जनपद में विद्यालय अनलॉक, शिक्षण कार्य शुरू

 सात माह बाद खुले 256 विद्यायल

पहले दिन सावधानी पूर्वक स्कूलों में विद्यार्थियों को मिला प्रवेश

 बिना मॉस्क वाले बच्चे मायूस होकर लौटे

उदयभूमि
गाजियाबाद। उप्र शासन के दिशा-निर्देश पर जनपद में करीब सात माह बाद सोमवार से सभी शिक्षा बोर्डों के स्कूल खुल गए। पहले दिन कम छात्र-छात्राएं आए। कक्षा-9, 10, 11 एवं 12 को दो पालियों में आरंभ किया गया है। जिलाधिकारी ने भी कुछ स्कूलों का दौरा किया। काफी समय बाद सोमवार को 256 स्कूलों में कक्षा-9, 10, 11 एवं 12 की शुरुआत हुई। यह कक्षाएं दो पालियों में चलीं। प्रत्येक स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनेटाइजर का इस्तेमाल किया गया। जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने कुछ स्कूलों का भ्रमण किया। उन्होंने कुछ बच्चों से भी बातचीत की। डीएम ने छात्रों से पूछा कि इतने दिनों के बाद विद्यालय आकर उन्हें कैसा लग रहा है। छात्रों ने जबाव दिया उन्हें स्कूल में आकर अच्छा लग रहा है, मगर ज्यादातर बच्चे स्कूल नहीं आए हैं।

उन्हें दोस्तों की कमी खल रही है। डीएम ने कोविड-19 की एसओपी के विषय में भी छात्रों से जानकारी की। स्कूल में अध्यापकों की उपस्थिति के संबंध में डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक एवं संबंधित प्रधानाचार्य से जानकारी मांगी। प्रधानाचार्यों ने बताया कि उनके स्कूलों में सभी अध्यापक उपस्थित हैं। कतिपय अध्यापक अवकाश की अनुमति प्राप्त करने के बाद अवकाश पर हंै। डीएम ने डीआईओएस को स्कूलों पर सतर्क दृष्टि के निर्देश दिए। डीएम ने सभी विद्यालयों में कोविड-19 से संबंधित शिकायत पंजिका बनाने के भी निर्देश दिए हैं, जिसमें कोई भी छात्र/छात्रा कोविड-19 से संबंधित अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।

शिकायत पंजिका को समय-समय पर डीआईओएस चैक करेंगे। विद्यालयों को कोविड सहायता सेल (कंट्रोल रूम) के नम्बर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। कोविड कंट्रोल रूम में विद्यालय कोविड हैल्प लाइन नाम से अलग विंग खोली गई है, जिसमें अध्यापकों एवं छात्र/छात्राओं तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों द्वारा कोविड-19 से संबंधित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। डीएम ने नगरायुक्त को शहर के सभी विद्यालयों के आस-पास सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को पहले दिन स्कूलों में बच्चों की संख्या काफी कम रही। विद्यार्थियों को प्रवेशद्वार पर ही विशेष सावधानी के साथ अंदर जाने को प्रवेश दिया गया। बिना मास्क वालें बच्चों को गेट से ही बैरंग लौटना पड़ा। स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि अभिभावकों की सहमति के बाद ही स्कूल में बच्चों को प्रवेश दिया गया। पंद्रह दिन पहले ही शासन ने गाइड लाइन के अनुसार बच्चों को स्कूल में बुलाने के लिए कहा था। इस बीच जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधकों को गाइड लाइन भेजने के साथ पूरी तैयारी करने का आदेश दिया था। इसके तहत करीब एक दर्जन स्कूलों ने बच्चों को पढ़ाई के लिए बुलाया। गाइडलाइन के अनुसार स्कूलों को पूरी तरह सैनिटाइज करने के बाद दो शिफ्ट में बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था की गई। अभी सिर्फ नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों को ही स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। गाइड लाइन के अनुसार स्कूलों के मुख्यद्वार पर सभी बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद बच्चों के हाथ में सैनिटाइजर दिए गए। मॉस्क सभी बच्चों के लिए अनिवार्य किया गया था। स्कूल के प्रवेशद्वार पर ही बच्चों के साथ लाया गया वह प्रार्थना पत्र चेक किया गया जिसमें अभिभावकों की सहमति दर्ज कराई गई थी। बिना सहमति के बच्चों का स्कूल में प्रवेश प्रतिबंधित है। स्कूलों को आधे बच्चों के साथ निश्चित दूरी बनाकर प्रत्येक कक्षाओं में प्रवेश दिया जाएगा। बना मॉस्क वाले बच्चों को बैरंग ही लौटना पड़ा। सिल्वर लाइन स्कूल और सरस्वती शिशु मंदिर सहित पहले दिन स्कूल प्रबंधकों में उत्साह देखा गया। इस दौरान स्कूल में सभी तरह की सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे। थर्मल स्क्रीनिंग के अलावा सभी कक्षाओं को विशेष रूप से सैनिटाइज किया गया था। इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन आफ इंडिया के चेयरमैन सुभाष जैन का कहना कि स्कूलों में कड़ाई से शासन के गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है।