सांसे हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाए हम

-खत्म होती जा रही हरीतिमा के सरंक्षण से जूझते नवनीत पांडेय
-उन्हें रोज यह डर सताता है कि सरेनी की तरह पूरी धरती न बन जाए डार्क जोन

रायबरेली। भारतीय सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एनएचएआई के साथ पौधरोपण अभियान चलाने वाले व्यवसायी एवं युवा समाजसेवी नवनीत पांडेय रोज यह डर सताता है कि सरेनी की तरह पूरी धरती कहीं डार्क जोन न बन जाए। इस खौफ से प्रेरित होकर उन्होंने पौधरोपण का जो अभियान एक दशक पहले चलाया वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। उन्होंने 2 करोड़ पौधे लगाने के संकल्प के साथ अपना अभियान शुरू किया है। अब उनका इरादा आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना परिसर में पौधरोपण करने का है। ‘सांसे हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाए हम’ अभियान के तहत जल्द ही रेल कोच परिसर में पौधे लगाए जाएंगे। खास बात यह है कि पौधे लगाने के बाद उनके रखरखाव का ध्यान भी रखा जाता है। इसको लेकर जल्द ही रेलवे के अफसरों से मिलने वाले हैं।

रायबरेली जिले के जोगापुर बरिगांव के रहने वाले नवनीत पांडेय बढ़ते प्राकृतिक असंतुलन को लेकर चिंतित हैं। यही कारण है कि वह तमाम सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर पौधरोपण अभियान कर चुके हैं। उन्होंने 2 करोड़ पौधे लगाने के संकल्प के साथ अपना अभियान शुरू किया है। पौधे लगाने के साथ ही उनके संरक्षण की भी जिम्मेदारी ली है। पांडेय ने बताया कि आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना लालगंज के साथ मिलकर पौधरोपण करेंगे। यह पौधरोपण अभियान कारखाना परिसर में चलाया जाएगा। पौधे लगाने के साथ ही उनके रखरखाव का बंदोबस्त भी किया जाएगा। इसको लेकर रेलवे के अधिकारियों के साथ जल्द ही मुलाकात करेंगे। इस बैठक के बाद पौधरोपण की तिथि तय हो जाएगी और यह अभियान शुरू कर दिया जाएगा।

इन सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर चलाया है अभियान
नवनीत पांडेय ने हिसार मिलिट्री स्टेशन, बीएसएफ के साथ उड़ीसा, दक्षिण बंगाल, हजारीबाग, राजअरहट, टैगोर विला, एनडीआरएफ पश्चिम बंगाल, सीआरपीएफ साल्ट लेक पश्चिम बंगाल, एसोसिएशन ऑफ मरीन इलेक्ट्रोटेक्निकल ऑफिसर, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, बिरला हाई स्कूल वेस्ट बंगाल, स्पंदन एकेडमी पश्चिम बंगाल, यंग बॉयज क्लब, यूथ खालसा क्लब व पंजाब स्पोर्ट्स क्लब पश्चिम बंगाल के साथ पौधरोपण अभियान चला चुके हैं।

भारत गौरव अवार्ड से हैं सम्मानित
पर्यावरण के प्रति उनके काम को देखते हुए उन्हें भारत गौरव अवार्ड मिला है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने उन्हें सम्मानित किया है। इसके अलावा उनको दर्जनों अवार्ड मिल चुके हैं।

अभियान की शुरुआत में उठानी पड़ती थी दिक्कत
इस अभियान की शुरुआत में उन्हें कई तरह की दिक्कतों से गुजरना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने अभियान पर आगे बढ़ गए।पौधरोपण अभियान के अनुभव को बताते कहा कि शुरू में लोग उन्हें माली कह कर पुकारते थे। जब भी वह पेड़ लगाने जाते थे तो लोग माली कहते थे। लोग यह भी कहने लगे कि उन्हें राजनीति में आना है, इसलिए पेड़ पौधे लगा रहे हैं। लेकिन उनका मकसद राजनीति में आना नहीं था, बल्कि हरियाली बढ़ाना है।