-चीफ इंजीनियर ऑफिस पर किया प्रदर्शन
गाजियाबाद। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप सबको बिजली हरदम बिजली के लक्ष्य पर दिन-रात कार्य कर रहे अभियन्ताओं ने गुरूवार को दुसरे दिन भी एक घंटे का कार्य बहिष्कार करते विरोध जाहिर किया।
बिजली अभियन्ताओं की काफी समय से लम्बित ज्वलन्त समस्याओं के समाधान न होने एवं पावर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा की जा रही उत्पीडऩात्मक कार्यवाहियों के विरोध में बिजली अभियंताओं के ध्यानाकर्षण एवं शान्तिपूर्ण आन्दोलन दूसरे दिन शाम 4 बजे से 5 बजे तक कार्य बहिष्कार कर प्रदेश के सभी जनपद मुख्यालयों, परियोजनाओं सहित राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर विरोध सभायें की। आज यानि शुक्रवार को भी एक घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
अभियन्ता संघ गाजियाबाद के क्षेत्रीय सचिव हिर्देश गोस्वामी ने बताया कि सभी बिजली अभियन्ता बेहतर उपभोक्ता सेवा प्रदान करने एवं राजस्व वसूली बढ़ाने, लाइन लॉस कम करके आत्मनिर्भर ऊर्जा निगम बनाने तथा मुख्यमंत्री के ‘सबको बिजली हरदम बिजलीÓ देने के संकल्प को पूरा करने के लिए 24 घंटे जुटे हुए है। मगर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा वितरण क्षेत्रों में ओ0 एण्ड एम0 बजट विगत 2 वर्षों से शून्य किये जाने से विद्युत आपूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पारेषण में भी ओ एण्ड एम बजट आधा एवं अन्य कार्यों हेतु भी बजट लगभग नगण्य कर दिया गया है। वितरण व पारेषण क्षेत्रों एवं विद्युत उत्पादन गृहों पर आवश्यक सामग्री एवं कोयला व मैन, मनी, मेटीरियल उपलब्ध न किये जाने से अभियन्ताओं को जहां एक ओर काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर उनकी लम्बित समस्याओं के समाधान न होने से एवं लगातार हो रही उत्पीडऩात्मक कार्यवाहियों से उनके मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
हिर्देश गोस्वामी ने बताया कि ऊर्जा निगम शीर्ष प्रबन्धन के अनियोजन एवं कोल कम्पनियों को पैसे के भुगतान न किये जाने के कारण उत्पादन निगम की कई विद्युत उत्पादन इकाईयां जो कम क्षमता पर चलाई जा रही हैं वो भी आने वाले कुछ दिनों में पूरी तरह बन्द होने के कगार पर है।
अगले सप्ताह में उत्पादन निगम, जो प्रदेश को सबसे सस्ती बिजली देता है, की सभी विद्युत उत्पादन इकाईयां ठप्प होने वाली हैं जो कि ऊर्जा निगमों में शीर्ष प्रबन्धन की कुप्रबन्धन का उदाहरण है। मुख्यमंत्री को एक विस्तृत पत्र के माध्यम से आगामी त्योहारों के दृष्टिगत प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति कराने के लिए सरकारी क्षेत्र के विद्युत उत्पादन गृहों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।
अभियन्ताओं को पदोन्नति से वंचित किये जाने के क्रम में पदोन्नति नियमों में रातों-रात प्रतिगामी परिवर्तन कर दिये गये हैं जिन्हें आजतक सार्वजनिक नहीं किया गया है। साथ ही विगत 01 वर्ष से अधिक समय से लम्बित समस्याओं के प्रति प्रबन्धन द्वारा उपेक्षात्मक रवैय्या अपनाते हुए समस्याओं का कोई ठोस निराकरण नहीं किया गया है। जिससे बिजली अभियन्ताओं में आक्रोश है।
अभियन्ताओं की प्रमुख मांगे:
1-सभी ऊर्जा निगमों का एकीकरण कर यूपीएसईबी लि0 का पुनर्गठन किया जाये।
2- पदोन्नति के नियमों में किये गये प्रतिगामी परिवर्तन वापस लिये जाये।
3- सभी संसूचित अस्पतालों में कैशलेस मेडिकल की सुविधा दी जाये।
4- उत्पादन निगम में 2008 ई0एण्डएम0 बैच व 2011 सिविल बैच की अतिशीघ्र पदोन्नतियां की जाये।
5- 6 अक्टूबर 2020 को कैबिनेट उप समिति के साथ हुए समझौते के तहत वाराणसी व अन्य स्थानों पर आन्दोलन के कारण दर्ज एफआईआर वापस ली जाये।
6- वर्ष 2000 के बाद नियुक्त सभी अभियन्ताओं के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू की जाये।
7- निदेशक के पदों पर आयु सीमा 60 वर्ष की जाये।
8-पावर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा की गयी समस्त उत्पीडऩात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाये।
9- ग्रेटर नोएडा के निजीकरण व आगरा के फ्रेंचाइजीकरण रद्द किये जाये।
10-सहायक अभियंताओं का नियुक्ति ग्रेड पे 6600 किया जाय तथा तृतीय ए सी पी पर ग्रेड 11000 का वेतनमान देने सहित अन्य वेतन विसंगतियां दूर की जाए।
11- इंजीनियर प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
12-उत्पादन निगम में लम्बित उत्पादन प्रोत्साहन भत्ते का शीघ्र भुगतान किया जाये।
















