विश्व हिंदू परिषद का अधिवेशन 11 एवं 12 जून को, जवलंत मुद्दों पर होगी चर्चा
हरिद्वार। पंचायती अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने कहा है कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल की स्थिति कतई सामान्य नहीं है। यह चिंताजनक विषय है। बंगाल में तेजी से हालात बदल रहे हैं। जिस पर गौर करने की जरूरत है। कश्मीर में भी जो कुछ घटित हो रहा है, उसे सभी देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि 11 और 12 जून को विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शन मंडल की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। विहिप की बैठक में ज्ञानवापी, मथुरा, काशी, कानपुर के अलावा कश्मीर और बंगाल पर विशेष तौर पर चर्चा होगी।
आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि बंगाल की स्थिति सामान्य नहीं है। जिस पर चर्चा करने की महती जरूरत है। उन्होंने बताया कि विहिप का अधिवेशन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। बाबा कामराज महाराज की जयंती पर पत्रकारों से बातचीत में आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि देश की एकता एवं अखंडता जरूरी है। तंत्र सम्राट बाबा कामराज महाराज की कर्मभूमि श्री दक्षिण काली पीठ में मंगलवार को उनकी जयंती मनाई गई। इस मौके पर आचार्य कैलाशानंद गिरी ने बताया कि आठ सौ वर्ष पूर्व बाबा कामराज महाराज द्वारा स्थापित सिद्ध पीठ श्री दक्षिण काली मंदिर में सच्चे हृदय से पूजा-अर्चना करने पर श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है।
मां काली ने उन्हें स्वप्न में इस मंदिर की स्थापना करने का निर्देश दिया था। उन्होंने बताया कि इस स्थान पर बाबा कामराज महाराज ने आल्हा और उनकी पत्नी मछला को दीक्षा दी थी। इस मौके पर उन्होंने मां गंगा का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गंगा सप्तमी, गंगा दशहरा, देव दीपावली, ये तीन दिन गंगा मैया के महत्वपूर्ण दिन होते हैं। इन तीनों दिन श्रद्धालु भी मां गंगा के प्रति अपनी अटूट आस्था को प्रकट करते हैं। उन्होंने बताया कि गंगा दशहरा का दिन भी महत्वपूर्ण होता है। श्रद्धालु गंगाजल को स्वीकार करते हैं। गंगा में स्नान करते हैं।
गंगाजल का सेवन कर मानवीय मौलिक सिद्धांतों को स्वीकार करते हैं। मां गंगा से करोड़ों भारतीयों की आस्था जुड़ी है। उन्होंने गंगा मां के अवतरण पर भी विचार रखे। बाल्यकाल से स्वयं को सनातन धर्म के लिए समर्पित कर देने वाले कैलाशानंद गिरी ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। भारतीय सनातन संस्कृति का देश-विदेश में प्रचार-प्रसार करने के लिए वह खुद हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सन्यासी का जीवन धर्म को समर्पित होता है। साधु-संत देश और धर्म की रक्षा के लिए जीते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है। साधु-संतों ने देश की रक्षा के लिए हमेशा अपना योगदान दिया है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सनातनी संस्कृति को नजदीक से समझने की जरूरत है। युवाओं को देश के गौरवशाली इतिहास की जानकारी देने के साथ-साथ संस्कारवान बनाने की जरूरत है। इस अवसर पर नरेंद्र चौधरी, बाबा हठयोगी, स्वामी सत्यव्रतानंद, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत रोहित गिरी, स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, कृष्णानंद ब्रह्मचारी, बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी, आचार्य पवन दत्त मिश्र, पंडित प्रमोद पांडे, लाल बाबा, स्वामी अनुरागी आदि मौजूद रहे।















