गौतमबुद्ध नगर में वारिसान प्रमाण पत्र को लेकर डीएम के फरमान से किसान हलकान हैं। डीएम ने वारिसान प्रमाण पत्र के नाम बदलने से लेकर उसके उपयोगिता को लेकर भी नया नियम जोड़ दिया है। डीएम के आदेश के बाद से पैतृक संपत्ति सहित अन्य संपत्तियों के नाम परिवर्तन को लेकर काफी दिक्कतें आएगी। डीएम के आदेश के बाद से किसानों को प्राधिकरण से काम कराने में भी परेशानी बढ़ेगी तय है। यदि प्राधिकरण के अधिकारियों ने किसानों के प्रति नरम रवैया नहीं अपनाया और उसने भी डीएम की परिपाटी पर काम किया तो किसानों का कोई भी काम होना मुश्किल हो जाएगा। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी किसानों की समस्याओं को सरलतम तरीके से हल करने में लगे हैं वहीं प्रशासनिक अधिकारियों के इस तरह के रवैये से किसानों का काम आसान होने के बजाय मुश्किल होगा। जिला प्रशासन के इस रवैये से नाराज किसानों ने प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेडऩे की तैयारी शुरू कर दी है।
उदय भूमि ब्यूरो
नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में वारिसान प्रमाण पत्र को लेकर डीएम के फरमान से किसान हलकान हैं। डीएम ने वारिसान प्रमाण पत्र के नाम बदलने से लेकर उसके उपयोगिता को लेकर भी नया नियम जोड़ दिया है। डीएम के आदेश के मुताबिक वारिसान प्रमाण पत्र के स्थान पर अब लोगों को पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। परेशानी प्रमाण पत्र के नाम को लेकर नहीं बल्कि प्रमाण पत्र की उपयोगिता को लेकर है। डीएम के फरमान के मुताबिक अब यह प्रमाण पत्र संपत्ति का नाम परिवर्तन करने के लिए काम नहीं आएगा। डीएम के आदेश के बाद से पैतृक संपत्ति सहित अन्य संपत्तियों के नाम परिवर्तन को लेकर काफी दिक्कतें आएगी। डीएम के आदेश के बाद से किसानों को प्राधिकरण से काम कराने में भी परेशानी बढ़ेगी तय है। यदि प्राधिकरण के अधिकारियों ने किसानों के प्रति नरम रवैया नहीं अपनाया और उसने भी डीएम की परिपाटी पर काम किया तो किसानों का कोई भी काम होना मुश्किल हो जाएगा। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी किसानों की समस्याओं को सरलतम तरीके से हल करने में लगे हैं वहीं प्रशासनिक अधिकारियों के इस तरह के रवैये से किसानों का काम आसान होने के बजाय मुश्किल होगा। जिला प्रशासन के इस रवैये से नाराज किसानों ने प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेडऩे की तैयारी शुरू कर दी है।

दरअसल स्थानीय निकायों में संपत्ति में नाम परिवतज़्न के लिए यह प्रमाण पत्र मान्य न होने पर किसानों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ेगा। पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र में जिला प्रशासन द्वारा जोड़े गए बिंदू ने किसानों को नाराज कर दिया है। संबंधित बिंदू में कहा गया है कि यह प्रमाण पत्र स्थानीय निकायों में संपत्ति में नाम परिवतज़्न के लिए मान्य नहीं होगा। जबकि यह प्रमाण पत्र इसी कायज़् के उपयोग में आता है। यदि किसी परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाती है तो उनके स्थान पर संपत्ति में परिवार के अन्य सदस्यों का नाम दजज़् किया जाता है। इसके लिए वारिसान प्रमाण पत्र (पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र) की जरूरत पड़ती है।
यह प्रमाण पत्र जिला प्रशासन जारी करता है। गौतम बुद्ध नगर में भी पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र बन रहा है, मगर इस प्रमाण पत्र में प्रशासन ने नया बिंदु जोड़कर किसानों को नाराज कर दिया है। इस प्रमाण पत्र में लिखा गया है कि स्थानीय निकाय आदि में नाम परिवतज़्न के लिए यह प्रमाण पत्र मान्य नहीं होगा। इसके लिए सक्षम न्यायालय से संबंधित को अपना प्रमाण पत्र जारी कराना अनिवायज़् होगा। अब किसानों को इस प्रमाण पत्र के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह की दिक्कतें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण में सामने आ रही हैं।
प्राधिकरण किसानों की भूमि खरीद रहा है। भूमि के बदले किसानों को पैसा दिया जाता है। अगर किसी परिवार के मुखिया की मौत हो गई। उसके बाद उसे परिवार प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है। इस प्रमाण पत्र में जिला प्रशासन द्वारा दजज़् किए गए एक और बिंदु से परेशानी बढ़ गई है। इसमें लिखा है कि यह प्रमाण पत्र इसके लिए मान्य नहीं होगा। उसे सक्षम न्यायालय से जारी कराना होगा। इसके चलते प्राधिकरण भी पैसा देने में आनाकानी करते हैं।
















