मास्टर प्लान पर आपत्तियां दर्ज कराने और सुझाव देने के लिए दिया 15 दिनों का समय, प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड की गई मास्टर प्लान 2041
उदय भूमि ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। मास्टर प्लान 2041 को लेकर यमुना प्राधिकरण ने लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। मास्टर प्लान को यमुना प्राधिकरण की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। लोगों से मिलने वाली आपत्तियां और सुझाव के बाद मास्टर प्लान को फाइनल करते हुए उसे प्रदेश सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। मास्टर प्लान 2041 में यमुना सिटी को क्लीन और ग्रीन बनाये रखने के साथ औद्योगिक हब बनाने का इंतजाम किया गया है। मास्टर प्लान को इस तरह से तैयार किया गया है जिससे कि भविष्य में यहां रहने वाले लोगों को कोई परेशानी ना हो और सभी सुविधाएं शहरवासियों को मिले। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि मास्टर प्लान-2041 में आम जन से आपत्तियां एवं सुझाव मांगे गए हैं। कोई बेहतर सुझाव आने पर उसे मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। आगामी 15 कार्य दिवसों में आम जन मास्टर लान के बाबत सुझाव दे सकते हैं। प्राधिकरण की वेबसाइट के अलावा नियोजन विभाग में जाकर भी कोई मास्टर प्लान को देख सकता है। आपत्तियों के निस्तारण के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा।
यमुना प्राधिकरण के मास्टर प्लान 2041 में प्राधिकरण का दायरा बढ़ाया गया है। अभी युमना प्राधिकरण का दायरा 96 गांवों तक है जिसे मास्टर प्लान में बढ़ाकर 131 गांवों तक किया गया है। पिछले महीने हुए बोर्ड बैठक में मास्टर प्लान को स्वीकृति दी गई थी। नये मास्टर प्लान में क्षेत्रफल 32167 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है। मास्टर प्लान 2041 में ग्रीन सिटी प्रस्तावित की गई है। मास्टर प्लान में अंतरराष्ट्रीय शहरों के मानक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, साइकिल ट्रैक, पाथवे सहित कई अन्य बेहतर डिजाइन और सुविधाएं प्रस्तावित की गई है। उत्तर प्रदेश का प्राइड बनने वाले नोएडा एयरपोर्ट का विकास और एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक सुविधा विकसित करने को लेकर भी कई प्रावधान किये गये हैं।
मास्टर प्लान में पर्यावरण संरक्षण और अधिक ग्रीनरी पर जोर दिया गया है। वाटर बॉडीज को संरक्षित किया जाएगा। एयरपोर्ट के आसपास सुनियोजित तरीके से हाईटेक शहर विकसित किया जाएगा। औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले लोगों के लिए सभी सुविधाएं युक्त और सस्ते मकान मिले इसका भी ध्यान रखा गया है। मास्टर मास्टर-2041 में औद्योगिक क्षेत्र का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। औद्योगिक क्षेत्र को पहले के मुकाबले दोगुना कर दिया गया है। यानी भविष्य में औद्योगिक एरिया बढ़ने के साथ-साथ निवेश एवं रोजगार में भी वृद्धि होगी। लेकिन मास्टर प्लान में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि औद्योगिक क्षेत्र में भरपूर हरियाली रहे और क्षेत्र प्रदूषण मुक्त रहे।
अधिक ग्रीनरी के साथ शहर होंगे हाईटेक
मास्टर प्लान-2041 में हरित क्षेत्र को ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। ताकि यहां रहने वाले लोगों को बेहतर हवा-पानी मिल सके। इसके लिए ग्रीन बफर जोन (हरित क्षेत्र) विकसित किया जाएगा। इसमें यमुना नदी, अन्य जल श्रोत, वेट लैंड व वन विभाग के क्षेत्र को आपस में जोड़ा जाएगा। यह क्षेत्र करीब 4500 हेक्टेयर का होगा। इससे शहर हरा-भरा होगा और वायु प्रदूषण की समस्या नहीं रहेगी।
मास्टर प्लान में औद्योगिक क्षेत्र को दोगुना करने का है प्रस्ताव
स्वीकृत मास्टर प्लान को जल्द राज्य सरकार को भेजा जाएगा। मास्टर प्लान में पहली बार हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नए भू उपयोग की श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा मास्टर प्लान में औद्योगिक क्षेत्र को दोगुना कर दिया गया है। नए मास्टर प्लान में 32167 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है। यमुना प्राधिकरण ने मार्स र्कपनी से मास्टर प्लान-2041 को तैयार कराया है। मास्टर प्लान-2041 को यमुना प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में विचारोपरांत मंजूरी दे दी गई है। मास्टर प्लान में अब राज्य सरकार को भेजा जाएगा। प्रदेश सरकार के अनुमोदन के बाद इसे एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को भेजा जाएगा। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
ग्रीन बफर जोन में वाटर बॉडीज को संरक्षित करने पर जोर
मास्टर प्लान-2041 में 32167 हेक्टेयर एरिया प्रस्तावित किया गया है। मास्टर प्लान में ग्रीन सिटी भी प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बस, साइकिल ट्रैक, पाथवे आदि प्रस्तावित हैं। जेवर एयरपोर्ट के आस-पास लॉजिस्टिक सुविधा विकसित करने की बात कही गई है। ग्रीन बफर जोन में वाटर बॉडीज को संरक्षित किया जाएगा। एयरपोर्ट के आस-पास शहर विकसित करने की प्लानिंग की गई है। औद्योगिक इकाइयों में काम करने वालों के लिए सस्ते मकान भी प्रस्तावित किए गए हैं।
मास्टर प्लान में प्रस्तावित क्षेत्र
श्रेणी प्रतिशत में
आवासीय 19.88
व्यावासयिक 5
औद्योगिक 22.74
संस्थागत 7.83
बहु भू उपयोग 8.8
ट्रांसपोर्ट 12.68
हरित 14.71
















