वक्ताओं का वेद एवं संस्कृत की पढ़ाई नियमित रखने पर जोर
मुजफ्फरनगर। अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के तत्वावधान में शनिवार को प्रख्यात धार्मिक स्थल शुक्रताल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने संगठन के क्रिया-कलाप पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके अलावा वेद एवं संस्कृत की पढ़ाई को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि ब्राह्मण समाज को खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। इस दौरान दंडी महाराज ने अतिथियों को आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व संगठन महामंत्री एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक संजय विनायक जोशी रहे।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वेद और संस्कृति की पढ़ाई नियमित रूप से जारी रहनी चाहिए। ये पुरानी संस्कृति है, जिसे विलुप्त नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने गुरुकुल में अध्य्यनरत बच्चों को वस्त्र वितरण के अलावा पढ़ाई के दौरान सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया। जोशी ने कहा कि गुरुकुल में जब तक बच्चे पढ़ें तब तक उनकी सुविधाओं का ख्याल रखा जाना चाहिए। कार्यक्रम में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण मिश्र ने कहा कि आज वेद एवं संस्कृत की पढ़ाई लुप्त होने के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को मिशनरी स्कूल में भेजने को आतुर रहते हैं। उन्हें लगता है कि मिशनरी स्कूल में पढ़ाने से बच्चे का करियर अच्छा बनेगा। ऐसी अभिभावकों की संख्या कम है, जो बच्चों को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में दाखिला कराकर पढ़ाई कराते हैं। तरुण मिश्र ने कहा कि मौजूदा परिवेश में अभिभावकों को ऐसा लगता है कि संस्कृत पढ़ाने से कोई फायदा नहीं मिलेगा। जबकि यह सोच गलत है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्राह्मण अपने आप में एक संस्था है। ब्राह्मण खुद को कमजोर न समझे। वह हमेशा मजबूत और सशक्त रहा है।

भगवान परशुराम ने ब्राह्मण समाज को विद्या और शस्त्र का ज्ञान दिया है। समय और परिस्थिति अनुसार इनका उपयोग करना होगा। कार्यक्रम में गुरुकुल की तरफ से बच्चों को वस्त्र का वितरण किया गया। इसके अलावा दंडी महाराज ने अतिथियों को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशांत कौशिक भी मौजूद रहे। बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में शुक्रताल प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। इस तीर्थ स्थल की कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है।

पौराणिक एवं धार्मिक कथाओं के अनुसार वर्तमान काल से करीब 5000 साल पूर्व में महाभारत काल में हस्तिनापुर के तत्कालीन महाराज पांडव वंशज राजा परीक्षित को श्राप से मुक्ति के लिए पश्चाताप करना पड़ा था। शुक्रताल में गंगा किनारे अक्षवत वृक्ष है। इस वृक्ष के नीचे राजा परीक्षित को श्राप मुक्ति दिलाने के लिए 88000 ऋषि-मुनियों एवं स्वयं सुखदेव महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा सुनाई थी।
















