गाजियाबाद। राजधानी दिल्ली से लगभग डेढ़ घंटे की दूरी पर स्थित मेवात सांप्रदायिक हिंसा में हिंदू समाज जल रहा है। सोमवार शाम को यहां दो समुदायों में टकराव हो गया। ये टकराव बाद में हिंसा में बदल गया। अब हालात ये हैं कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की गई। सोमवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भगवा यात्रा निकाल रहे थे। इसी दौरान यात्रा पर पथराव शुरू हो गया। इसके बाद हिंदू पक्ष ने दूसरे समुदाय के लोगों पर भी पथराव कर दिया और हिंसा भड़क गई।
हालांकि, नूंह के मेवात में ही ये हिंसा नहीं रुकी, बल्कि यहां से 40 किलोमीटर दूर सोहना में भी ऐसी ही हिंसा हुई। यह हिंसा यहां समाप्त नही हुई। दंगाइयों ने कई गाडिय़ों को आग के हवाले कर दिया। साइबर थाने को भी फूंक दिया है। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए 2 अगस्त तक इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है। साथ ही नूंह में धारा 144 भी लगा दी गई है। नूंह जिला लगभग 1900 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। गुरुग्राम (गुडग़ांव) से सटे होने के बावजूद नूंह काफी पिछड़ा हुआ माना जाता है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां की आबादी 10.89 लाख है। इस आबादी में 80 फीसदी मुस्लिम है, 20 फीसदी आबादी हिंदू है। मेवात की घटना को देखकर लग रहा है अब हिंदुस्तान में हिंदू सुरक्षित नही है।
मंगलवार को सोशल चौकीदार के संस्थापक केके शर्मा ने अपना बयान जारी करते हुए मेवात में हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि हाल में 2 घटनाएं हुई। जिसमें दिल्ली के नागलोई में जबरदस्त पथराव हिंसा हुई और एक समुदाय द्वारा की गई हिंसा पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, केजरीवाल, ममता आदि किसी के मुंह से एक बोल नहीं निकला। हरियाणा के मेवात में हुई हिंसा और आगजनी के दृश्य देखने से ऐसा लगता है जैसे यूक्रेन में हुई बमबारी का दृश्य हो 5000 हिंदू एक मंदिर में 5 घंटे कैद रहे और उन्हें निकालने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स भेजनी पड़ी। जिस तरह से हिंदू समाज को टारगेट कर उसे निशाना बनाया जा रहा है, इससे हिंदू समाज अपने धार्मिक आयोजन नही कर सकता है। मेवात की भयावह हिंसा पर भी सत्ता लोलुप पार्टियों के नेता एक शब्द भी नहीं बोल रहे।
क्योंकि मामला हिंदुओं के विरुद्ध हिंसा का है। जब चुनाव आता है तो वोट के नाम पर हिंदू समाज का इस्तेमाल किया जाता है और चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें ही बलि का बकरा बनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हुई भयंकर हिंसा में 50 के करीब लोग मारे गए, लेकिन किसी भी विपक्षी पार्टी ने कुछ नही बोला। जबकि कांग्रेस के नेता टीएमसी द्वारा मारे जा रहे थे। तब अधीर रंजन चौधरी बंगाल में रो-रो कर टीएमसी के विरुद्ध बोल रहे थे और अब संसद में तो गलबहियां डाल रहे हैं।
देश में प्रधानमंत्री जिस तरह से कार्य कर रहे है, उस कार्य के आधार पर उन्हें सत्ता से हटाया नहीं जा सकता और अब मोदी को हटाने के लिए सारी विपक्षी पार्टी एकजुट होकर कहीं न कहीं दंगे कराने का काम कर रही है। इसलिए विपक्ष हताश और निराश होकर मोदी विरोध की जगह यह हिंदुओं विरोध करने लगे है। सत्ता के लालच में सभी पार्टी हिंदू विरोधी नजर आ रही है। सारे अल्पसंख्यक पोलराइज्ड है, भाजपा के खिलाफ, फिर हिंदू एकजुट क्यों नहीं? मैं यह नहीं कहता कि हिंदू भी अल्पसंख्यक की तरह हिंसा करें। हिंदू के डीएनए में तो हिंसा है ही नहीं, हिंदू तो शांति का पुजारी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है हिंदुओं के अस्तित्व समाप्त करने पर हम चुप रहे। वहीं इस मामले में इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी कह रहे हैं कि सोनू मानेसर को अरेस्ट नहीं किया गया था, जिस कारण हिंसा भड़की। एक व्यक्ति को अरेस्ट नही करते पर हिंदुओं को मारने की छूट मिल जाएगी?
केके शर्मा ने कहा यह तालिबान नहीं है ओवैसी साहब। इसी तरह ओवैसी एवं अन्य पार्टियों ने नूपुर शर्मा के बयान के बाद कहा था सर तन से जुदा के मामले पर कहा था हिंदुओं की गर्दन काटी गई। अगर यहीं माहौल रहा तो देश में संविधान और कानून का कोई अस्तित्व नही है। इसका मतलब यह है कि कोई भी मारकाट करने के लिए स्वतंत्र है। कानून की कोई उपयोगिता इनके दिमाग में नहीं है। लेकिन अगर कोई ऐसा हिंदू कर देता तो कांग्रेस, ममता, नितीश, केजरी संसद की कार्यवाही रोक कर बैठे हुए होते और सबकी आंखों में आंसू होते। कोई हिंदू मारा जाता है तो कोई बात नहीं और किसी के खिलाफ कोई कार्य हो जाए तो हम तालिबान हैं।
उन्होंने हिंदू समाज से अपील करते हुए राष्ट्र की एकता और देश की सुरक्षा के लिए हिंदू समाज को एकजुट होना होगा। तभी ऐसी मानसिकता रखने वाले नेता, कट्टरपंथी मुस्लिमों से सुरक्षित रहेंगे। हिंदू अगर शांत है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह कमजोर है। हिंदू समाज को अपनी ताकत को पहचानना होगा। तभी ऐसे कट्टरपंथी मुस्लिमों से निपटा जा सकता है। उन्होंने अब विपक्षियों को एक बहाना मिल गया कि सोनू मानेसर को अरेस्ट नहीं किया, इसलिए हमने हिंदुओं के साथ मारकाट की गई।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की तरह कार्य करना होगा। तभी हरियाणा पूरी तरह से सुरक्षित रह पाएगा।
















