उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की मंडल और जिला समेत सभी इकाइयां भंग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन पंजीकृत के प्रदेश अध्यक्ष सियाराम पांडेय (शांत) ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए गत शनिवार को प्रदेश, मंडलों और जिलों की समस्त कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दी। इसके साथ ही उन्होंने सभी पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। उन्होंने प्रदेश महासचिव से सारे अभिलेख दो दिन के भीतर प्रदेश मुख्यालय में जमा कराने और इस बावत अपना स्पष्टीकरण देने का भी निर्देश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि शीघ्र ही नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा मेरे द्वारा की जाएगी। तब तक यूनियन में निर्वाचन आदि सभी प्रक्रिया बाधित रहेगी।
प्रदेश अध्यक्ष सियाराम पांडेय (शांत) ने कहा कि गत शनिवार को यूनियन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक मेरे निर्देश पर प्रदेश महासचिव रमेश शंकर पांडेय ने बुलायी थी। इस बैठक में केवल प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्यों को ही शामिल होना था लेकिन महासचिव ने अपनी मनमानी करते हुए विभिन्न जिलों के यूनियन के सदस्यों को बैठक में बुला लिया। इतना ही नहीं, कुछ ऐसे लोगों को भी आमंत्रित कर लिया जो यूनियन के सदस्य थे ही नहीं। महासचिव ने जान-बूझकर प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक को साधारण बैठक में तब्दील कर दिया। यही नहीं, उपस्थिति पंजिका पर भी उन्होंने सबके दस्तखत कराये जबकि वहां केवल प्रदेश कार्यकारिणी में मौजूद 12 सदस्यों के ही हस्ताक्षर किए जाने थे। इससे प्रतीत होता है कि उन्होंने बैठक को मूल विषय से भटकाने के लिए यह सब किया। महासचिव ने कार्रवाई रजिस्टर पर भी अध्यक्ष और मौजूद कार्यसमिति से अनुमोदन नहीं कराया। यह गंभीर अपराध और अनुशासनहीनताहै, जिसे नजरंदाज किया जाना यूनियन के व्यापक हित में नहीं है। महासचिव रमेश शंकर पांडेय ने यूनियन की गोपनीयता तो भंग की ही, बैठक की खबरों को अपने ढंग से एक पोर्टल पर चलवाया। बैठक में लखनऊ मंडल व जिला कार्यकारिणी को भंग करने और दो कार्यकारिणी सदस्यों को बर्खास्त करने का प्रस्ताव पास ही नहीं हुआ था, लेकिन उन्होंने इस बात को भी पोर्टल पर चलाया जिससे संस्था से जुड़े लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश महासचिव, उपाध्यक्ष ,अन्य पदाधिकारियों ,सभी मंडलाध्यक्षो-जिलाध्यक्षों समेत प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। नई घोषणा से पूर्व किसी भी पदाधिकारी द्वारा अपने पद का इस्तेमाल विधि विरुद्ध होगा।