-
फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एविएशन ने एमआरओ विकसित करने की इच्छुक
-
देश के सबसे बड़े नोएडा एयरपोर्ट क्षेत्र में एमआरओ हब एविएशन सेक्टर की नई राह खोलेगा
ग्रेटर नोएडा। देश के सबसे बड़े नोएडा एयरपोर्ट क्षेत्र में एमआरओ हब एविएशन सेक्टर की नई राह खोलेगा। यहां लड़ाकू विमान राफेल व मिराज 2000 के रखरखाव एवं मरम्मत की सुविधा के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर एवं ओवरहालिंग (एमआरओ) विकसित होगा। फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एविएशन ने इसके जमीन मांगी है। इस कंपनी के आने से यहां निवेश के साथ-साथ रोजगार के नये अवसर खुलेंगे।
नोएडा एयरपोर्ट के नजदीक 1365 हेक्टेयर जमीन एमआरओ के लिए अधिगृहीत की गई है। फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एविएशन एमआरओ में पेशेवरों की जरूरत को पूरा करने के लिए स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित करेगी। कंपनी की ओर से केंद्र सरकार को दिया गया। अब प्रस्ताव प्रदेश सरकार के माध्यम से यमुना प्राधिकरण को मिला है। प्राधिकरण ने कंपनी से संपर्क पर जमीन की आवश्यकता के बारे में पूछा है। डसाल्ड एविएशन के आने से एमआरओ के विकास का काम तेजी से शुरू होने की उम्मीद है। एमआरओ में यात्री विमानों के साथ वायु सेना के विमानों के मरम्मत एवं रखरखाव के लिए एमआरओ विकसित होगा। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने कहा कि कंपनी ने कौशल विकास मंत्रालय में कौशल विश्वविद्यालय के लिए प्रस्ताव दिया था। रक्षा मंत्रालय से प्रदेश सरकार होते हुए यह प्रस्ताव यीडा को मिला है। तमिलनाडु में निवेश के लिए कंपनी प्रयास कर रही थी, लेकिन प्रस्ताव मिलने के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए तैयार है। कंपनी सिविल व सैन्य विमानों के लिए एमआरओ विकसित करने की इच्छुक है।
एमआरओ का बाजार तेजी से बढ़ रहा
देश-दुनिया में एमआरओ का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। भारत में 2021 में 170 करोड़ था। 2030 तक इसके 700 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। रोजगार के लिहाज से यह सेक्टर काफी बड़ा है। एमआरओ विकसित होने से लाखों लोगों के लिए रोजगार सृजन होगा। यहां कंपनी को भूमि पर सब्सिडी से लेकर जीएसटी में दस साल तक छूट, 12 करोड़ रुपये सब्सिडी शामिल है।
युवाओं को यह फायदा मिलेगा
इसे सेंटर आफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित किया जाएगा। दसवीं व बारहवीं के अलावा तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा व एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में स्नातक पाठ्यक्रम होंगे। इसमें वैमानिकी से संबंधित पाठ्यक्रम की पढ़ाई होगी। इसके अलावा एयरक्राफ्ट मेंटेनेस में छह माह के अल्प अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम भी होंगे। दरअसल देश में यात्री विमानों को बेड़ा लगातार बढ़ा हो रहा है। 2031 तक भारत में यात्री विमानों की संख्या बढ़कर 1522 हो जाएगी। विमानों के रखरखाव व मरम्मत के लिए देश में अभी सीमित सुविधा है।
















