहारी वर्मा और डॉ. राकेश त्रिपाठी के नेतृत्व में संयुक्त टीम रात के अंधेरे में बिना समय गंवाए मौके पर पहुंची और बैंक्वेट हॉल पर छापा मारा। जब टीम हॉल के अंदर दाखिल हुई, तो वहां का दृश्य चौंकाने वाला था। चमकती लाइटों के बीच हाथों में जाम लिए कुछ लोग शराब का लुत्फ उठा रहे थे। माहौल पूरी तरह पार्टीनुमा था, मगर जिस चीज की सबसे ज्यादा कमी थी, वह था कानून का पालन। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान मौके से कुल 24 बोतल कोरोना बीयर बरामद की गईं, जिनकी मात्रा लगभग 7.92 बल्क लीटर थी। जब मौके पर मौजूद कर्मचारी प्रशांत चौधरी से लाइसेंस मांगा गया, तो वह कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह अवैध पार्टी हॉल संचालक प्रवेश चौधरी द्वारा आयोजित करवाई गई थी, जो आयोजकों से पहले ही लाइसेंस के नाम पर पैसा वसूल कर लेता था, लेकिन आबकारी विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं लेता था। पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कर्मचारी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया और वेवसिटी थाने में आबकारी अधिनियम के अंतर्गत केस दर्ज किया गया।
वहीं, हॉल संचालक प्रवेश चौधरी के खिलाफ भी कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई ने अवैध शराब कारोबारियों और बिना लाइसेंस आयोजन करने वालों में हड़कंप मचा दिया है। यह पहली बार नहीं है जब आबकारी विभाग ने इस तरह की सख्त कार्रवाई की हो। संजय कुमार प्रथम के नेतृत्व में विभाग की टीम ने जिले के कई इलाकों में अवैध शराब के अड्डों पर लगातार छापेमारी की है। चाहे घनी बस्तियां हों या पॉश इलाके, विभाग की टीम हर जगह एक जैसी मुस्तैदी और साहस के साथ कार्रवाई करती रही है। संजय कुमार प्रथम और उनकी टीम अब जिले में कानून के सच्चे प्रहरी के रूप में उभर चुके हैं, जो किसी भी सूचना पर दिन हो या रात, बिना देरी के मौके पर पहुंचते हैं और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने से नहीं चूकते।
गाजियाबाद में कुछ वर्षों पहले तक शराब माफियाओं का गहरा प्रभाव था। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब वही गाजियाबाद प्रशासन की सक्रियता और सख्ती के लिए जाना जाता है। जिला आबकारी अधिकारी और उनकी टीम की निरंतर कार्रवाई ने जिले की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। अब जनता में कानून पर भरोसा है और माफियाओं में खौफ। आबकारी विभाग की कार्यवाही के बाद साफ हो गया है कि प्रशासन अब किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। जिले की सीमाओं के भीतर अवैध शराब का धंधा करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। ऑपरेशन नो इलीगल अल्कोहॉल अब केवल एक अभियान नहीं, बल्कि माफियाओं के खिलाफ चल रही एक निर्णायक जंग बन चुका है।
खुफिया सूचना बनी हथियार, दबिश में मिला जाम छलकता हॉल
आबकारी निरीक्षक अखिलेश बिहारी वर्मा और डॉ. राकेश त्रिपाठी की संयुक्त टीम को गुप्त सूत्रों से सूचना मिली कि बैंक्वेट हॉल में देर रात शराब पार्टी चल रही है। संजय कुमार प्रथम के निर्देश पर टीम ने बिना देर किए रणनीतिक रूप से वहां छापेमारी की। जैसे ही टीम हॉल के अंदर दाखिल हुई, वहां हाथों में जाम थामे मेहमान रंगीन माहौल में दिखे। तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके की तलाशी ली गई, जहां से 24 बोतल कोरोना बीयर (7.92 बल्क लीटर) बरामद हुई।
बगैर लाइसेंस चल रही थी पार्टी, संचालक करता था वसूली
हॉल के कर्मचारी प्रशांत चौधरी, निवासी अर्थला, से जब शराब पार्टी का लाइसेंस दिखाने को कहा गया, तो वह कोई वैध दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ में सामने आया कि हॉल का मुख्य संचालक प्रवेश चौधरी, निवासी चिरंजीव विहार, आयोजकों से पहले ही भारी भरकम फीस वसूल कर लेता था, लेकिन आबकारी विभाग से कोई अनुमति नहीं लेता था। इस गैरकानूनी हरकत को लेकर आबकारी विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए मौके से कर्मचारी को गिरफ्तार किया और प्रवेश चौधरी के विरुद्ध वेवसिटी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
आबकारी विभाग की कार्यवाही से बदल रही जिले की छवि
एक समय था जब गाजियाबाद को शराब माफियाओं का अड्डा माना जाता था। लेकिन आज वही गाजियाबाद, अपने सख्त प्रशासन और निडर आबकारी टीम की वजह से प्रदेश भर में मिसाल बन चुका है। ऑपरेशन नो इलीगल अल्कोहॉल के तहत अब तक दर्जनों छापेमारी, सैकड़ों लीटर अवैध शराब की बरामदगी, और कई गिरफ्तारी हो चुकी हैं।
















