शालीमार गार्डन में करवाचौथ व्रत कथा का आयोजन

अखंड सुहाग का प्रतीक है करवाचौथ का व्रत: पण्डित पुल्कित महाराज

गाजियाबाद। करवाचौथ सुहाग की सलामती का पर्व है। यह चांद से सुख समृद्धि मांगने का दिन भी होता है। इस दिन पूरे श्रृंगार में सुहागिनें मां पार्वती और शिव के साथ चांद की पूजा कर मांगती हैं खुशियों का वरदान।

इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां पति के स्वास्थ्य, आयु एवं मंगलकामना के लिए व्रत करती हैं। यह बातें बुधवार को शालीमार गार्डन रोज पार्क वार्ड-78 में भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा, महामंत्री पप्पू पहलवान, नगर निगम पार्षद ओमवती के नेतृत्व में आयोजित कथा कार्यक्रम कथा वाचक पण्डित पुलकित महाराज ने कहीं। उन्होने कहा करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी, जो कि भगवान गणेश के लिए उपवास करने का दिन होता है, एक ही समय होते हैं। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत और इसकी रस्मों को पूरी निष्ठा से करती हैं। विवाहित महिलाएँ भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और अपने व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ्य अर्पण करने के बाद ही तोड़ती हैं।

करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक मिट्टी के पात्र को कहते हैं जिससे चन्द्रमा को जल अर्पण किया जाता है। पार्षद ओमवती ने बताया हिन्दू स्त्रियों के लिए करवा चौथ का व्रत अखंड सुहाग देने वाला माना जाता है। विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने पति की दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की मंगल कामना करती हैं। रात को चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर व्रत को पूर्ण करती हैं। इस दिन सुहागिन स्त्रियां पूर्ण शृंगार करके दिनभर के व्रत के बाद रात को चन्द्रमा के समक्ष यह प्रण लेती हैं कि वे मन, वचन और कर्म से पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेंगी। इस दौरान रितु शर्मा, रेणुका पांडेय, रीना मिश्रा, पूनम, सोनिया, गीता, यशोदा,आरती, प्रिया, नेहा, गीता, मोनिका, आरती, प्रीती, प्रियंका ने कथा सुन पूजा-अर्चना की।