-कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में लापरवाही बर्दास्त नही: डीएम
-कोविड के उपचार के लिए 19 हॉस्पिटल अधिकृत
गाजियाबाद। जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने शुक्रवार को कोविड डेडिकेट अस्पताल प्रबंधन, ऑक्सीजन उत्पादक कंपनियों एवं ऑक्सीजन सप्लायर्स के साथ अहम बैठक की। बैठक में विशेष तौर पर मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की समीक्षा की गई। कोविड-19 से संबंधित सामान, वैक्सीन, उपकरण, एंबुलेंस एवं अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों पर विशेष जोर दिया गया। डीएम ने बताया कि कोविड-19 महामारी का संक्रमण निरंतर बढ़ रहा है, जिसके कारण कोविड अस्पतालों द्वारा ऑक्सीजन की मांग लगातार बढ़ रही है। कोविड-19 के संक्रमण को देखकर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित कराए जाने के उद्देश्य से डीएम ने कोविड डेडिकेट अस्पताल प्रबंधन, ऑक्सीजन उत्पादक कंपनियों एवं ऑक्सीजन सप्लायर्स के साथ आईटीएस मोहन नगर में बैठक की। समीक्षा में डीएम ने पाया कि इनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स ऑक्सीजन प्लांट भोजपुर गाजियाबाद से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपद एव विभिन्न प्रांतों को ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है। डीएम ने प्राइवेट अस्पताल प्रबंधन से आए प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि आपातकालीन स्थिति में कोई भी अस्पताल किसी पेशेंट को एडमिट करने से मना नहीं करेगा तथा उसका प्राथमिक उपचार कराना तत्काल शुरू कराएगा एवं जरूरत पडऩे पर आधुनिक फैसिलिटी के अस्पताल में शिफ्ट कराएगा। उन्होंने कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. आर0 के0 गुप्ता को निर्देश दिए कि वह स्वास्थ्य विभाग के सभी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक कर कोविड-19 से संबंधित सामान, वैक्सीन, उपकरण, एंबुलेंस एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर उनकी आवश्यकताओं का विवरण प्राप्त कर उपलब्धता कराना सुनिश्चित कराएं ताकि संक्रमण से निपटने के लिए कोई भी चीज की कमी न रह जाए।
डीएम ने संयुक्त आयुक्त उद्योग बीरेंद्र सिंह को निर्देशित किया कि जो भी ऑक्सीजन उत्पादक प्लांट है उनसे यह सुनिश्चित करें कि पहले अपने जनपद को, प्रदेश को और इसके बाद अन्य प्रदेशों को आपूर्ति कराना सुनिश्चित कराएं और किसी भी प्रकार की इंडस्ट्रियल आपूर्ति न की जाए। साथ जो भी ऑक्सीजन उत्पादन है वह शत-प्रतिशत मेडिकल ऑक्सीजन के रूप में किया जाए। डीएम ने प्रतिदिन इनॉक्स ऑक्सीजन प्लांट का भ्रमण कर ऑक्सीजन की उपलब्धता का अनुश्रवण करने के निर्देश दिए हैं। साथ राउंड-द-क्लॉक प्लांट पर 1 अधिकारी व कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाए, जिससे निर्विरोध उत्पादन संपन्न कराया जा सके। टैंकरों के प्लांट के अंदर आने तथा जाने का समय, आपूर्ति की मात्रा एवं जनपद तथा प्रदेश का नाम पंजिका पर अंकित करें। जिलाधिकारी ने कोविड के उपचार के लिए 19 हॉस्पिटल अधिकृत किए है। जिनमें डिस्ट्रिक्ट कंबाइन हॉस्पिटल संजय नगर, संतोष हॉस्पिटल, यशोदा हॉस्पिटल, यशोदा कौशांबी, मैक्स हॉस्पिटल, ली क्रेस्ट हॉस्पिटल, फ्लोरेस हॉस्पिटल, गणेश हॉस्पिटल, नरेंद्र मोहन हॉस्पिटल, गायत्री हॉस्पिटल, अलौकि हॉस्पिटल प्रताप विहार, नवीन हॉस्पिटल, अटलांटा हॉस्पिटल, पलमोनिक मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल राजनगर, हीलिंग ट्री हॉस्पिटल इंदिरापुरम, पलाटिव हॉस्पिटल गोविंदपुरम, चंद्र लक्ष्मी हॉस्पिटल, सुशीला मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं मेधा हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर शामिल है। जिलाधिकारी ने सभी अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए बेडों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में आने वाले कोविड संक्रमित मरीज को पहले प्राथमिक उपचार सुनिश्चित किया जाए, चाहे अस्पताल में बेड उपलब्ध हो या फिर न हो तो मरीज का पहले उपचार होगा। उसके बाद ही अन्य अस्पताल में बेड की उपलब्धता के अनुसार ही भर्ती कराया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के निर्र्देश दिए है, जिसमें जनपद के सभी प्राइवेट अस्पतालों एवं सरकारी अस्पतालों के अस्पताल प्रबंधन शामिल होंगे। जिसकी जिम्मेदारी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सुनील त्यागी को सौंपी है। जिलाधिकारी ने हर कोविड अस्पताल के प्रबंधन को निर्देश दिए कि वह अपने अस्पताल में बेड़ो की उपलब्धता के संबंध में सूचना को प्रदर्शित करेगा तथा उपचार के लिए रेट भी प्रदर्शित किए जाएंगे। किसी भी स्तर पर मरीज के उपचार में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि ऐसा कोई प्रकरण संज्ञान में आया तो जिलाधिकारी ने उसके विरूद्ध कठोर कार्यवाही करने के संकेत दिए। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद हापुड़ स्थित रामा हॉस्पिटल को भी कोविड अस्पताल में शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से मंजूरी उपरांत जल्दी जनपद को एक अन्य 300 बेड वाला कोविड अस्पताल मिल जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया शिकायतें आ रही है कि ए-सिंप्टोमेटिक मरीज अस्पतालों में विभिन्न स्तरों पर सिफारिश कराकर बेड प्राप्त कर अपना उपचार करा रहे हैं। ऐसे में लक्षण युक्त मरीजों को उपचार के लिए बेड उपलब्ध नहीं हो पाता है, जिस पर जिलाधिकारी ने लक्षण युक्त मरीजों को भारती कर उनका उपचार प्राथमिकता पर करने के निर्देश सभी कोविड अस्पताल प्रबंधन को दिए। इसके साथ ही रेमेडिसिवर इंजेक्शन की आपूर्ति के लिए अस्पतालों को निर्देश दिए कि वह अपने डिमांड चिकित्सा औषधि निरीक्षक के समक्ष प्रस्तुत करें। ताकि उनको इसकी आपूर्ति आवश्यकतानुसार समय से सुनिश्चित कराई जा सके। रेमेडिसिवर इंजेक्शन की उपलब्धता का दायित्व अस्पताल प्रबंधन का होगा। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अस्मिता लाल, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ग्रेटर नोएडा अमनदीप डुली, अपर जिलाधिकारी (नगर) शैलेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.के. गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
















