गृहकर बढ़ोतरी पर महापौर ने निगम अधिकारियों के साथ किया मंथन  

• जनता पर अतिरिक्त बोझ मंजूर नहीं, पारदर्शी जांच के बाद ही तय होगा कर: सुनीता दयाल
• गृहकर में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, जनहित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: विक्रमादित्य सिंह मलिक
• 2001 के प्रस्ताव के आलोक में वर्तमान वृद्धि की होगी तुलनात्मक जांच, जनभावनाओं का होगा सम्मान

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम द्वारा डीएम सर्किल रेट से हाउस टैक्स बढ़ाए जाने को लेकर शहर मेंं चल रहे विरोध को रोकने के लिए सोमवार को नगर निगम मुख्यालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में महापौर सुनीता दयाल, नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा, मुख्य अभियंता एन.के. चौधरी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में महापौर सुनीता दयाल ने निर्देश दिए कि गृहकर वृद्धि की समीक्षा 2001 में मा.सदन में पारित उस प्रस्ताव के आलोक में की जाए, जिसमें हर दो वर्ष में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का नियम तय हुआ था। महापौर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्तमान में लागू वृद्धि और उस निर्धारित दर के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया जाए, जिससे आमजन को स्थिति की सही जानकारी मिल सके।

नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि गृहकर निर्धारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध हैं। नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा, और यदि कहीं त्रुटि पाई जाती है तो उसमें सुधार भी होगा।
उन्होंने कहा कि जोनल स्तर पर आ रही शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो।

महापौर और नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अत्यधिक कर वृद्धि की प्रत्येक शिकायत की व्यक्तिगत स्तर पर जांच की जाए। यह देखा जाए कि किन कारणों से कुछ संपत्तियों पर अचानक कर की राशि कई गुना बढ़ी है। अगर तकनीकी या प्रक्रिया में कोई त्रुटि पाई जाती है तो तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। नगर निगम प्रशासन ने यह संकेत दिए हैं कि वह जनभावनाओं के साथ खड़ा है और कर प्रणाली में आवश्यक सुधार के लिए तैयार है। महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि नागरिकों की सेवा और समस्याओं का समाधान ही निगम का प्रथम लक्ष्य है। इसी भावना के तहत यह मंथन किया जा रहा है।

बैठक के दौरान तय हुए प्रमुख बिंदु:
• गृहकर वृद्धि की समीक्षा 2001 के प्रस्ताव के अनुसार की जाएगी।
• जनहित को दृष्टिगत रखते हुए किसी भी प्रकार की अन्यायपूर्ण वृद्धि नहीं की जाएगी।
• जोनवार शिकायतों की समीक्षा तेजी से की जा रही है।
• कर निर्धारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर भी विचार।