– नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने विज्ञापन कंपनियों के सिंडीकेट को किया ध्वस्त, नगर निगम की आमदनी बढ़ाने का रास्ता साफ
– कोर्ट से स्टे लेकर मनमाने ढंग से विज्ञापन करने और नगर निगम में विज्ञापन शुल्क नहीं जमा करने वालों पर चला हंटर
– विज्ञापन कंपनी गेट मोर का खत्म हो चुका करार फिर भी स्टे की आड़ में गाजियाबाद में चल रहा था कारोबार
– इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम का हंटर होगा और तेज, अब बकाया वसूली की कार्रवाई होगी तेज
उदय भूमि ब्यूरो
इलाहाबाद/गाजियाबाद। शहर को अवैध होर्डिंग्स से मुक्त कराने और विज्ञापन कंपनियों के सिंडीकेट को ध्वस्त करने को लेकर नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर की रणनीति सफल होती दिखाई दे रही है। नगरायुक्त के प्रयास का ही परिणाम है कि जिन कंपनियों ने अभी तक दादागीरी दिखाकर शहर को अवैध होर्डिंग्स से पाट रखा था वह अब बगले झांकने को मजबूर हो रही हैं। नगरायुक्त की इस कार्रवाई से जहां नगर निगम को करोड़ों रुपये का फायदा होगा, वहीं अब कोई भी विज्ञापन कंपनी शहर में मनमाने ढंग से होर्डिंग्स नहीं लगा पाएंगी। गाजियाबाद नगर निगम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विज्ञापन कंपनियों को मिले पुराने सभी स्टे पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद गाजियाबाद नगर निगम द्वारा विज्ञापन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट से गेट मोर को जोर का झटका
इलाहाबाद हाईकोर्ट से विज्ञापन कंपनी मैसर्स गेट मोर फर्म को जोर का झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सिविल न्यायालय द्वारा फर्म के पक्ष में पारित आदेश को स्थगित कर दिया है। इससे नगर निगम को बड़ी राहत मिली है। फर्म पर 1,82,09,795 की विज्ञापन शुल्क की धनराशि बकाया है। यह धनराशि नगर निगम को मिलने की उम्मीद जाग गई है। बकाया राशि का भुगतान करने से बचने के लिए संबंधित फर्म ने नगर निगम को काफी समय से कानूनी झमेले में उलझा रखा था। इस कारण विभाग को राजस्व नहीं मिल पा रहा था।
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क्या है पूरा मामला
नगर निगम सीमांतर्गत विभिन्न तिराहों एवं चौराहों पर दिशा सूचक पटों की स्थापना के कार्य के लिए नगरायुक्त द्वारा प्रदान की गई स्वीकृति विगत 1 दिसम्बर 2015 के अनुपालन में निविदा आमंत्रण सूचना विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई गई थी। उक्त कार्य के सापेक्ष मैसर्स गैट मोर द्वारा एकमुश्त दी जाने वाली आॅफर धनराशि 2,00,000 एवं विज्ञापन शुल्क 2200 रुपए प्रति. वर्ग मी. प्रतिवर्ष की निविदा प्राप्त हुई, जो उच्चतम होने के फलस्वरूप तत्कालीन नगरायुक्त द्वारा 30 दिसम्बर 2016 को स्वीकार कर 2 जनवरी 2016 को मैसर्स गैट मोर फर्म द्वारा उक्त कार्य का अनुबंध निष्पादित किया गया। बाद में मैसर्स गैट मोर फर्म ने मनमानी शुरू कर दी। अनुबंध की शर्तों का अनुपालन न करने तथा विज्ञापन शुल्क नगर निगम कोष में जमा न करने पर फर्म को 21 जून 2016 से 10 बार नोटिस जारी कर निरंतर विज्ञापन शुल्क जमा कराने की मांग की गई। लेकिन हर बार विज्ञापन कंपनी ने किसी ना किसी तरह से मामले को कोर्ट में उलझाये रखा। ऐसे में नगर निगम कार्रवाई नहीं कर पा रहा था। इसी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश आया है, जिसमें विज्ञापन कंपनी को पूर्व निचली अदालत से मिले स्टे को स्टे किया गया है।
नगर निगम का अटका हुआ है करोड़ों रुपया
नगर निगम कोष में 2 करोड़ 74 लाख रुपए की धनराशि जमा न करनी पड़े, इसलिए मैसर्स गैट मोर फर्म द्वारा वर्ष-2019 में वाद सं. 930/2019 योजित किया गया, उस समय फर्म को कोर्ट से स्टे नहीं मिल पाया था। ऐसे में फर्म ने 2,74,00,000 रुपए निगम कोष में जमा करा दिए थे तथा अपने सिविल सूट को वापस ले लिया था। इसके बाद विज्ञापन फर्म को वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु 1 करोड़ 18 लाख रुपए नगर निगम कोष मे जमा कराने के संबंध में 23 जून 2020 को नोटिस जारी किया गया। जिसके खिलाफ विज्ञापन कंपनी ने कोर्ट से स्टे हासिल कर लिया।
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सिविल कोर्ट में चला यह मामला
विज्ञापन फर्म द्वारा सिविल व सत्र न्यायालय के समक्ष इस मंशा से कि स्टे आदेश के लिए केस फाइल किया गया कि जब तक आदेश ना आए उसका टेंडर चलता रहे तथा विज्ञापन शुल्क जमा न कराना पड़े। वाद संख्या-328/2020 दिव्या सांगवान बनाम नगर निगम गाजियाबाद योजित किया गया। इस मामले में न्यायालय अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट सं. 02 गाजियाबाद ने 27 जुलाई 2020 को एक आदेश जारी किया। आदेश में कोर्ट ने कहा कि वादनी द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र 6ग2 के अंतर्गत आदेश 39 नियम 1 व 2 तथा 151 सी.पी.सी. स्वीकार किया जाता है। इस दौरान वाद एवं अग्रिम आदेश तक प्रतिवादी को वादनी फर्म से प्रश्नगत धनराशि की वसूली करने, अनुबंध 2 जनवरी 2016 को निरस्त करने तथा गेट एंट्री, केंटीलिवर को तोड़ने व नष्ट करने से निषेधित किया जाता है।
नगर निगम का 1 करोड़ 82 लाख है बकाया
फर्म का अनुबंध विगत 1 जनवरी 2021 को पूर्ण हो गया तथा फर्म पर बकाया 1,18,71,505 रुपए था, जो फर्म द्वारा निगम कोष में जमा नहीं कराया गया। 2 जनवरी 2021 से 30 जून 2021 तक फर्म पर 63,38,290 रुपए विज्ञापन शुल्क बना। इस प्रकार फर्म पर स्थगन अवधि में किए गए प्रचार-प्रसार के कार्य के सापेक्ष 30 जून 2021 तक कुल बकाया शुल्क 1,82,09,795 रुपए है।
हाईकोर्ट ने दिया स्थगन आदेश
नगर निगम द्वारा वाद संख्या-328/2020 के विरूद्ध उच्च न्यायालय के समक्ष एफएएफओ अपील संख्या-4195/2020 गाजियाबाद नगर निगम बनाम दिव्या सांगवान दायर की गई, जिसमें सिविल न्यायालय द्वारा फर्म के पक्ष में पारित आदेश 27 जुलाई 2020 को उच्च न्यायालय ने अपने आदेश 30 जुलाई 2021 द्वारा स्थगित कर दिया है। मैसर्स गैट मोर फर्म से 1,82,09,795 की बकाया विज्ञापन शुल्क की धनराशि नगर निगम कोष में जमा कराई जानी है।
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हाईकोर्ट के आदेश का होगा व्यापक असर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैसर्स गैट मोर फर्म के मामले में यह आदेश दिया है, लेकिन इसका असर व्यापक होगा। कई और भी विज्ञापन कंपनियां हैं जो गेट मोर को पूर्व में मिले कानूनी संरक्षण की आड़ में अपना काम कर रही थीं। अब ऐसी सभी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
नगर आयुक्त ने ली व्यक्तिगत रूचि
विज्ञापन कंपनियों के सिंडीकेट के कारण नगर निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा था। ऐसे में नगर निगम को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने इस मामले में व्यक्तिगत रूचि ली। वह इस पूरे मामले पर लगातार अपडेट लेते रहे और पूरी मजबूती के साथ नगर निगम के पक्ष को इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष रखा। नगरायुक्त के प्रयासों को रोकने के लिए विज्ञापन कंपनियों के सिंडीकेट द्वारा काफी प्रयास किए गए और नगर निगम को कानूनी दांव पेंच में उलााने की भी खूब कोशिशें हुई। नगरायुक्त के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कंटेप्ट ऑफ कोर्ट किया गया। लेकिन इन कंपनियों को असफलता ही मिली। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी गाजियाबाद नगर निगम को अवैध विज्ञापन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी छूट दे दी है।
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क्या कहते हैं अधिकारी 
नगर निगम का हित सर्वोपरि है। किसी को भी नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की छूट नहीं दी जाएगी। माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश आ गया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिन कंपनियों पर विज्ञापन मद में बकाया है, उनसे बकाया राशि की वसूली की जाएगी।
महेंद्र सिंह तंवर
नगरायुक्त
गाजियाबाद नगर निगम
















